यस यस जैन संघ नार्थ टाउन में चातुर्मासार्थ विराजित गुरुदेव जयतिलक मुनिजी ने प्रवचन में फरमाया कि आत्मबन्धुओ, बच्चों को, परिवार को धर्म से जोड़ना आवश्यक कार्य है जैसे आज टी वी सीरियल देखने में सुगमता लगती है तो क्या धर्म से बच्चो को जोड़ना क्या उससे भी गया बीता है। यदि धर्म स्थान में कार्यक्रम करते रहेगें हो बच्चों को धर्म स्थान में न आने में रुचि रहेगी बच्चे धर्म से जुड़े रहेंगे तो अच्छे इन्सान बनेंगे । जिससे जब स्वाध्यायी का प्रवचन सुन सकते हो तो क्या आप बच्चों द्वारा किये गये धार्मिक कार्यक्रम को नहीं देख सकते।
बडो-2 का मन सामायिक में नही लगता फिर बच्चों को मात्र सामयिक, प्रतिक्रमण करने के लिए कहने से वे कैसे धर्म में जुड़ेंगे ? आपको बच्चो का पार्टी में जाना, पिक्चर में जाना अच्छा लगता है। नहीं ना, तो फिर ये आवश्यक है कि बच्चों को धार्मिक नाटिका नाटका करवाये। महिला मण्डल का कर्तव्य है कि वे ज्यादा से ज्यादा बच्चो, बच्चियों को बहुओं को, धार्मिक कार्यक्रम करवायेंगे । मुनिराज जब गोच्छरी के लिए आते है तब देखते है कि 17-18 साल के छोटे बच्चे भी उठ के मृनिराज को वन्दन नहीं करते, गोच्छरी नहीं वोहराते रूम में छिपकर बैठ जाते। यदि बचपन से ही उन्हें संस्कार दिये जाते तो ऐसा नहीं होता। मुनि के प्रति श्रद्धा रखने से परिवार सहित रोज उन्हें वंदन करने से आपका पूरा परिवार धर्म से जुड़ा रहेगा। बच्चे जब मुनिराज के सानिध्य में आते है तो वे निर्भयी बनेगें अपना ज्ञानवर्धन करेगें। यदि माता पिता में विवेक नही होगा तो बच्चों में विवेक कहाँ से होगा।
आजकल यदि बच्चा दीक्षा लेने की इच्छा रखे तो माता-पिता आज्ञा नहीं देते और उसी बच्चे को अमेरीका भेजने के लिए ख़ुशी -2 तैयार हो जाते हैं। अमेरिका भेजने पर वही संतान माता पिता को हमेशा के लिए भूल जाता है पर माता पिता फिर भी गर्व से कहते है कि हमारा बेटा या बेटी अमेरीका में रहते है। सोच है आपकी यदि दीक्षा लेगा तो आपकी संतानें आपका व जिन शासन का गौरव बढ़ायेगा। यदि बाल्यकाल में ही बच्चों को सही शिक्षा दे दोगे तो वह कभी गलत मार्ग में नहीं जायेगा। आप मेहमान के आने पर में एक ट्यूबलाइट की बिक्री के लिए धर्म स्थान में आना छोड़ देते हो पर पिक्चर जाने के लिए मेहमान को आगे पीछे कर देते हो व्यापार तीन घंटे के लिए बन्द कर देते हो। लेकिन एवन्ता मुति ने अपनी माँ को समझा कर दीक्षा की आज्ञा ले ली थी। आजकल माता पिता बच्चो के हर महीने का फोटोशूट करवाते है सब तरह की वेश भूषा पहनाते हो पर उन फोटो में एक भी धर्म वेश में फोटो नहीं होगा।
यदि बच्चों को आप धर्म में जोड़ने में सहायक नहीं हुए तो अपने बच्चो के आप स्वयं सबसे बड़े शत्रु है। पर्युषण पर्व में हर जीव को मोक्ष में जाने की भावना रहनी चाहिए सवंतसरी सबसे बड़ा दिन होता है इस दिन सपरिवार जिनवाणी श्रवण करने का लक्ष्य होना चाहिए जब मन धर्म से जुड़ जाता है तो तप की धारणा से लेकर पारणे तक बड़ी प्रसन्नता रहती है। तपस्या के काल में साता बनी रहती है। संवत्सरी पर्व पर उपवास सभी को अवश्य करना चाहिए। उपवास आदि तप जैन धर्म का श्रृंगार है इस श्रृंगार से सभी जैनो को श्रृंगारित होना ही चाहिए।
आज 10-15 साल के बच्चों ने तेले व अट्ठाई का ठाठ लगाया। 6 साल की सुहानी ने स्तवन गाया। महिला मंडल ने स्तवन, बहू मंडल ने गीत गाया। बच्चों ने नयसार से महावीर बनने की काव्य नाटिका प्रस्तुत की।
अध्यक्ष अशोक कोठारी ने बताया कि कल जैनों का सबसे बड़ा संवत्सरी पर्व है सबको ज्यादा से ज्यादा तपस्या करना है।