असाधारण साध्वी प्रमुखाश्री कनकप्रभाजी की स्मृति सभा तेरापंथ सभा के तत्वावधान में मुनि श्री अर्हतकुमार के सान्निध्य में तेरापंथ सभा भवन, गुडियातम में मनाई गई।
धर्मपरिषद् को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री अर्हतकुमार ने कहा कि जन्म लेना बड़ी बात नहीं, जन्म सभी लेते हैं, पर कुछ व्यक्ति अपने करिश्मे से संसार में अमिट छाप छोड़ जाते है। इतिहास वही रचाता है जिसका हर कदम करिश्माई होता है, जिसका चिंतन नूतनता लिए होता है। ऐसा ही एक व्यक्तित्व निखर कर आया साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी के रूप में। कनक का अर्थ होता है स्वर्ण। स्वर्ण को निखार पाने के लिए कितना खपना पड़ता है, आंच पर तपना पड़ता है, तब जाकर वह गले का हार के रूप में शोभा पाता है।
वैसे ही कनकप्रभाजी को गुरुदेव तुलसी ने अपनी अनुशासन की प्रयोगशाला में खूब तपाया और तपाकर साध्वी समाज का सिर मोर बना दिया। असाधारण संघ महानिर्देशिका साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी गुरुदेव तुलसी की विलक्षण कृति थी। उनकी साहित्य सम्पदा विद्वज जन को आश्चर्य चकित एवं विस्मित करती थी और काव्य धारा का मानों अक्षर-अक्षर अमृत बरसाता था। तीन-तीन आचार्यों की सेवा कर उन्होंने उनके दिल में अमिट स्थान बनाया ।

तेरापंथ धर्मसंघ की प्रबल पुण्याई थी कि ऐसी साध्वी प्रमुखाजी मिली, जिन्होंने 50 वर्षों तक एक चक्का राज किया। धर्म संघ के विकास में एवं साध्वी समाज के विकास में उन्होंने अपना पूरा जीवन लगा दिया। जब वह दिल्ली में विराज रही थी और स्वास्थ्य की प्रतिकूलता होने पर युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी ने 47 किलोमीटर का प्रलम्ब विहार कर उन्हें दर्शन दिए और पंचांग प्रणति पूर्वक वंदना की, जो विनय की उत्कृष्ट पराकाष्ठा है। होली के पावन अवसर पर प्रमुखाश्रीजी ने अनशन का अभिनव रंग बिखेरा और उसी दिन महाप्रयाण कर दिया। हम यही मंगल कामना करते है कि शासन माता अपनी मंजिल को शीघ्र ही प्राप्त करे।
मुनि भरतकुमारजी ने कहा साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी जिनका जीवन एक बोलता जीवन है, आदर्श जीवन है। वह साध्वी समाज का कोहिनूर थी। शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम थी। उनका हर कार्य कला से परिपूर्ण था, जो जन जन के लिए प्रेरणा स्तोत्र है। मुनि जयदीपकुमार ने मुनिश्री द्वारा रचित शासन माता पर गीत का संगान किया। कार्यक्रम का संचालन मानमलजी नाहर ने किया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में तेरापंथ महिला मंडल ने गीत एवं दीपक आछा ने कविता द्वारा शासन माता को भावांजलि दी। साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी को श्रद्धांजली के रूप में सभा में चार लोगस्स का ध्यान किया गया। संचालन मुनि भरतकुमारजी ने किया। इससे पूर्व मुनिवृंद वेलूर के विहार कर गुडियातम पधारे।
प्रचार प्रसार प्रभारी
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, चेन्नई