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ज्ञान वाणी

संसार की सभी कलाओं में धर्म कला सर्वोपरि: कपिल मुनि

संसार की सभी कलाओं में धर्म कला सर्वोपरि: कपिल मुनि

चेन्नई. पुरुषवाक्कम में ताना स्ट्रीट स्थित जैन स्थानक में विराजित कपिल मुनि ने रविवारीय विशेष प्रवचन में कहा जीवन निर्वाह की कला का ज्ञान तो सृष्टि के प्राणिमात्र को हासिल है मगर जीवन निर्माण की कला का ज्ञान तो सिर्फ मनुष्य जीवन में ही संभव है । मुनि ने कहा संसार की सभी कलाओं में धर्म कला सर्वोपरि है ।

इस कला के अभाव में पशु और मनुष्य में कोई खास फर्क नहीं रह जाता। जीवन में प्रत्येक प्रवृत्ति होश और सावधानी से की जाए तो कर्म बंधन से बचा जा सकता है। मनुष्य जीवन एक विराट अवसर है चेतना के परिष्कार और ऊध्र्वारोहण का।

एक संभावना है कि हम इस अस्तित्व की मौलिकता को समझ कर जीवन को निखार सकें और एक गौरवपूर्ण जीवन निर्मित कर सकें। जीवन और संसार में दुख है। सोए हुए लोगों का संसार यानी जो मनुष्य शरीर धारण करने मात्र से ही स्वयं को मनुष्य तो मान बैठे हैं किन्तु दुखी व व्याकुल हैं लेकिन एक मार्ग है इस दुख से मुक्ति प्राप्त करने का।

जीवन के प्रत्येक पल को सावधानी पूर्वक जीते हुए यदि हम एक जागृतिपूर्ण जीवन जीते हैं तो दुख मिट सकता है। जीवन उत्थान और योग्यता के विकास की एक सम्यक प्रक्रिया ही धर्म है। धर्म आंख खोलने की विधि है। यदि आंखें खुली हों तो मार्ग स्वत: बन जाता है। खुली आंखों से यह देख पाना संभव है कि जीवन न सुख है , न दुख।

जीवन तो बस जीवन है। यह हम पर निर्भर करता है कि इसे एक उत्सव बनाकर जीते हैं अथवा तमाशा। सभी जीवों एवं अपने आराध्य से प्रेम करना ही हमारे जीवन का असली लक्ष्य होना चाहिए। इसी में ही मानव जीवन की सार्थकता है ।

नि:स्वार्थ भाव से किये कर्म से ही शुभ प्रयोजन, आनन्द और अमरत्व पाया जा सकता है। निजी स्वार्थ और नाम की भूख से मुक्त हुए धर्माचरण और समाज सेवा नहीं की जा सकती। मंत्री ललेश कुमार कांकरिया ने बताया कि मुनि का प्रवचन सोमवार को भी यहीं होगा।

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