ललितप्रभ महाराज

वैभव से हजार गुना महान होता है तप और त्याग – श्री ललितप्रभ

महोपाध्याय श्री ललितप्रभ महाराज ने कहा कि वैभव कितना ही महान क्यों न हो, पर वह तप और त्याग से ज्यादा कभी भी महान नहीं हो सकता। भले ही सिकन्दर के पास महावीर से हजार गुना ज्यादा वैभव था, पर वह महावीर के त्याग से कभी महान नहीं कहलाएगा। जिसने वैभव को केवल इकठ्ठा किया वह सिकन्दर बना, पर जिसने वैभव को भी हँसते-हँसते त्याग कर दिया वह महावीर बन गया। एक तरफ सिकन्दर की मूर्ति हो और दूसरी तरफ महावीर की मूर्ति, यह सिर श्रद्धा से तो महावीर के चरणों में ही झुकेगा। उन्होंने कहा कि भारत तप और त्याग की भूमि है। यहाँ समृद्धि का सम्मान होता है, पर पूजा हमेशा त्याग की होती है। यह सत्य है कि दुनिया सम्पन्नता से प्रभावित होती है और सम्पन्न व्यक्ति ही सब जगह मुख्य अतिथि बनता है, पर वह भी जब किसी त्यागी-तपस्वी को देखेगा तो उसका सिर अपने आप तपस्वी के आगे झुक जाएगा। श्री ललितप्रभ कोरा केन्द्र मैदान में आयोजित सत्सं...

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