चेन्नई. कोडमबाक्कम-वड़पलनी जैन भवन में विराजित साध्वी सुमित्रा ने कहा की एक उपवास का प्राश्चित मनुष्य दो हजार गाथाओ के माध्यम से कर सकता है। कभी किसी का उपवास का पारणा होता है और किसी कारण से वो उपवास का पारणा नहीं कर पाते तो सोचते हैं कि इसका परिणाम क्या होगा।
महान पुरुष बतलाते हैं कि ऐसे समय मे मनुष्य दो हजार गाथाओ का अध्यन कर प्राश्चित कर सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मनुष्य के भटकने का मूल कारण इंद्रियों पर नियंत्रण नहीं होना है।
लेकिन तप ऐसा कृत है जिससे मनुष्य अपनी इंद्रियों को बस में कर सकता है। बस में एक बार अगर कर लिया तो दोबारा समश्या नहीं होगी। तप करना आसान नहीं होता है। उसके लिए आग की गर्मी को भी मनुष्य को सहन करना पड़ता है। जो मनुष्य उसको सहन करना सीख जाते हैं वह कुछ भी करना सीख जाते है।
उन्होंने कहा कि जीवन बहुत ही खूबसूरत होती है लेकिन मनुष्य उसको अपनी कर्मो की वजह से बदसूरत कर देता है। उसकी खूबसूरती को बनाये रखना ही मनुष्य का पहला कर्तव्य होता है। जो चीज मनुष्य बना नही सकता उसको बिगाड़ने का भी हक नहीं है। मनुष्य आत्मा बना नहीं सकता तो उसे अशुद्ध करना नहीं चाहिए।
जो स्वयं कर सको उसको बनाओ बिगाड़ो लेकिन जो परमात्मा का है उसकी गरिमा उसी प्रकार बना कर वापस करनी चाहिए। यही जीवन की सच्चाई है जिसे वर्तमान में कोई नहीं मानता है। कल आनुपूर्वी कलश के लाभार्थी अशोककुमार महावीरचंद गौतमचंद तालेड़ा अपने निवास स्थान ले जाएंगे। संचालन मंत्री देवीचंद बरलोटा ने किए