Share This Post

Featured News / Featured Slider / Khabar

जिनशासन के महान प्रभावक गुरूदेव महान, श्रद्धाभाव से करे गुरू मिश्री रूप रजत गुणगान

जिनशासन के महान प्रभावक गुरूदेव महान, श्रद्धाभाव से करे गुरू मिश्री रूप रजत गुणगान

भक्ति भाव से मनाई गई पूज्य गुरूदेव मिश्रीमलजी म.सा. एवं रूपचंदजी म.सा. की जयंति* 

श्रावक-श्राविकाओं ने गुरू द्धय के चरणों में समर्पित की तेला तप की भेंट

Sagevaani.com /सूरत । मरूधर केसरी पूज्य मिश्रीमलजी म.सा. की 134वीं जयंति एवं एवं लोकमान्य संत शेरे राजस्थान पूज्य रूपचंदजी म.सा. की 97वीं जयंति के उपलक्ष्य में छह दिवसीय गुरू द्वय पावन जन्मोत्सव कार्यक्रम के तीसरे दिन गुणानुवाद सभा के रूप में मुख्य समारोह का आयोजन किया गया। मरूधरा मणि महासाध्वी जैनमतिजी म.सा. की सुशिष्या सरलमना जिनशासन प्रभाविका वात्सल्यमूर्ति इन्दुप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ गोड़ादरा के तत्वावधान में मुख्य समारोह का आयोजन मंगल पाण्डे कम्युनिटी हॉल में किया गया। समारोह में देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाएं गुरू भक्ति करने के लिए पहुंचे थे। गुरू द्धय के चरणों में कई श्रावक-श्राविकाओं ने तेला तप की भेंट भी समर्पित की। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ सुश्रावक हुक्मीचंदजी कोठारी ने की। मुख्य अतिथि बेंगलोर से पधारे सुश्रावक पारसमलजी लोढ़ा, तख्तराजजी बाफना व अशोकजी धोका थे। ध्वजारोहणकर्ता मदनलालजी शांतिलालजी सहलोत देवगढ़वाले एवं लूणकरणजी, सुनीलकुमारजी कोठारी मेड़तासिटी वाले रहे। समारोह में महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. ने कहा कि पूज्य गुरूदेव मरूधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. ओर पूज्य रूपचंदजी म.सा. की जोड़ी ने जीवदया व मानव सेवा की अनुठी मिसाल प्रस्तुत करते हुए जिनशासन की महान प्रभावना की। ऐसे महान संतो ंके गुणों को हम अपने जीवन में अंगीकार कर सके तो हमारा जीवन भी सार्थक हो जाएगा। गुरू के गुणों का न तो आदि न अंत है। उनके प्रति मन की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं मिलते है। उन्होंने अपने कार्यो से जिनशासन की महिमा बढ़ाई ओर वह ऐसे संत थे जिनका सम्मान जैन ही नहीं 36 ही कौम के लोग करते थे। वह मूक पशुओं के रक्षक, मानवता के मसीहा होने के साथ सेवा व करूणा के सागर थे। जो उनके चरणों में आया वह उनका भक्त बनकर रह गया। रोचक व्याख्यानी प्रबुद्ध चिन्तिका डॉ. दर्शनप्रभाजी म.सा. ने कहा कि गुरूदेव पूज्य मिश्रीमलजी म.सा. एवं रूपचंदजी म.सा. गुणों की ऐसी प्रतिमूर्ति है कि उनका जितना गुणगान करें कम होगा। पूज्य रूपचंदजी म.सा. में मरूधर केसरी पूज्य मिश्रीमलजी म.सा. की छवि नजर आती थी। इन महान संतों की दृष्टि पड़ी ओर कृपा हो गई उसका जीवन ही बदल गया। उन्होंने हर वर्ग व समाज की सेवा करने के साथ सबको साता पहुंचाने का कार्य किया। इन गुरूओं की जयंति पर सच्ची श्रद्धाजंलि यहीं होगी कि हम जीव दया का संकल्प लेते हुए अपने व्यसनों का त्याग करें ओर जीवन को निर्मल पावन बनाए। आगम मर्मज्ञा डॉ. चेतनाश्रीजी म.सा. ने कहा कि गुरू द्धय का पूरा जीवन ही मार्गदर्शक है उन्होंने धर्म व जिनशासन की महिमा बढ़ाई। जप, तप, साधना के बल पर उन्होंने जीवन में ऐसे चमत्कार किए जिनसे पीड़ित मानवता की सेवा के साथ लाखों मूक पशुओं को अभयदान मिला। तत्वचिंतिका डॉ. समीक्षाप्रभाजी म.सा. ने कहा कि कि मरूधर केसरी व रूपमुनिजी म.सा. की जोड़ी ने मानव सेवा व जीवदया के लिए प्रेरणादायी मिसाल कायम की। उन्होंने पूरा संयम जीवन संघ-समाज की मजबूती के लिए समर्पित कर दिया। सेवाभावी दीप्तिप्रभाजी म.सा. एवं विद्याभिलाषी हिरलप्रभाजी म.सा. ने गुरूभक्ति से ओतप्रोत भजन की प्रस्तुति दी। अतिथियों का स्वागत श्रीसंघ एवं स्वागताध्यक्ष शांतिलालजी नाहर परिवार द्वारा किया गया। समारोह का संचालन संपतलालजी गुगलिया जसनगर ने किया। समारोह में कई श्रावक-श्राविकाओं ने तेला,बेला, उपवास,आयम्बिल, एकासन आदि तप के भी प्रत्याख्यान लिए। समारोह के बाद गौतमप्रसादी का आयोजन किया गया जिसके लाभार्थी हंसराजजी निखिलजी,पंकजजी तातेड़ परिवार (नासून) ब्यावर रहे। समारोह में शामिल होने के लिए सूरत के विभिन्न उपसंघों व आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं पहुंचे। समारोह में चिखली,बारडोली,चलथान,बेंगलोर,अहमदाबाद,चैन्नई सहित कई स्थानों से गुरू भक्त श्रावक-श्राविकाएं पहुंचे थे। आयोजन को सफल बनाने में श्रीसंघ के पदाधिकारियों व सदस्यों के साथ श्रीचंदनबाला जैन महिला मण्डल, श्री वर्धमान जैन नवयुवक मण्डल, श्री सुन्दरी जैन बहु मण्डल एवं श्री महावीर जैन कन्या मण्डल की सदस्यों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई।

 *तेला तप की आराधना के साथ तपस्याओं का लगा ठाठ*

महासाध्वी मण्डल की प्रेरणा से लिम्बायत-गोड़ादरा क्षेत्र में धर्म ध्यान व तप साधना की गंगा निरन्तर प्रवाहित हो रही है। गुरू द्धय जयंति पर तेला तप आराधना के तहत गुरूवार को करीब 70 तपस्वियों ने तेला तप के प्रत्याख्यान लेकर गुरू चरणों में तपस्या की भेंट च़ढ़ाई। अनुमोदना के जयकारों की गूंज के बीच पूज्य इन्दुप्रभाजी म.सा. के मुखारबिंद से सुश्राविका शिमलाजी सांखला ने 22 उपवास एवं प्रमोदजी नाबेड़ा ने 11 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। कई श्रावक-श्राविकाओं ने तेला,बेला, उपवास,आयम्बिल, एकासन आदि तप के भी प्रत्याख्यान लिए।

 *बेंगलोर में आगामी चातुर्मास करने की भावपूर्ण विनती*

समारोह में बेंगलोर से संघ लेकर पधारे श्रावक-श्राविकाएं भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संघ के साथ आए वरिष्ठ सुश्रावकों ने पूज्य महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. आदि ठाणा के श्रीचरणों में वर्ष 2025 का चातुर्मास बेंगलोर में करने के लिए भावपूर्ण विनती प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि बेंगलोर के गुरूभक्त लंबे समय से आपके चातुर्मास की प्रतीक्षा कर रहे है। सभी को उम्मीद है कि अगले वर्ष आपका चातुर्मास प्राप्त होगा। महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. ने कहा कि चातुर्मास के बारे में समय आने पर पूज्य प्रवर्तक गुरूदेव श्री सुकुनमुनिजी म.सा. ही निर्णय करेंगे।

 *जीवदया के लिए लक्ष्य से दो गुणा से अधिक राशि एकत्रित*

लोकमान्य प्रवर्तक रूपचंदजी म.सा. की 97 वीं जयंति होने से से महासाध्वी इन्दुप्रभाजी म.सा. ने कहा कि गुरूदेव की जीवदया की भावना के अनुरूप कम से कम 97 हजार रूपए की राशि एकत्रित करने का प्रयास होना चाहिए। समारोह में श्रावक-श्राविकाओं ने सहयोग के लिए खुलकर हाथ बढ़ाए तो कुछ ही देर में जीवदया के लिए लक्ष्य से दो गुणा से अधिक ढाई लाख रूपए की राशि एकत्रित हो गई। इसी तरह वात्सल्यपुरम अनाथालय के बच्चों की सहायता के लिए भी एक लाख 51 हजार रूपए की सहयोग राशि एकत्रित हुई। गुरू द्धय जयंति महोत्सव के छह दिवसीय आयोजन के चौथे दिन शुक्रवार 16 अगस्त को दो-दो सामायिक के साथ श्री उवसग्गं स्रोत का जाप होने के साथ सामूहिक तेला तप पारणे होंगे। महोत्सव के पांचवे दिन दो-दो सामायिक के साथ भक्तामर के 36वें श्लोक का जाप होगा। छह दिवसीय आयोजन का समापन 18 अगस्त को एकासन दिवस मनाते हुए गुरू जाप, श्रावक दीक्षा व गुणानुवाद के साथ होगा।

 *श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, लिम्बायत,गोड़ादरा,सूरत*

सम्पर्क एवं आवास व्यवस्था संयोजक-

अरविन्द नानेचा 7016291955

शांतिलाल शिशोदिया 9427821813

 *प्रस्तुतिः* निलेश कांठेड़

अरिहन्त मीडिया एंड कम्युनिकेशन,भीलवाड़ा

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Skip to toolbar