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जीवन का सदुपयोग’ पर स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा

जीवन का सदुपयोग’ पर स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा

स्वाध्याय भवन में वरिष्ठ स्वाध्यायी वीरेन्द्रजी कांकरिया द्वारा ‘श्रुत सामायिक से होता हैं जीवन का सदुपयोग’ पर स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा

साहूकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन चेन्नई में रविवार 8 फरवरी 2026 को स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ |

संघ की मुख्य पत्रिका जिनवाणी में प्रकाशित तत्व चिन्तक श्रदेय श्री प्रमोदमुनिजी म.सा के प्रवचन ‘श्रुत सामायिक से होता हैं जीवन का सदुपयोग’ पर स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा वरिष्ठ स्वाध्यायी वीरेन्द्रजी कांकरिया द्वारा की गयी | स्वाध्यायी बन्धुवर ने अनेक आगमों में वर्णित सूत्रों,गाथाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु भगवन्त फरमाते हैं कि कर्मों के उदय में सहज रहना ही निश्चय धर्म हैं | हमारा चिन्तन ऐसा होना चाहिए कि हमारा भला करने वाला उपकारी हैं तो हमारा बुरा करने वाला महा उपकारी हैं,क्योकि वो हमारी परीक्षा लेता हैं और हमें विपरीत परिस्थितियों में समभाव रखने का अवसर देता हैं,और हमारे कर्मों की निर्जरा करने में सहायक हैं |

स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में स्वाध्यायी श्री इंदरचंदजी कर्णावट कमलजी चोरडिया, प्रेमजी बागमार,उच्छबराजजी गांग,बाबू धनपतराजजी सुराणा,साहित्यिक दिलीपजी धींग,अम्बालालजी कर्णावट, दीपकजी श्रीश्रीमाल,आर नरेन्द्रजी कांकरिया, महावीरचन्दजी बागमार गौतमचन्दजी मुणोत की सामायिक परिवेश में उपस्थिति रही | उपस्थित श्रदालुओं के सामूहिक नियम,व्रत प्रत्याख्यान,संकल्प के पश्चात प्रेमजी बागमार ने मांगलिक सुनाई |

धर्म सभा में उपस्थित साहित्यकार डॉ. दिलीपजी धींग ने श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के पूर्व कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया को समाजसेवी श्री अभयजी श्रीश्रीमाल के सफलता की कहानी ‘संघर्ष से उत्कर्ष’ तथा ‘नानेश-नेमी निर्झर’ पुस्तकें भेंट की | आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने साहित्यिक डॉ. दिलीपजी धींग की बहुआयामी श्रुतसेवा की सराहना की |

प्रेषक : स्वाध्याय भवन 24/25 – बेसिन वाटर स्ट्रीट साहूकारपेट चेन्नई तमिलनाडु

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