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कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव है

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव है

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे मनाई गई कृष्ण जन्माष्टमी एवं परम पूज्य गुरुदेव श्री साहिल मुनि म. सा. का 52 वा जन्म दिवस पर साध्वी चन्दन बाला ने कहा कि कृष्ण जन्म के समय घनघोर वर्षा हो रही थी। चारों तरफ़ घना अंधकार छाया हुआ था। श्रीकृष्ण का अवतरण होते ही वसुदेव–देवकी की बेड़ियाँ खुल गईं, कारागार के द्वार स्वयं ही खुल गए, पहरेदार गहरी निद्रा में सो गए। वसुदेव किसी तरह श्रीकृष्ण को उफनती यमुना के पार गोकुल में अपने मित्र नन्दगोप के घर ले गए। वहाँ पर नन्द की पत्नी यशोदा को भी एक कन्या उत्पन्न हुई थी। वसुदेव श्रीकृष्ण को यशोदा के पास सुलाकर उस कन्या को ले गए। कंस ने उस कन्या को पटककर मार डालना चाहा। किन्तु वह इस कार्य में असफल ही रहा। श्रीकृष्ण का लालन–पालन यशोदा व नन्द ने किया। बाल्यकाल में ही श्रीकृष्ण ने अपने मामा के द्वारा भेजे गए अनेक राक्षसों को मार डाला और उसके सभी कुप्रयासों को विफल कर दिया। अन्त में श्रीकृष्ण ने आतातायी कंस को ही मार दिया। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का नाम ही जन्माष्टमी है। गोकुल में यह त्योहार ‘गोकुलाष्टमी’ के नाम से मनाया जाता है। साहिल मुनि जी हमारे छोटे गुरु भाई हैं हम उनके जन्मदिन पर ढेर सारी शुभकामनाएं करते है ।

साध्वी विनित प्रज्ञा ने कहा कि कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव है। योगेश्वर कृष्ण के भगवद्गीता के उपदेश अनादि काल से जनमानस के लिए जीवन दर्शन प्रस्तुत करते रहे हैं। जन्माष्टमी को भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में बसे भारतीय भी इसे पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं। श्रीकृष्ण ने अपना अवतार भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में लिया। चूंकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अत: इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मथुरा नगरी भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठती है। पर पूज्य साहिल मुनि महाराज के लिए कहा वो उपर से कठोर है पर दिल मे करुणा वात्सल्य भरा पड़ा हुआ है आप जीवन मे खुद अनुशासन रखते हैं और दूसरों को भी प्रेरणा देते हैं कि अपने जीवन में अनुशासित बने हम उनके 52 वे जन्म दिवस पर ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं ।

साध्वी आनन्द प्रभा, साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा कि श्रीकृष्ण युगों-युगों से हमारी आस्था के केंद्र रहे हैं। वे कभी यशोदा मैया के लाल होते हैं तो कभी ब्रज के नटखट कान्हा और कभी गोपियों का चैन चुराते छलिया तो कभी अर्जुन को गीता का ज्ञान देते हुए। कृष्ण के रूप अनेक हैं और वह हर रूप में संपूर्ण हैं। अपने भक्त के लिए हँसते-हँसते गांधारी के शाप को शिरोधार्य कर लेते हैं। साहिल मुनि महाराज के जन्मदिन की बधाई दी ।

मिडिया प्रभारी प्रकाश चंद्र बड़ोला एवं मुकेश सिरोया ने बताया कि इस धर्म सभा में छोटे-छोटे बच्चे श्री कृष्ण राधा बनकर आए जिनको श्री संघ आमेट ने पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया और सभी को प्रभावना दी एवं परम पूज्य गुरुदेव विनय मुनि जी महाराज के शिष्य श्री साहिल मा. सा. को जन्मदिन की बधाई श्री संघ ने दी। इस धर्म सभा मे श्रावक-श्राविकाओं की अच्छी उपस्थिति रही। इस धर्म सभा का संचालन पारसमल बाबेल ने किया ।

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