बंगलूरू 04.09.2022 ; मुनि श्री अर्हतकुमारजी ने अणुव्रत को जनोपयोगी बनाने के लिए सात सूत्रीय बिन्दू प्रस्तुत किये। मुनि श्री ने कहा अणुव्रत अपने आप को निहारने का दर्पण है, जीवन उत्थान का मार्ग है। हम एक दूसरों के पूरक बने, युवा कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाते हुए, प्रोत्साहित करें।
अणुविभा के अध्यक्ष संचयजी जैन, उपाध्यक्ष अविनाश जी नाहर, महामंत्री भीखमजी सुराणा, सहमंत्री विमलजी वैद, संगठन मंत्री कन्हैयालाल चिप्पड़, अणुव्रत समिति बंगलुरू के अध्यक्ष शांतिलालजी पोरवाल इत्यादि ने भी सारगर्भित विचार व्यक्त किये। स्वागत स्वर मंत्री माणकचन्द संचेती और संचालन कार्यशाला के संयोजक हरकचंद ओस्तवाल ने किया। इस कार्यशाला में बंगलुरू के साथ चेन्नई, हैदराबाद, विजयवाड़ा, मैसूर, मण्डया, हुब्बल्ली इत्यादि कई अणुव्रत समितियों के सदस्यों ने सहभागिता दर्ज करवाई।
समाचार सम्प्रेषक : स्वरूप चन्द दाँती
सहमंत्री, अणुव्रत समिति – चेन्नई





