दिवाकर भवन पर चल रहे पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के तीसरे दिवस पर अतंगड सूत्र का वाचन हुआ, धर्मसभा को संबोधित करते हुए मेवाड गौरव प्रखर वक्ता रविन्द्र मुनि जी म.सा.ने कहा की अच्छे काम करने के लिए कोई मुहूर्त नहीं होता बात जब जगने की आती है तो पहले हम जिए फिर दुसरो को जगाये यदि आपका व्यक्तित्व विराट हो तो छोटा काम भी आपकों छोटा नहीं बना सकता शुरूवात घर से करें।एक माँ एक ऐसे व्यक्ति को दिया गया शब्द है जो जीवन भर अपने परिवार और बच्चों की भलाई, विकास और कल्याण के लिए बलिदान को पहली प्राथमिकता देती है। एक माँ न केवल एक बच्चे को जन्म देती है बल्कि उससे प्यार करने, उसकी देखभाल करने और बिना किसी पूर्वापेक्षा या शर्तों के समर्पण और प्यार दिखाने के लिए आजीवन प्रतिबद्धता रखती है।
एक माँ प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं क्योंकि वह एक रक्षक, एक मित्र और साथ ही एक अनुशासक की भूमिका निभाती है। वह एक निस्वार्थ प्यार करने वाली इंसान होती है। हम चाहे कितने भी बड़े हो जाए लेकिन मां के लिए हमेशा बच्चे ही रहते है वह हर समय हमारी चिंता करती है और हमे सही राह दिखाती है। मां हमारा हर सुख-दु:ख में साथ देती है जब हम बीमार होते हैं तो वही हमारे लिए रात भर जागती है भगवान से हमारे ठीक होने की प्रार्थना करती है।
वह हमारे लिए सब कुछ त्याग कर देती है, मां भूखी रहकर भी हमें भरपेट भोजन खिलाती है मां के जैसा त्याग और प्यार कोई नहीं कर सकता है.मां हमारी हर बात को समझती है चाहे हम उसे बताएं या नहीं वह हमारे हर आंसू की वजह पूछती हैl अगर हम किसी कार्य को नहीं कर पाते है तो वह हमारा मार्गदर्शन करती है वह जीवन के हर एक मोड़ पर हमारे साथ खड़ी होती हैl मां अपने बच्चे से कभी रूठती नहीं है अगर वो रूठ भी जाती है तो ज्यादा देर तक रूठी हुई नहीं रह सकती है प्रेम और स्नेह का दूसरा नाम ही मां है। किसी भी व्यक्ति के अच्छे भविष्य के लिए मां का बहुत अधिक महत्व होता है।
मां हमारे जन्म से पहले से ही हमारा ख्याल रखना शुरू कर देती है हमारे जन्म के समय उसे असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ता है फिर भी वह हमारी एक मुस्कान देखने के लिए सारी पीड़ा को खुशी खुशी सह जाती है। मां की व्याख्या करने की ताकत किसी भी कलम में नहीं है क्योंकि मां को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है अब हमारे बड़े होने पर मां के प्रति हमारे भी कुछ कर्तव्य बनते है।
हमें मां की हर जरूरत को पूरा करना चाहिएl उनकी हर एक खुशी देनी चाहिए वृद्धावस्था में उनकी सेवा करनी चाहिए उनके पास बैठकर कुछ समय बिताना चाहिए सुबह शाम उनसे मिलकर उनका हाल-चाल पूछना चाहिए प्रतिदिन उनका आशीर्वाद लेना चाहिए क्योंकि मां की आशीर्वाद से बड़ा कोई धन नहीं होता है। उन्हें भी उतना ही प्यार करना चाहिए जितना उन्होंने हमें किया था।मां को हमारे से कुछ नहीं चाहिए ना उसे धन चाहिए ना उसे बड़ा मकान चाहिए उसे तो सिर्फ अपने बच्चों का प्यार चाहिए और खुशियां चाहिए।
उपरोक्त जानकारी देते हुए श्रीसंघ अध्यक्ष इंदरमल टुकड़िया कार्यवाहक अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि जैन दिवाकर बालिका मंडल द्वारा नुक्कड नाटिका का सुंदर मंचन दिवाकर भवन पर किया ।111 तेले की तपस्या के साथ ही ताल निवासी जिनशासनरत्न श्रीमान प्रकाश जी पिपलिया ने 75 उपवास की प्रत्याख्यान गुरुदेव से लिए। प्रभावना का लाभ विनोद कुमार रविकुमार लुनिया परिवार ने लिया।धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया आभार श्रीसंघ उपाध्यक्ष विनोद ओस्तवाल ने माना।