चातुर्मासार्थ

महापुरुष मां से बड़ा नहीं होता: साध्वी कुमुदलता

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने मां की ममता, मां का उपकार व वात्सल्य पर प्रेरक उद्बोदन देते हुए कहा कि  महापुरुष मां से बड़ा नहीं होता। मां की ममता, वात्सल्य, उपकार, त्याग आदि का शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता और भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने एक मार्मिक प्रसंग के माध्यम से मां के वात्सल्य का वर्णन करते हुए कहा कि बच्चे भले ही मां का तिरस्कार कर दें लेकिन मां हमेशा अपने बच्चों को प्यार ही बांटती है। मां बच्चों के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देती है। मां की ममता ऐसी होती है कि अगर बच्चा रोता है तो मां भी रो देती है और बच्चे के हंसने पर मुस्कुराती है। दुनिया के किसी भी शब्दकोश में मां से बड़ा शब्द नहीं है। सागर की गहराई, सूर्य की किरणें, चांद की चांदनी से भी अगर मां का उपमा दी जाए तो यह भी कम है। दुनिया में कई महान संत पुरुष हुए हैं लेकिन मां से ब...

जैसा पाप किया है वैसा प्रायश्चित करे: प्रवीणऋषि

शुक्रवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई मे  चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एव  तीर्थेशऋषि महाराज द्वारा पर्युषण पर्व के अवसर पर विशेष प्रवचन का कार्यक्रम आयोजित हुआ। उपाध्याय प्रवर ने उपस्थित जन मैदिनी को पर्युषण पर्व का सकल्प कराया। पर्युषण पर्व की महिमा बताते हुए कहा कि प्रतिक्रमण करने का महत्व बताते हुए कहा कि राजा स ́प्रति द्वारा अपने पूर्व जन्म मे बिना जाने-समझे मा ̃ा अपनी भू१ शा ́त करने के लिए एक दिन से भी कम समय का साधु जीवन और आधी-अधूरी धर्म क्रिया की थी जिसके बाद उसका आयुष्य पूर्ण हो गया, जिसके फलस्वरूप वह राजा बना। इसलिए जो बिना जाने-समझे भी धर्मक्रिया करता है, उसका फल बहुत मिलता है। हमे अपना इतिहास जानना चाहिए कि हमारे पूर्वज कैसे धर्म शि१र पर पह ́ुचे और उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। परमात्मा प्रभु कहते है कि जो सारे दु:१ो के मूल पापो को...

वाणी का उपयोग कैसे करना है इस पर चिंतन करना चाहिए: साध्वी कुमुदलता

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने हमें अपनी वाणी का उपयोग कैसे करना है इस पर चिंतन करना चाहिए। वाणी हमेशा मधुर होनी चाहिए। कोयल भले ही काली हो लेकिन उसे वाणी का सौंदर्य प्राप्त है इसीलिए वह सबको प्यारी लगती है। वाणी का सौंदर्य संसार का सबसे बड़ा सौंदर्य है। हमें बोलने पर संयम बरतना चाहिए। ऐसे शब्दों का उपयोग नहीं करना चाहिए जिसे सुनकर किसी को ठेस पहुंचे बल्कि ऐसी वाणी बोलनी चाहिए कि सुनने वाला प्रसन्न हो जाए। शिक्षक दिवस के अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा जीवन पथ पर आगे बढने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। शिक्षक ही हमारा मार्गदर्शन करते हैं। उन्होंने अतिथि संविभाग व्रत की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता का रूप माना जाता है। भगवान महावीर ने दान देने का सुंंदर वर्णन किया है कि दान हमेशा शुद्ध भाव से देना चाहिए। चंदनबाला का वर्णन...

अपनी गलतियों का पश्चाताप करने वाला सम्यक : उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

पर्युषण पर विशेष कार्यक्रम शुरू बुधवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एवं तीर्थेशऋषि महाराज के प्रवचन कार्यक्रम आयोजित हुआ। उपाध्याय प्रवर ने बताया कि श्रद्धा करने में बुद्धिमत्ता का प्रयोग करना चाहिए लेकिन श्रद्धा करते हुए बुद्धि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। परमात्मा की आज्ञा को बिना अपनी तुच्छ बुद्धि उपयोग किए श्रद्धा के साथ स्वीकार करें और उन्होंने जो सत्य मार्ग दिखाया है उसका अनुसरण करना चाहिए। आचार्य मानतुंग ने अपनी बेडिय़ां तोडऩे के लिए किसी अन्य का आह्वान न कर अपनी श्रद्धा और सामथ्र्य को जगाया। आचारांग सूत्र में बताया कि सुरक्षा की चाह रखने वाले को नियम और आज्ञा का पालन करना जरूरी है। जो स्वयं परमात्मा की आज्ञा में नहीं रहता वह स्वयं परेशान होता है और दूसरों को भी दु:खी और परेशान करता है। गोशालक, रावण और...

अहंकार छोड़ें, जिनशासन की आज्ञा पालन करें : उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

मंगलवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर, पुरुषावाक्कम, चेन्नई में चातुर्मासार्थ विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि महाराज एवं तीर्थेशऋषि महाराज के प्रवचन कार्यक्रम आयोजित हुआ। उपाध्याय प्रवर ने बताया कि सुरक्षा हर व्यक्ति चाहता है। परमात्मा कहते हैं कि जो स्वयं के जीवन को सुरक्षित करता है वही सुरक्षित है। परमात्मा की आज्ञा है- हृदय और विचारों से खुला होना चाहिए आचरण और चरित्र में नहीं। जिसका मन और काया, सुरक्षित है वही सुरक्षित है। आज्ञा के बाहर जाने वाले असुरक्षित हो जाते हैं और जो असुरक्षित है वही आज्ञा से बाहर है। आज्ञा देने वाला आज्ञा देने के बाद विश्राम नहीं करते वे स्वयं उसकी परख करते हैं। नेपोलियन का उदाहरण देकर इसे समझाया। गुरु कहते हैं कि यदि नेपोलियन की आज्ञा का उल्लंघन किया तो सैनिक ने अपना एक जीवन खो दिया, लेकिन परमात्मा की आज्ञा का उल्लंघन करने वाले तो कितने ही जन्म खो देते है...

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता व अन्य साध्वीवृन्द के सान्निध्य में सोमवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई गई। इस अवसर पर साध्वी कुमुदलता ने भगवान श्रीकृष्ण और महावीर स्वामी जीवन की समानताओं का विवेचन करते हुए कहा कि चंडकौशिक सांप ने महावीर स्वामी को डंक मारा तो महावीर ने अमृत धारा बरसाई, उसी प्रकार श्रीकृष्ण की भक्ति में मीरा ने विष का प्याला पिया तो वह अमृत बन गया। इस अवसर फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने राधा-कृष्ण की वेशभूषा में प्रस्तुति दी। च्चखाण हांडी के पच्चखाण लेकर गुरुभक्तों ने पर्युषण के पचाखाण लेकर धार्मिक जीवन जीने की शिक्षा ग्रहण की।

कर्मादान कांटों की चुभन की तरह: साध्वी कुमुदलता

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने प्रवचन में उपभोग-परिभोग परिमाण व्रत के तहत कर्मादान की चर्चा करते हुए कहा कि कर्मादान कांटों की चुभन की तरह है जो सिर्फ पीड़ा पहुंचाती है। ये कर्मादान हमें जीवन से पाप कर्मों से मुक्ति का संदेश देते हैं। पाप करने पर उनका भुगतान करना ही पड़ता है। भगवान महावीर ने 15 कर्मादान का सुन्दर विवेचन किया है। 15 कर्मादान कहते हैं कि पापों का खाता बंद कर देना चाहिए। कर्मादान के तहत कई प्रकार का व्यापार करना श्रावकों के लिए निषेध है। उन्होंने विभिन्न प्रकार के व्यापार का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें उस तरह का व्यापार नहीं करना चाहिए जिससे पाप कर्मों का बंधन होता है। साध्वी महाप्रज्ञा ने शाश्वत सत्य का अर्थ बताया। परमात्मा आदिनाथ का वर्णन करते हुए कहा कि वे पहले ऋषभ कुमार के नाम से जाने जाते थे। उनके राजदरबार में एक नृत्य कार्यक्रम ...

श्रावक को प्रतिक्रमण करना जरूरी: साध्वी कुमुदलता

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने कहा श्रावक को प्रतिक्रमण करना जरूरी है। यदि इन्सान शारीरिक रूप से थक जाने के स्नान कर जिस तरह तरोताजा महसूस करता है उसी तरह श्रावकों को प्रतिक्रमण के स्नान से आत्मा की थकान को दूर करना चाहिए। साध्वी महाप्रज्ञा ने कहा आज के इस कम्प्यूटर युग में हर काम बहुत तेज गति से होते हैं। मोबाइल व्यक्ति के जीवन का अहम हिस्सा बन गया है। लोगों को उसके उपयोग के बारे में जानकारी भी जल्द ही हासिल हो जाती है। घर-घर में मोबाइल छाया हुआ है। अगर आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो जीवन भी एक मोबाइल है। जिस प्रकार मोबाइल में आप अहम चीजों को सेव करते हैं, अनावश्यक फाइल को डिलिट कर देते हैं, उसी प्रकार जीवन रूपी मोबाइल में भी सदगुणों को सेव करें, दुर्गुणों को डिलिट करेंऔर निंदा रूपी वाइरस को खत्म करें। अगर निंदा का दुर्गुण व्यक्ति में होता है तो...

युगों को जीने का तरीका सिखाने वाले कहलाते हैं युग पुरुष

गुरु दिवाकर कमला वर्षावास समिति, चेन्नई के तत्वावधान में अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि, उपप्रवर्तक विनयमुनि ‘वागीश’ और यहां चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता व अन्य साध्वीवृन्द के सान्निध्य में सैकड़ों गुरुभक्तों की उपस्थिति में मरुधर केसरी मिश्रीमल एवं राष्ट्र संत रूपमुनि की जन्म जयंती मनाई गई। दोनों महापुरुषों को साधुवृन्द व साध्वीवृन्द के अलावा कई गुरु भक्तों ने अपनी भावांजलि अर्पित की। उपाध्याय प्रवीणऋषि ने दोनों संतों का जीवन परिचय देते हुए कहा कि जो युगों को जीने का तरीका सिखाते हैं वे युग पुरुष कहलाते हैं और मरुधर केसरी मिश्रीमल व शेरे राजस्थान रूपमुनि भी युग पुरुष थे। उन्होंने कहा जिस प्रकार सूर्य खुद को तपकर संसार को रोशनी देकर प्रकाशित करता है उसी प्रकार मरुधर केसरी ने भी अपने तप और साधना के बल पर मानव कल्याण का प्रकाश फैलाया। इसीलिए वे श्रमणसूर्य क...

जीव दया के संदेश के साथ मनाया रक्षाबंधन: साध्वी कुमुदलता

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता व अन्य साध्वीवृन्द के सान्निध्य में शनिवार को रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया गया। ‘भाई बहन का प्यार, रक्षा बंधन का त्यौहर’ विषय पर मनाए गए इस पर्व में बहनों ने साध्वीवृन्द के समक्ष भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। इस दौरान लकी ड्रा के स्वर्ण राखी के विजेता व 10 रजत राखियों के विजेताओं को राखी प्रदान की गई। सबसे बड़ी राखी निर्माता का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के सहयोगी परिवार का अभिनंदन व सम्मान किया गया। साध्वी कुमुदलता ने रक्षा बंधन पर विशेष प्रवचन में कहा हमारी भारतीय संस्कृति पर्व और त्यौहारों की संस्कृति है। यहां विभिन्न प्रकार पर्व-त्यौहार मनाए जाते हैं और हर त्यौहार के साथ परंपराएं व इतिहास जुड़ा हुआ है। सावन महीने में मनाए जाने वाले रक्षाबंधन पर्व की व्याख्या करते हुए...

सत्य की राह परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग: साध्वी कुमुदलता

चेन्नई. अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने भगवान महावीर के सत्याणुव्रत का उल्लेख करते हुए कहा कि इंन्सान को सत्य की राह पर चलते रहना चाहिए। किसी भी स्थिति में झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। सत्य बोलने वाले की हमेशा जीत होती है। सत्य की राह पर चलकर ही व्यक्ति अपने आप को परमात्मा से जोड़ सकता है। सत्य ही इन्सान को विश्वास दिलाता है कि धर्म सत्य पर टिका है। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा अनुराग, स्नेह आदि संबंधों के अधीन नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को स्नेह, अनुराग और प्रेम भाव रखना चाहिए लेकिन उसके मोह जाल में नहीं फंसना चाहिए। यदि व्यक्ति इस मोह जाल में फंस जाता है तो उसे पूरी दुनिया छोटी लगने लगती है जिससे उसे जन्म-जन्मांतर तक दुखों का ही सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कुछ परम्पराएं ऐसी हैं जो अतीत से चलती आ रही हैं, वर्...

सत्य का साथ नहीं छोडऩा चाहिए: साध्वी कुमुदलता

हर परिस्थिति में सत्य की राह पर चलें चेन्नई. अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने शनिवार को प्रवचन में अणुव्रतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्सान को किसी भी परिस्थिति में सत्य का साथ नहीं छोडऩा चाहिए। सत्य की राह पर चलकर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने भगवान श्री रामचंद्र का जीवन प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रीराम ने सत्य और मर्यादा का दामन नहीं छोड़ा इसलिए वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए और पूजनीय बन गए। हमें भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सत्य की राह चुननी चाहिए और असत्य को जीवन से बाहर कर देना चाहिए। उन्होंने कहा रविवार को उपाध्याय केवल मुनि की जयंती मनाई जाएगी। इसलिए सभी भक्तगण अपने बच्चों को लेकर अवश्य आएं ताकि उनको भी उपाध्याय केवल मुनि के व्यक्तित्व के बारे में जानकारी हासिल हो सके। साध्वीवृन्द की निश्रा में गुणानुवाद सभा ...

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