अयनावरम

श्रावक को प्रतिक्रमण करना जरूरी: साध्वी कुमुदलता

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने कहा श्रावक को प्रतिक्रमण करना जरूरी है। यदि इन्सान शारीरिक रूप से थक जाने के स्नान कर जिस तरह तरोताजा महसूस करता है उसी तरह श्रावकों को प्रतिक्रमण के स्नान से आत्मा की थकान को दूर करना चाहिए। साध्वी महाप्रज्ञा ने कहा आज के इस कम्प्यूटर युग में हर काम बहुत तेज गति से होते हैं। मोबाइल व्यक्ति के जीवन का अहम हिस्सा बन गया है। लोगों को उसके उपयोग के बारे में जानकारी भी जल्द ही हासिल हो जाती है। घर-घर में मोबाइल छाया हुआ है। अगर आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो जीवन भी एक मोबाइल है। जिस प्रकार मोबाइल में आप अहम चीजों को सेव करते हैं, अनावश्यक फाइल को डिलिट कर देते हैं, उसी प्रकार जीवन रूपी मोबाइल में भी सदगुणों को सेव करें, दुर्गुणों को डिलिट करेंऔर निंदा रूपी वाइरस को खत्म करें। अगर निंदा का दुर्गुण व्यक्ति में होता है तो...

युगों को जीने का तरीका सिखाने वाले कहलाते हैं युग पुरुष

गुरु दिवाकर कमला वर्षावास समिति, चेन्नई के तत्वावधान में अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि, उपप्रवर्तक विनयमुनि ‘वागीश’ और यहां चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता व अन्य साध्वीवृन्द के सान्निध्य में सैकड़ों गुरुभक्तों की उपस्थिति में मरुधर केसरी मिश्रीमल एवं राष्ट्र संत रूपमुनि की जन्म जयंती मनाई गई। दोनों महापुरुषों को साधुवृन्द व साध्वीवृन्द के अलावा कई गुरु भक्तों ने अपनी भावांजलि अर्पित की। उपाध्याय प्रवीणऋषि ने दोनों संतों का जीवन परिचय देते हुए कहा कि जो युगों को जीने का तरीका सिखाते हैं वे युग पुरुष कहलाते हैं और मरुधर केसरी मिश्रीमल व शेरे राजस्थान रूपमुनि भी युग पुरुष थे। उन्होंने कहा जिस प्रकार सूर्य खुद को तपकर संसार को रोशनी देकर प्रकाशित करता है उसी प्रकार मरुधर केसरी ने भी अपने तप और साधना के बल पर मानव कल्याण का प्रकाश फैलाया। इसीलिए वे श्रमणसूर्य क...

जीव दया के संदेश के साथ मनाया रक्षाबंधन: साध्वी कुमुदलता

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता व अन्य साध्वीवृन्द के सान्निध्य में शनिवार को रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया गया। ‘भाई बहन का प्यार, रक्षा बंधन का त्यौहर’ विषय पर मनाए गए इस पर्व में बहनों ने साध्वीवृन्द के समक्ष भाइयों की कलाई पर राखी बांधी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। इस दौरान लकी ड्रा के स्वर्ण राखी के विजेता व 10 रजत राखियों के विजेताओं को राखी प्रदान की गई। सबसे बड़ी राखी निर्माता का सम्मान किया गया। कार्यक्रम के सहयोगी परिवार का अभिनंदन व सम्मान किया गया। साध्वी कुमुदलता ने रक्षा बंधन पर विशेष प्रवचन में कहा हमारी भारतीय संस्कृति पर्व और त्यौहारों की संस्कृति है। यहां विभिन्न प्रकार पर्व-त्यौहार मनाए जाते हैं और हर त्यौहार के साथ परंपराएं व इतिहास जुड़ा हुआ है। सावन महीने में मनाए जाने वाले रक्षाबंधन पर्व की व्याख्या करते हुए...

जीवन जीना एक कला है और व्यक्ति को यह कला आनी चाहिए: साध्वी कुमुदलता

अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में साध्वी कुमुदलता ने शुक्रवार को दिशा परिमाण अणुव्रत पर चर्चा करते हुए कहा कि जीवन जीना भी एक कला है और व्यक्ति को यह कला आनी चाहिए। परमात्मा वीणा रूपी जीवन तो सभी को देता है लेकिन उसे बजाना हर किसी को नहीं आता। इसीलिए संसार में अनैतिकता, अत्याचार और अशांति फैलती है। दुनिया को समझने से पहले खुद का अवलोकन करना चाहिए और दूसरों कीे सीख देने से पहले खुद को समझ लेना चाहिए। इस भौतिकता की चकाचौंध में व्यक्ति कहीं खो न जाए इसलिए भगवान महावीर ने भक्तों को कई उपदेश दिए हैं। अपने आप को समझने का प्रयास करें। व्यक्ति अगर परभाव को छोडक़र स्वभाव में जीने का प्रयास करेगा तो जीवन आनंदमय बन जाएगा। साध्वी पदमकीर्ति ने मां पदमावती की स्तुति का संगान किया। दिशा हमारे जीवन की दशा बदल देती है। भगवान महावीर और ऋषभदेव से लेकर तीर्थंकरों ने भी दिशा परिमाण व्रत का वर्णन किया है। वास्तुशा...

सत्य की राह परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग: साध्वी कुमुदलता

चेन्नई. अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने भगवान महावीर के सत्याणुव्रत का उल्लेख करते हुए कहा कि इंन्सान को सत्य की राह पर चलते रहना चाहिए। किसी भी स्थिति में झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। सत्य बोलने वाले की हमेशा जीत होती है। सत्य की राह पर चलकर ही व्यक्ति अपने आप को परमात्मा से जोड़ सकता है। सत्य ही इन्सान को विश्वास दिलाता है कि धर्म सत्य पर टिका है। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा अनुराग, स्नेह आदि संबंधों के अधीन नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को स्नेह, अनुराग और प्रेम भाव रखना चाहिए लेकिन उसके मोह जाल में नहीं फंसना चाहिए। यदि व्यक्ति इस मोह जाल में फंस जाता है तो उसे पूरी दुनिया छोटी लगने लगती है जिससे उसे जन्म-जन्मांतर तक दुखों का ही सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कुछ परम्पराएं ऐसी हैं जो अतीत से चलती आ रही हैं, वर्...

सत्य की राह परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग: साध्वी कुमुदलता

चेन्नई. अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने भगवान महावीर के सत्याणुव्रत का उल्लेख करते हुए कहा कि इंन्सान को सत्य की राह पर चलते रहना चाहिए। किसी भी स्थिति में झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। सत्य बोलने वाले की हमेशा जीत होती है। सत्य की राह पर चलकर ही व्यक्ति अपने आप को परमात्मा से जोड़ सकता है। सत्य ही इन्सान को विश्वास दिलाता है कि धर्म सत्य पर टिका है। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा अनुराग, स्नेह आदि संबंधों के अधीन नहीं होना चाहिए।  व्यक्ति को स्नेह, अनुराग और प्रेम भाव रखना चाहिए लेकिन उसके मोह जाल में नहीं फंसना चाहिए। यदि व्यक्ति इस मोह जाल में फंस जाता है तो उसे पूरी दुनिया छोटी लगने लगती है जिससे उसे जन्म-जन्मांतर तक दुखों का ही सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कुछ परम्पराएं ऐसी हैं जो अतीत से चलती आ रही हैं, वर...

सत्य का साथ नहीं छोडऩा चाहिए: साध्वी कुमुदलता

हर परिस्थिति में सत्य की राह पर चलें चेन्नई. अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने शनिवार को प्रवचन में अणुव्रतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्सान को किसी भी परिस्थिति में सत्य का साथ नहीं छोडऩा चाहिए। सत्य की राह पर चलकर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने भगवान श्री रामचंद्र का जीवन प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रीराम ने सत्य और मर्यादा का दामन नहीं छोड़ा इसलिए वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए और पूजनीय बन गए। हमें भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सत्य की राह चुननी चाहिए और असत्य को जीवन से बाहर कर देना चाहिए। उन्होंने कहा रविवार को उपाध्याय केवल मुनि की जयंती मनाई जाएगी। इसलिए सभी भक्तगण अपने बच्चों को लेकर अवश्य आएं ताकि उनको भी उपाध्याय केवल मुनि के व्यक्तित्व के बारे में जानकारी हासिल हो सके। साध्वीवृन्द की निश्रा में गुणानुवाद सभा ...

जैन सबसे पहले भगवान महावीर का अनुयायी उसके बाद किसी संप्रदाय का

चेन्नई. अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी कुमुदलता ने  बुधवार को प्रवचन में जैन धर्म की शक्ति और इसकी विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सबसे पहले हम भगवान महावीर के अनुयायी हैं, उनके उपासक हैं उसके बाद विभिन्न संप्रदायों को मानने वाले। संप्रदाय तो व्यवस्था मात्र है। उन्होंने  दरकते रिश्तों पर एक प्रेरक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रावक-श्राविकाओं को धर्म और रिश्तों को निभाने के लिए भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और उर्मिला के त्याग से प्रेरणा लेेने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में रिश्तों में उतनी मधुरता नहीं दिखती जितनी अतीत में होती थी। आज का पुरुष पत्नी मोह में अपने मां-बाप, भाई-बहन और अन्य रिश्तों की उपेक्षा करने लगा है। आज का मानव अपनी मर्यादाएं भूलने लगा है,  जो समाज के लिए ठीक नहीं है। इससे पूर्व साध्वी महाप्रज्ञा ने कहा कि मानव जो मिला है आनन्द नही...

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