Share This Post

Featured News / Featured Slider / ज्ञान वाणी

तप करना सज्जनता है, तो त्याग करना शूरवीरता है- गच्छाधिपति उदयप्रभ सूरीजी

तप करना सज्जनता है, तो त्याग करना शूरवीरता है- गच्छाधिपति उदयप्रभ सूरीजी

किलपाॅक श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में विराजित योगनिष्ठ आचार्य केशरसूरीजी के समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यश्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म.सा.ने प्रवचन में कहा कि वचन से भी ज्यादा महत्वपूर्ण आचरण होता है। धर्म विनयमूलक होता है। आत्मा के विशिष्ट कर्मों को दूर करने की प्रक्रिया विनय कहलाती है। विनय सच्चा तभी होता है, जब मन में अहंकार न हो। विनय दो प्रकार के होते हैं अगार और अणगार। अगार का मतलब गृहस्थ में रहने वाले और अणगार का मतलब गृहस्थ में नहीं रहने वाले साधु भगवंत। जब आपको धर्म समझ में आए और धर्म सुनाने वाले अच्छे लगे, गुणवान लोग अच्छे लगे तो समझना आप में विनय गुण भरा हुआ है। यदि ज्ञान कम होगा और श्रद्धा अधिक होगी तो मोक्ष हो सकता है। ज्ञान अधिक और श्रद्धा कम, तो कोई मतलब नहीं।

आचार्य प्रवर ने कहा श्रावक धर्म के दो प्रकार होते हैं अणुव्रत का पालन और श्रावक की 11 प्रतिमा का पालन। साधु धर्म के पंच महाव्रत का पालन और 12 भिक्षु की प्रतिमा का पालन होता है। आचार्यश्री ने कहा तप करना, यह सज्जनता है और त्याग करना, यह शूरवीरता है। शादी न हो और ब्रह्मचर्य पालना, वह सज्जनता है और शादी के बाद ब्रह्मचर्य पालना, वह शूरवीरता है। जिनशासन में तप से ज्यादा महत्व त्याग का है। स्नान करने से छःकाय जीवों की विराधना होती है। स्नान शरीर का सौंदर्य है और शरीर कामवासना का साधन है इसलिए साधु भगवंत इसका त्याग करते हैं। उन्होंने कहा एक बूंद पानी में असंख्य जीवों का प्रमाण है। संयम जीवन में भाव की शुद्धि इतनी सुंदर होती है कि द्रव्य शुद्धि की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

भाव शुद्धि यानी कषायों क्रोध, मान, माया, लोभ, राग, द्वेष की मंदता होनी चाहिए। भोजन पद्धति, चिंता और विषयों का सेवन आदि भी शरीर की दुर्गंधता का कारण है। गुरुदेव ने कहा गहरी नींद सोने वाले को उठा सकते हैं परंतु जागते हुए लोगों को कोई भी नहीं उठा सकते। गुरुदेव ने बताया शरीर में 16 महारोग और पौने छह करोड़ छोटे रोग होते हैं। प्रवचन के दौरान नेल्लूर जैन संघ ने उपस्थित होकर आचार्यश्री से आगामी 2024 के चातुर्मास की विनंती की। संघ ने 21 दिसंबर से काकटूर तीर्थ पर शुरू होने वाले उपधान तप में सबको जुड़ने का आग्रह किया।

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Skip to toolbar