वेलूर. यहां शहर के बाइपास मार्ग स्थित जैन गौशाला में शनिवार को भगवान महावीर जन सेवा संगठन व जैन समाज की ओर से पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन क्षमावाणी धर्मसभा व गायों को चारा खिलाने का कार्यक्रम आयोजित की गई। इस अवसर पर जैन गोशाला के ट्रस्टी धर्मीचंद तालेडा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताए कि आत्म शुद्धि का है पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व जिसमें तप कर कर्मो की निर्जरा कर अपनी काया को निर्मल बनाया जाता है।
पर्युषण पर्व में धर्रमों को नौ दिनों तक अलग अलग रूपों में बांटा गया है। पर्रयुषण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा आता है। भगवान महावीर ने क्षमा धर्म को सर्वप्रथम रखें हैं। जब तक व्यक्ति के मन में क्षमा का आगमन नहीं होगा तब तक उसके बाहर का धर्म स्वंय से व परमात्मा से दूरी बनी रहेगी। इसी लिए भगवान की पूजा करें, उपवास करो, साथ ही क्रोध व कषाय को बाहर निकालो। अगर क्रोध की ज्वाला को शांत नहीं किया तो जिंदगी अशांति मय हो जाएगा। अतः आत्मा से क्रोध भगाएं,बोध जगाएं,मुक्ति पाए।
यही उत्तम क्षमा धर्म का सार है, इसी में आत्मा का उद्धार है। इस संसार में शायद ही ऐसा कोई इंसान होगा,जिससे कभी कोई गलती न हुई हो,गलती होना दुर्भाग्य नहीं है, लेकिन गलती करने के बाद छुपाना गलत है। गलती को गलती मान कर उसे सुधारना व भविष्य में नहीं दोहराना ही महानता है। क्षमावाणी कार्यक्रम में जैन समाज के लोगों ने आपस में जाने अनजाने में हुए भूलों के लिए क्षमा मांगे। और सभी लोगों मिलकर गायों को हरी घास व तवड़ खिलाए। कार्यक्रम में आनंद बाफना,संजय भंडारी, आनंद निमानी,कमल चोरलिया सहित काफी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित थे।
चित्र, वेलूर के जैन गौशाला में शनिवार को संत्सवरी पर्व के अवसर पर आयोजित क्षमावाणी धर्म सभा के बाद गायों को चारा खिलाते हुए जैन समाज के लोग