पर्युषण पर्व की सबसे खास बात यह है कि, यह जैन धर्म के पांच मूल सिद्धांतों पर आधारित है। जैन धर्म के 5 मूल सिद्धांत है, अहिंसा (यानी किसी प्रकार की कोई हिंसा नहीं और ना ही किसी को कष्ट पहुंचाना), हमेशा सत्य की राह पर चलना, कभी चोरी ना करना, ब्रह्मम्चर्य और अपरिग्रह (यानी कि जरूरत से ज्यादा धन एकत्रित ना करना)। उपरोक्त बात दिवाकर भवन पर विराजित महासती श्री प्रियदर्शना जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कही आप ने फरमाया कि पर्युषण पर्व का मतलब होता है अपने मन के सभी बुरे विचारों को खत्म करना। ऐसे में पर्युषण पर्व के दौरान लोग अपने मन में उठे किसी भी तरह के बुरे विचार को इस दौरान खत्म करने का संकल्प लेते हैं और इन विकारों पर जीत हासिल करके अपने जीवन में शांति और पवित्रता लाने का उपाय ढूंढते हैं। इस दौरान जैन धर्म के लोग अपने धर्म के मूल सिद्धांतों पर चलने का प्रण लेते हैं और संसार के लिए मंगल कामना करते हैं। साथ ही अनजाने में की गई ग़लतियों के लिए माफी मांगते हुए अपने पापों से दूर होते हैं।
पर्युषण पर्व के दौरान सभी श्रावक श्राविकाये अपने धार्मिक शास्त्रो का वाचंन करते हैं। इस पर्व के दौरान जप,तप,उपवास भी करते हैं। पर्युषण पर्व में दान देना भी पुण्य माना जाता है। महासती कल्पदर्शना जी ने भी धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पर्युषण शब्द का अर्थ होता है परि अर्थात चारों तरफ और उषण अर्थात धर्म की आराधना। जैन धर्म के अनुयाई यह पर्व महावीर स्वामी के मूल सिद्धांतों के आधार पर मनाते हैं। महावीर स्वामी द्वारा दिए गए मूल सिद्धांत हैं, अहिंसा परमो धर्म, जियो और जीने दो, मालव ज्योति पूज्य गुरुवर्या श्री वल्लभ कुवंर जी महाराज साहब की पुण्यतिथि नवकार जाप के साथ 5-5 समायिक करते हुए मनाई गई उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल दुकड़िया एवं कार्यवाहक अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि 24 अगस्त से 31 अगस्त 2022 तक जैन धर्म का पर्युषण महापर्व सामूहिक तेले के साथ प्रारंभ हो रहा है।
पर्यूषण पर्व के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः 8:15 से अंतगढ़सूत्र का वाचन दिवाकर भवन पर किया जावेगा। प्रातः 6:00 बजे से अष्ट दिवसीय अखंड जाप भी प्रतिवर्षानुसार दिवाकर भवन पर होंगे। अधिक से अधिक जप तप धर्म आराधना करते हुए पर्युषण महापर्व को सफल बनाने की अपील उपाध्यक्ष पवन संघवी, कनकमल चोरड़िया, विनोद ओस्तवाल, सुशील मेहता, कमलेश कटारिया,महामंत्री महावीर छाजेड़ सहमंत्री चिंतन टुकड़िया एवं कोषाध्यक्ष विजय कोचट्टा, तरुण खारीवाल पुखराज कोचट्टा पारसमल बरडिया ने की।प्रभावना का लाभ श्रीमान विनय कुमार विपिन कुमार संघवी परिवार ने प्राप्त किया। धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया।