राष्ट्रसंत महोपाध्याय श्री ललितप्रभ सागर महाराज ने कहा कि शांति, सिद्धि और प्रगति के द्वारों को खोलने का दुनिया में सबसे महत्त्वपूर्ण मार्ग ध्यान है। इंसान जब-जब दुखी, चिंतित अथवा तनावग्रस्त हुआ तब-तब ध्यान ने उसे समाधान का मार्ग दिया है। ध्यान ने अतीत को संवारा है और इसी से वर्तमान और भविष्य को संवारा जा सकता है। ध्यान तो जिंदगी की घड़ी में भरी जाने वाली चाबी है, जिसके द्वारा व्यक्ति अपने चैबीस घंटों को चार्ज कर सकता है। अध्यात्म का सार है ध्यान। जिस ईश्वरीय तत्त्व की तलाश व्यक्ति जीवनभर बाहर करता है, वह तो उसके भीतर है जिसका साक्षात्कार ध्यान से संभव है। महावीर और बुद्ध जैसे महापुरुषों ने ध्यान के माध्यम से ही परम सत्य को उपलब्ध किया था। उन्होंने कहा कि शरीर के रोगों को मिटाने के लिए मेडीसिन है और मन के रोगों को मिटाने के लिए मेडीटेशन है। अगर प्रतिदिन केवल बीस मिनिट का ध्यान किया जाए तो द...