साहुकार पेठ स्थित श्री राजेन्द्र भवन में विराजित मुनि संयमरत्न विजय ने बारसासूत्र का सार बताते हुए कहा कि वैर से वैर कभी शांत नहीं होता, सिर्फ प्रेम से ही वैर शांत होता है। उन्होंने स्वरचित ‘देर क्यूं करता है अभी, आज कह दे प्रभु को सभी’ क्षमा का गीत गाते हुए कहा कि पापों से भरी हुई पोटली को प्रभु व गुरु चरणों में सौंपकर अपनी आत्मा को हल्की बना देना चाहिए। क्षमा मांगनी चाहिए, क्षमा देनी चाहिए, शांत रहना चाहिए। जो व्यक्ति क्रोध, मान, माया, लोभ व राग-द्वेष को शांत कर क्षमा-याचना करता है,उ सी की आराधना सार्थक होती है। अभिमान के कारण हम अपना अपराध स्वीकार नहीं कर पाते। हमारी आत्मा सब कुछ जानते हुए भी सत्य बोलने से कतराती है और भ्रम का भूत हटाने से घबराती है। प्रभु के पास प्रायश्चित करने से सब पाप मिट जाते हैं और भजन से सारे वजन सिर से हट जाते हैं। क्षमा रूपी जल से हमारा जीवन निर्मल हो जाता है। ...