उपप्रवर्तक विनयमुनि

युगों को जीने का तरीका सिखाने वाले कहलाते हैं युग पुरुष

गुरु दिवाकर कमला वर्षावास समिति, चेन्नई के तत्वावधान में अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि, उपप्रवर्तक विनयमुनि ‘वागीश’ और यहां चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता व अन्य साध्वीवृन्द के सान्निध्य में सैकड़ों गुरुभक्तों की उपस्थिति में मरुधर केसरी मिश्रीमल एवं राष्ट्र संत रूपमुनि की जन्म जयंती मनाई गई। दोनों महापुरुषों को साधुवृन्द व साध्वीवृन्द के अलावा कई गुरु भक्तों ने अपनी भावांजलि अर्पित की। उपाध्याय प्रवीणऋषि ने दोनों संतों का जीवन परिचय देते हुए कहा कि जो युगों को जीने का तरीका सिखाते हैं वे युग पुरुष कहलाते हैं और मरुधर केसरी मिश्रीमल व शेरे राजस्थान रूपमुनि भी युग पुरुष थे। उन्होंने कहा जिस प्रकार सूर्य खुद को तपकर संसार को रोशनी देकर प्रकाशित करता है उसी प्रकार मरुधर केसरी ने भी अपने तप और साधना के बल पर मानव कल्याण का प्रकाश फैलाया। इसीलिए वे श्रमणसूर्य क...

रक्षाबंधन प्रेम का प्रतीक : विनयमुनि

साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक विनयमुनि ने रक्षाबंधन के अवसर पर कहा रक्षाबंधन प्रेम का प्रतीक है, जिसका अपना अलग ही महत्व है। इस पर्व से भाई बहनों में एक उत्साह सी होती है। इस दिन खुद में बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। ऐसा करने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाएगा। छगनलाल की 130वीं जन्म जयंती पर मुनि ने कहा सदगुरुओं ने अपने ज्ञान से ही लोगों की अज्ञानता को दूर किया है। इस प्रकार से हम पर उन महापुरुषों का बहुत ही बड़ा उपकार है और उनके इस उपकार को कभी नहीं भूलना चाहिए। उनके द्वारा बताए गए मार्ग का अनुसरण कर ज्ञान के महत्व को समझ कर अज्ञानता से दूर होना चाहिए। सागरमुनि ने कहा जगत के सभी जीवों की रक्षा के लिए रक्षाबंधन को बहन अपनी रक्षा के लिए भाई के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है। इस सूत्र को हाथों तक नहीं बल्कि आत्मा में लाकर चारित्र करना चाहिए। मनुष्य के जीवन में पर्व उन्हें ऊचा ...

Skip to toolbar