Sagevaani.com @रायपुर। उपाध्याय प्रवर ने कहा कि आपके मन में सवाल आता है कि क्यों धर्म की राह पर चलने वाले को संकट का सामना करना पड़ता है? लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी धर्म की राह पर चलने वालों को संकट झेलना पड़ता है। कई धार्मिक व्यक्ति होते हैं जिनको संकट का सामना करना ही नहीं पड़ता है। कई बार धारणा बनती है कि जो धर्म की राह पर चलता है उसे संकट झेलना ही पड़ता है। कई धर्मात्मा हैं जिनके काम सहजता से हो जाते हैं। और कई नास्तिक, जो धर्म को नहीं मानते हैं, उनके जीवन में भी संकट आते हैं। ऐसा कोई नियम नहीं है। लेकिन धर्म-अधर्म के आधार पर आप इसे आधार नहीं दे सकते। एक धार्मिक व्यक्ति की लेश्या भी कृष्ण लेश्या हो सकती है, और एक अधर्मी की लेश्या शुक्ल लेश्या हो सकती है। जीवन की समस्याओं का स्रोत लेश्या पर है। इसलिए लेश्या का गणित समझना जरुरी है।
उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि रविवार को लालगंगा पटवा भवन में लेश्या पर प्रवचन दे रहे थे। उक्ताशय की जानकारी रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने दी। धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवीण ऋषि ने कहा कि जिसकी शुक्ल लेश्या है उसकी बीमारी छोटी से दवा से ठीक हो जाती है, कृष्ण लेश्या वाले की बीमारी कितना भी इलाज करा लो, ठीक नहीं होती है। शरीर का इलाज डॉक्टर कर सकता है, लेकिन बीमारी की जड़ अदृश्य है। हमारा शरीर दृश्य है, लेकिन बीमारी की जड़ हमारे अंदर है, जो दिखाई नहीं देता। कृष्ण लेश्या के एक ही काम है, ये पांच अस्रों में रस लेता है- मिथ्या, कषाय, प्रमाद, अशुभ योग और अव्रत। कषाय सब मे है, लेकिन कृष्ण लेश्या का कषाय समाप्त नहीं होता है, इसे कहते हैं अनंतानुबंधी कषाय। इसका संबंध अनंत के साथ है।
अगर किसी के साथ 10 साल पहले कोई घटना घटी होगी, और आज भी वह उसे लेकर दुखी है, तो इसे कहते हैं अनंतानुबंधी कषाय। अगर आपको सुखी रहना है तो अनंतानुबंधी कषाय को समाप्त करो, अपने अतीत को पकड़कर मत रखो। जीवन की समस्याओं का मूल कारण है कि हम कई सालों की गन्दगी अपने मन में उठाकर जीते हैं। आप यह तय कर लें कि साल भर पहले की कोई बात आपकी जुबान पर न आए, आप अपने अतीत को जितना पकड़कर रखोगे, उतना तपोगे। आप अतीत में जा नहीं सकते हैं, आपको भविष्य में जाना है, लेकिन हम पीछे देखते हैं। आगे बढ़ते वक्त पीछे देखेंगे तो ठोकर लगेगी ही।
रायपुर श्रमण संघ के अध्यक्ष ललित पटवा ने बताया कि तीर्थेश मुनि की निश्रा में प्रत्येक रविवार बच्चों के लिए ‘बीइंग अर्हम’ शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर बच्चों को धर्म से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। पिछले 12 रविवार से यह शिविर संचालित हो रहा है। तीर्थेश मुनि के साथ 12 टीचर्स बच्चों को ट्रेनिंग दे रहीं हैं। धर्मसभा में प्रवचन के बाद ‘बीइंग अर्हम’ शिविर के बच्चों ने गीत गाया और एक लघु नाट्य से संगमदेव के जीवन का वर्णन किया। सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने बच्चों का अभिनन्दन कर उनका उत्साह बढ़ाया।
राष्ट्र संत आनंदऋषिजी की पुण्यभूमि अहमदनगर (महाराष्ट्र) से आज धर्मसंघ का एक प्रतिनिधिमंडल रायपुर पहुंचा। संघ का नेतृत्व कर रहे थे राजेंद्र चोपड़ा। वे उपाध्याय प्रवर प्रवीण ऋषि के दर्शन करने और एक विनती लेकर आये थे। उन्होंने उपाध्याय प्रवर से आनंदऋषिजी की पुण्यभूमि अहमदनगर में चातुर्मास और प्रवचन के लिए आग्रह किया। उपाध्याय प्रवर ने कहा कि साल 2025 में वे जनवरी से दिसंबर तक आनंदऋषिजी की जन्मभूमि चिचोंड़ी और पुण्यभूमि अहमदनगर में रहेंगे। 2025 में अर्हम विज्जया के 25000 ट्रेनर्स चिचोंड़ी आने वाले हैं। धर्मसंघ की भक्ति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने 2025 वर्षवास चिचोंड़ी और अहमदनगर में करने का भाव रखा।