एकादशम अधिशास्ता

पर्युषण महापर्व के अंतर्गत आज जप दिवस के रूप में तेरापंथ सभा भवन में मनाया गया

तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी की अनुज्ञा से पर्युषण महापर्व की आराधना कराने के लिए पधारे उपासक श्री पदमचन्द आंचलिया (चेन्नई) ने कहा कि किसी एक शब्द पर बार-बार अनुचिंतन करना ही जप कहलाता हैं| यह मनुष्य जीवन हमारा घर अस्थाई निवास है! हमें हमारा स्थाई निवास मोक्ष को बनाना चाहिए!खाने से हम पुष्ट नहीं होते, जबकि उसे पचाने से| जो बहुत पढ़ता हैं, वह ज्ञानी नहीं होता, याद रखने वाला ज्ञानी बनता है! धन कमाने वाला धनी नहीं होता, जो धन के अपव्यय से बचने वाला धनी कहलाता है| हमारी आत्मा आठ कर्मों से बंधी हुई है! एक कथानक के माध्यम से हमें समझाया कि हमें उन कर्मों को कैसे काटना है| धर्म रूपी फावड़ा लेकर हमें खुद को अपने भीतर से आत्मा पर बंधे इन 8 कर्मों को काटने की प्रेरणा दी! हमारे भीतर अनंत शक्ति, चेतना का सागर लहरा रहा है! उन शक्तियों को जागृत करने के लिए! मंत्र जप अवश्य क...

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