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पांडिचेरी में मुनि विनीतचंद्रविजय का चातुर्मास प्रवेश 4 जुलाई को

चेन्नई. मुनि विनीतचंद्र विजय, मुनि विजयचंद्र विजय, मुनि मनकचंद्र विजय एवं साध्वी मोक्षधर्माश्री, साध्वी समर्पणधर्माश्री और साध्वी ज्ञानधर्माश्री का चातुर्मास प्रवेश 4 जुलाई को श्री पाश्र्वनाथ श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ, पांडिचेरी के तत्वावधान में होगा। पांडिचेरी के अन्नासालै स्थित श्री जैन भवन में होने वाला आध्यात्मिक उत्कर्ष वैचारिक विकास को समर्पित यह चातुर्मास ऐतिहासिक होगा। श्री पाश्र्वनाथ श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ, पांडिचेरी के अध्यक्ष प्रवीण नागौत्रा सोलंकी, सचिव पूनमचंद पटवारी सहित संघ के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता चातुर्मास की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

जाप मिटा देता है ताप और संताप: जयपुरंदर मनी

जयधुरंधरमुनि, जयकलशमनी, जयपुरंदर मनी के सानिध्य में चिंतादरीपेट जैन स्थानक में सोलहवे तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान का जन्म एवं मोक्ष कल्याणक सामूहिक सामायिक की आराधना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जयधुरंधरमुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि महापुरुषों के गुणगान करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। जाप करने से ताप और संताप मिट जाते हैं। अरिहंत भगवंतो की स्तुति से अमिट शांति की प्राप्ति होती है। सुखपूर्वक मुक्ति प्राप्त करने का सरल एवं सहज उपाय गुणीजनों के गुणस्मरण है। शांतिनाथ भगवान के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए मुनि ने कहा जन्म के साथ ही नगर में फैला हुआ महामारी का रोग समाप्त हो गया। शांतिनाथ ने चक्रवर्ती, तीर्थंकर  सहित छः उत्तम पदवियों को प्राप्त किया था। उनका यथा नाम तथा गुण था। कार्यक्रम के प्रारंभ में आचार्य जयमल द्वारा रचित ‘शांति जाप’ के सामूहिक स्तुति जय कलशमुनि द्व...

संसार एक बंधन है: आचार्य तीर्थ भद्रसूरिश्वर

किलपाॅक में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्य तीर्थ भद्रसूरिश्वर ने कहा संसार एक बंधन है । आज बंधन किसी को भी नहीं चाहिए, सब स्वतंत्र रहना चाहते है । बंधन में रहने को कोई तैयार नहीं । आजकल तो बच्चे मां बाप के बंधन में रहने को तैयार नहीं । बंधन कितना भी अच्छा हो लेकिन किसी को यह अच्छा नहीं लगता । शिष्य को गुरु का बंधन भी अच्छा नहीं लगता । जन्म मरण भी उन्हें बंधन लगता है । लेकिन बंधन के बिना संसार से मुक्ति नहीं मिलने वाली । जब तक आप संसार में है आप बंधन में रहोगे, छुट्टी नहीं सकते । जिसको मुक्त होने की इच्छा है वह मुमुक्ष कहलाता है । यह शरीर भी बंधन है, क्योंकि आत्मा संसार में भटकने वाली है । आत्मा व चेतना जागृत होगी तब ही बंधन को तोड़ सकते हो । पत्नी, परिवार, परिग्रह भी बंधन है । लेकिन हम इसे मानने को तैयार नहीं हैं । बंधन से मुक्ति ही हमारा मूल विषय है । बंधन से  मुक्ति होने पर ही सम्यक ज्ञान क...

प्रज्ञापुरुष आचार्य महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी समारोह का अद्वितीय शुभारम्भ

रहुतनहल्ली, बेंगलुरु (कर्नाटक): ऐसे साधक, जिनकी साधना से कितने साधकों की राह प्रशस्त हुई, ऐसे दार्शनिक जिनके चिन्तन ने मानवता को इतने अवदान दिए, जिसके कारण वे संपूर्ण विश्व पटल पर स्थापित हो गए। वे धर्मातित हो गए और संपूर्ण मानव जाति के लिए सर्वमान्य हो गए। ऐसे महापुरुष, जिनकी प्रज्ञा इतनी जागृत हुई उन्हें सर्वमान्य रूप में ‘महाप्रज्ञ’ हो गए। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ऐसे युगप्रधान आचार्य महाप्रज्ञजी के जन्म शताब्दी समारोह का भव्य शुभारम्भ रविवार को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु महानगर के भिक्षुधाम परिसर में उनके परंपर पट्टधर अहिंसा यात्रा के प्रणेता, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भव्य रूप में समायोजित हुआ।  भिक्षु का धाम, शांतिदूत की प्रेरणा और युगप्रधान के जन्म शताब्दी का आध्यात्मिक शुभारम्भ  कर्नाटक राज्य की राजधानी और भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के अग्रणी के...

सिर्फ अच्छी संगत करने से ही कोई विद्वान अथवा साधु नहीं बनता

  अगर संगत से ही तमाम खूबियाँ आ जातीं तो गन्ने के साथ साथ उगने वाले पौधों में रस क्यों नहीं होता …. ?? सिर्फ अच्छी संगत करने से ही कोई विद्वान अथवा साधु नहीं बन जायेगा। संगत में सकारात्मक बातें सीखकर उन्हें अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से उतारने पर ही संगत की सार्थकता होगी अन्यथा सब वैराग्य ही साबित होगा। गन्ने ने खुद में धरती से रस खींचकर खुद को मीठा बना लेने की क्षमता विकसित कर ली हुई है इसलिए वह मीठा बन जाता है परन्तु उसके साथ ही उगनेवाली घास-फूस एवँ अन्य झाड़ियाँ रूखी ही रह जाती हैं। स्वर्ण संयम आराधक परम पूज्य गुरुदेव श्री वीरेंद्र मुनिजी महाराज का चार्तुमास मंगल प्रवेश तमिलनाडु के सेलम के शंकर नगर स्थित श्री वर्घमान स्थानकवासी जैन संघ में 4 जुलाई दोपहर 12.05 बजे होगा।

आध्यात्म जगत के महान साहित्यकार आचार्य श्री महाप्रज्ञ : मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमार

आचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्म शताब्दी पर आयोजित हुआ श्रद्धा समर्पण समारोह* जैन तेरापंथ धर्मसंघ के दशमाचार्य श्री महाप्रज्ञ जन्मशताब्दी वर्ष के शुभारम्भ पर श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, चेन्नई की आयोजना में आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमार एवं मुनि श्री रमेशकुमार, मूर्तिपूजक आचार्य भगवंत श्रीमद् तीर्थभद्रसूरि म.सा., और स्थानकवासी श्रमण संघ की साध्वीश्री डॉ हेमप्रभा ‘हिमांशु’ के मंगल सान्निध्य में लक्ष्मी महल में श्रद्धा समर्पण समारोह समायोजित हुआ! श्रद्धा समर्पण समारोह* में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए मुनि श्री ज्ञानेन्द्रकुमार ने कहा कि आज का आदमी कल को देख, *वर्तमान को खोने के कारण वह शारीरिक, मानसिक रुप से दु:खी रहता हैं,* इसलिए व्यक्ति को कल का नहीं, आज के दिन को देखना चाहिए|      मुनि श्री ने आगे कहा कि आचार्य श्री महाप्रज्ञजी की अहिंसा यात्रा के मू...

श्रावक के तीन मनोरथ एवं चौदह नियम: साध्वी जागृतीश्री

चेन्नई. एस.एस. जैन स्थानक, कोसापेट में साध्वी जागृतीश्री के सान्निध्य में धार्मिक शिविर के आयोजन का दूसरा एवं अंतिम दिन था। उन्होंने श्रावकों को तीन मनोरथ एवं चौदह नियम के बारे में समझाया। पहला मनोरथ आरम्भ, परिग्रह नहीं करना। आरम्भ का मतलब हिंसा नही करना एवं परिग्रह का मतलब जरूरत से ज्यादा संग्रह नहीं करना। दूसरा मनोरथ यह चिंतन करना कि वह दिन श्रावक की जिंदगी का धन्य होगा, जिस दिन वह पांच महाव्रत, पांच समिति, तीन गुप्ति से शुद्ध साधु जीवन की आराधना करेगा। तीसरा मनोरथ-जीवन के अंतिम क्षणों में सलेंखना संथारा से पंडित मरण का प्राप्त होना। श्रावक के चौदह नियम को भी बहुत ही सरल एवं सुक्ष्म तरीके से व्याख्या करके बताया कि कैसे श्रावक चौदह नियम को जीवन मे अंगीकार कर एक शुद्ध श्रावक बन सकता है। जैसे प्रतिदिन सचित का त्याग, खाने में द्रव्य की मर्यादा रखना, पांच विग्रह -घी, तेल, दूध, दही, मक्खन एवं ...

माइल्स ने जरूरतमंद बच्चों को दी फीस व पाठ्यसामग्री

चेन्नई. महावीर इंटरनेशनल लेडीज एमिनेंट सर्विस टू सोसायटी ने हाल ही जरूरतमंद 13 बच्चों को स्कूल का शुल्क प्रदान किया। इसके अलावा संस्था की पदाधिकारी हर बच्चे के घर जाकर पढ़ाई से सम्बंधित जरूरत की पाठ्यसामग्री एवं वस्तुएं भी प्रदान की। सलाहकार गोदावरीबाई जैन, अध्यक्ष सुनीता खारीवाल, उपाध्यक्ष सरिता बालेचा, सचिव योगिता जैन, कोषाध्यक्ष पूनम छाजेड़, शिल्पा बम्ब, चंद्रकला ललवानी, सपना बोहरा, उषा खींवसरा, ललिता गोलेछा, जयश्री श्रीश्रीमाल, मंजू कोठारी, कविता चुतर, इंदु बोथरा आदि का इस कार्य में सहयोग रहा। गौरतलब है कि माइल्स गत पांच साल से इसी लक्ष्य पर काम कर रही है और हर साल बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी भी करती है।

तन की अस्वस्थता ही मन की उपज है

चेन्नई. इच्छाओं का अपना एक संसार है। इच्छाएं भी तितली की तरह रंग-बिरंगी होती हैं। कुछ इच्छाएं स्वस्थ और साफ-सुथरी होती हैं तो कुछ काली-कलूटी। जिन इच्छाओं से स्वहित के साथ विश्वहित का भाव जुड़ा होता है वे इच्छाएं शुभ होती हैं और जिनमें स्वार्थ का मुखौटा बदल-बदलकर प्रकट होता है ऐसी बहुरूपिया इच्छाएं अशुभ होती हैं। जो अमंगल, अन्याय और अज्ञान की आधारभूमि पर खड़ी होती हैं। एक इच्छा खत्म होती ही नहीं है और दूसरी इच्छा उसका आसन ग्रहण कर लेती है। बचपन में खिलौने शुरू हुई हमारी जीवन यात्रा अर्थी तक पहुंचने को आ जाती है। चेहरे पर झुर्रियां पड़ गई और बाल सफेद हो गए और सारे अंग ढीले हो गए लेकिन केवल तृष्णा है जो तरुण होती ही जाती है। यह विषैली तृष्णा जिसे पकड़ लेती है उसके दुख जंगली घास की तरह बढ़ते ही जाते हैं। इच्छाओं की यह अमर बेल प्राणों रूपी वृक्ष पर ऐसे लिपट जाती है कि प्राण लेने के बाद भी यह जन...

भिक्षुधाम में भिक्षु के परम पट्टधर शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण का मंगल पदार्पण

रहुतनहल्ली, बेंगलुरु (कर्नाटक): बेंगलुरु की धरती को पावन बनाने वाले, जन-जन को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का पावन संदेश देने वाले जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी अहिंसा यात्रा के साथ शनिवार को पांच दिवसीय प्रवास हेतु रहुतनहल्ली स्थित भिक्षुधाम में पधारे। महातपस्वी के पावन चरणों का स्पर्श पाकर यह धाम भी मानों निहाल हो उठा। भिक्षुधाम मंे भिक्षु के परम पट्टधर का मंगल पदार्पण कई नए कीर्तिमानों की स्थापना करने वाला था। पांच दिनों के प्रवास के दौरान इसी धाम से तेरापंथ धर्मसंघ के दसमाधिशास्ता, युगप्रधान आचार्य महाप्रज्ञ के जन्म शताब्दी वर्ष के शुभारम्भ का ऐतिहासिक आयोजन होने वाला है तो वहीं बेंगलुरु की धरती पर आचार्यश्री द्वारा दीक्षा समारोह भी होना है। इस पुण्यस्थली से एकबार कीर्तिधर आचार्यश्री महाश्रमणजी द्वारा अनेक कीर्तिमानों की स्थापना...

सोचे बदले तो मनुष्य नामुमकिन को मुमकिन में कर सकता है: साध्वी जागृतीश्री

धार्मिक शिविर का आज अंतिम दिन   चेन्नई. एस.एस. जैन स्थानक, कोसापेट में साध्वी जागृतीश्री के सान्निध्य में धार्मिक शिविर का आयोजन किया गया। आगम अनुसार जिंदगी कैसे जिये बहुत ही सरल तरीके से समझाया। मुख्यत: तीन बिन्दुओ पर प्रकाश डाला गया। मैं जैसा चाहू वैसा बन सकता हूं, मैं जैसा चाहू वैसा कर सकता हूं। आज की इस आपाधापी एवं भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य बहुत ही जल्दी हार मान लेता है, लेकिन अगर सोचे तो वह नामुमकिन को मुमकिन में बदल सकता है, सिर्फ सोच को बदलना होगा। मैं अनन्त शक्ति सम्पन्न शुद्ध आत्मा हूं। मैं हर परिस्थिति में धैर्य रखता हूं, तथा हर व्यक्ति के साथ हर समय प्रसन्न रहता हूं। मनुष्य को प्रंशसा से सुखी और निन्दा से कभी दुखी नहीं होना चाहिए, इस बात को जीवन मे कभी इम्पोर्टेंस नहीं देनी चाहिए। दिमाग में अगर अच्छी एवं पॉजिटिव बाते डाले तो गलत एवं नेगेटिव कचरा अपने आप निकल जाएगा। इसके...

साध्वी इंदुबाला आज वडपलनी जैन स्थानक में

चेन्नई. साध्वी इंदुबाला, सुमतिप्रभा, मुदितप्रभा आदि साध्वीवृन्द रविवार को सुबह 6 बजे तेनाम्पेट के पोएस गार्डन स्ट्रीट स्थित कैलाशमल दुग्गड़ के निवास स्थान से विहार कर वडपलनी के पिल्लैयार कोइल स्ट्रिट स्थित जैन स्थानक पहुंचेंगी। यहां सुबह 7.45 से 8.45 तक साध्वी मुदितप्रभा द्वारा जिनशासन की पुकार धार्मिक कक्षा के अंतर्गत ‘आप बहुत अच्छे हो’ पर रोचक उद्बोधन दिया जाएगा। यह जानकारी किलपॉक संघ के अध्यक्ष सुगनचंद बोथरा ने दी।

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