यमुनानगर के मॉडल टाउन एरिया में स्थित जैन धर्म सभा को संबोधित करते हुए उप प्रवर्तक महाश्रमण श्री आनंद मुनि जी महाराज ने कहा कि सुबह उठने पर भगवान की प्रार्थना जरूर करनी चाहिए जिससे हमारी सोच विचारधारा वह कार्यपद्धती पावन बन सके। भगवान से चार चीजें मांगनी चाहिए भगवान मेरे अंदर ऐसे भाव भर दो कि “सब जीवो के प्रति मेरी मैत्री हो” “गुणजनों को देखकर मेरी प्रसन्नता बढ़े” “सब जीवो के प्रति मेरी दया करुणा बढ़े” और “हर परिस्थिति में मध्यस्थ भाव बना रहे”।
ऐसी सोच जब प्रार्थना के माध्यम से बनेगी तब हम अच्छी सोच को विकसित कर पाएंगे जिसने अपनी संपूर्ण सोच को अच्छी, सच्ची पवित्र और पावन बना ली है वही परमात्मा बन सकता है। मुनि श्री ने अपने विषय को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जीवन में यदि दुखों से छुटकारा पाना है तो अपनी सोच को अच्छा बनाएं आपकी सोच में हमेशा प्राणी मात्र के लिए लोक मंगल की कामना हो। जिससे हमारे भीतर शांति के पुष्प खिल जाएंगे जिंदगी फिर महक उठेगी।
मुनि श्री ने आगे कहा कि ऐसा मत सोचना कि हमारे सोचने से क्या अस्पताल में भर्ती सारे मरीज अच्छे हो जाएंगे? अच्छे होंगे या नहीं यह उनके कर्मों के साथ हैं लेकिन यह गारंटी है कि जब हम अच्छा सोचेंगे फिर कम से कम किसी का बुरा तो हमसे नहीं होगा अच्छी सोच से स्वर आत्मा को कर्म बंधनों से मुक्त मुक्ति मिलेगी ध्यान रखना सब को सुखी करने की भावना से सब सुखी भले ही नहीं हो पाते लेकिन हम स्वयं सुखी जरूर बन जाते हैं और उसका कारण यह है कि हम किसी को दुख नहीं देंगे क्योंकि परमपिता परमात्मा ने कहा है अच्छे कर्म का फल अच्छा बुरे कर्म का फल बुरा होता है
अंत में संघ के महामंत्री श्री संदीप जैन ने बताया कि 31 जुलाई को आचार्य सम्राट पूज्य श्री आनंद ऋषि जी महाराज आचार्य गुरुदेव श्री कृष्ण चंद्र जी महाराज की जन्म जयंती त्याग जप साधना के साथ मनाई जाएगी