जय जिनेंद्र कोडम्बाक्कम वडपलनी श्री जैन संघ प्रांगण में आज तारीख 25 अगस्त गुरुवार महा पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन परम पूज्य सुधाकंवर जी म सा के मुखारविंद से :-पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का द्वितीय दिवस हमें संदेश देने के लिए आया कि हमारी दृष्टि बाहर से हटकर अंतर्मुखी हो जाए। पर्यूषण पर्व कृष्ण पक्ष से प्रारंभ होकर शुक्ल पक्ष में संपन्न होते हैं। और जन-जन को यह संदेश देते हैं कि हमारी आत्मा अनादि काल से कृष्ण पक्ष ही बनी हुई है, उसको कृष्ण पक्षी से निकालकर शुक्ल पक्षी बनाना है।अंतकृत दशांग सूत्र का वाचन करते हुए देवकी महारानी एवं उनके 6 पुत्र मुनियों की घटना पर प्रकाश डाला।
प. पू. सुयशा श्री जी म सा ने फरमाया :-हमें सिर्फ जन्म से ही नहीं बल्कि कर्म से भी जैन बनना है। यह हमारा सौभाग्य है कि हमें जैन कुल मिला है। लेकिन सिर्फ इतना ही काफी नहीं है। इस जन्म को सफल बनाने के लिए हमें सम्यक पुरुषार्थ करने की भी आवश्यकता है।
हमने धर्म को निश्चित समय सीमा और क्षेत्र में बांध दिया है। और इसीलिए हमारा आध्यात्मिक जीवन भी सीमित हो गया है। हम सांसारिक कार्यों के लिए जितने उत्साहित होते हैं उतने उत्साहित धर्म के कार्यों के लिए नहीं होते हैं। अगर कर्म से भी जैन बनना है तो जनत्व के संस्कारों को आत्मसात करना होगा। भीतर में न्याय नीति प्रेम दया करुणा की भावना होनी चाहिए। प्रवचन के पश्चात धार्मिक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।