पर्वाधिराज

पर्यूषण आत्मा का पर्व: ज्ञानमुनि

यहां शांति भवन में गुरुवार को ज्ञानमुनि के सान्निध्य में पर्वाधिराज पर्यूषण महापर्व का अंतिम दिन सांवत्सरिक दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर ज्ञानमुनि ने कहा कि पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन सांवत्सरिक पर्व है। यह पर्व आत्मा का पर्व है, परमात्मा का पर्व है। शरीर का ममत्व छोडऩे एवं लालसा छोडऩे का दिन है। दूसरा और कोई पर्व आने पर लोग धन सहित अन्य विलासी चीजें मांगते हैं लेकिन संवत्सरी पर्व में भगवान से आत्म कल्याण मांगा जाता है। संसार में दो तरह के प्राणी हैं, मुमुक्षु एवं बुबूक्षू। बुबूक्षु वाले सिर्फ खाऊ-खाऊ करते हैं, भोग में विश्वास रखते हैं लेकिन मुमुक्षु छोडऩे में विश्वास करते हैं। त्याग करते हैं। परमात्मा के नजदीक जाने का दिन है संवत्सरिक पर्व। जैन धर्म में क्षमा को मित्रता का आधार माना गया है, इस लिए पर्यूषण पर्व को क्षमा या मैत्री के पर्व के रूप में भी मनाया जात...

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