चातुर्मासिक

चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि ने जैन दिवाकर दरबार में धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि अंतगढ़ सूत्र में उन महान पुण्यशाली आत्माओं का वर्णन किया है जिन्होंने भगवान की अमृतमयी वाणी सुनकर संसार को त्याग दिया और आत्म साधना के पथ पर अग्रसर हो गये संसार त्याग कर मुनिधर्म अंगीकार किया। फिर पीछे मुड़कर भी नहीं देखा कि परिवार क्या कर रहा है उनका संसार कैसा चल रहा है मोह माया राग द्वेष छोड़े तभी सही रूप में मुनि बन सकते जहाँ मेरा तेरा है। एक परिवार छोड़ा पर गांव-गांव में परिवार बढ़ा लिया ये मेरे श्रावक है मेरे संप्रदाय के हैं। ऐसे भाव जहां होते हैं वहाँ आत्मा का कल्याण नहीं राग द्वेष संसार में परिभ्रमण कराते हैं। भगवान महावीर स्वामी से गौतम स्वामी ने पूछा प्रभु मेरे बाद दीक्षा लेने वाले किसान नौकर चपरासी थे। वो भी केवली हो गये ...

सामयिक के बिना मुक्ति नहीं: वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की कड़ी में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि ने जैन दिवाकर दरबार में धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने 9 वें सामायिक व्रत के विषय में फरमाया है। सामयिक के बिना मुक्ति नहीं, सामयिक में तो आना ही पड़ता है। सामायिक का यह मतलब नहीं कि सिर्फ मुंहपति बांधकर बैठना – मन वचन काया की शुद्धि होना आवश्यक है. सामायिक में मन से बुरे विचार नहीं करना और कठोर या पापों की प्रवृत्ति हो ऐसे शब्द (वचन) नहीं बोलना। बिना विचारे सोचे समझे बिना वचन बोलने से महाभारत हो गया महासती द्रोपदी ने जो शब्द उच्चारित किया कि ” अंधे का जाया अंधा ” जिसके कारण कैसे कष्ट झेलने पड़े। इसलिये सामायिक में सावद्य भाषा का प्रयोग न करें। हिंसा कारी पापकारी कठोर वचन नहीं बोले सामायिक समता भाव में रहना सिखाती है। सामायिक आप कहीं पर भी किसी स...

ज्ञानमुनि और लोकेश मुनि ने किया चातुर्मासिक प्रवेश

वेलूर. यहां सतुआचारी से विहार कर सोमवार को श्री श्वेताम्बर स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में ज्ञान मुनि एवं लोकेश मुनि का भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर सीएमसी रोड में संतों के पहुंचने के बाद सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने उनका भव्य स्वागत किया। यहां से जुलूस के रूप में संत आरकाट रोड, पुराने बस अड्डा, लांग बाजार, मेन बाजार, गांधी रोड होते हुए जैन भवन में पहुंचे जहां शोभायात्रा धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। धर्मसभा का संबोधित करते हुए ज्ञानमुनि ने कहा, जिनवाणी श्रवण से पुण्य-पाप और हित-अहित का ज्ञान होता है एवं सुनने से ही हित-अहित में भेद का बोध होता है अत: धर्म सुनकर हितकारी और श्रेयकारी आचरण करना चाहिए। जिनवाणी सदा कल्याणी व भ्रम तथा अज्ञान का निवारण करने वाली है। इस कल्याणी वाणी को जीवन में ढालें और प्रमाद में समय नही खोएं। आदमी की रातें नींद में चली जाती है और दिन का अधिका...

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