अनुष्ठान आराधिका पु.डॉ. कुमुदलताजी के सानिध्य मे भिलवाडा( राजस्थान) में मनाया गया भामाशा, शिक्षा महर्षि CA रमेशजी फिरोदिया का जन्मदिवस! भिलवाडाः अनुष्ठान आराधिका पु. डॉ. कुमुदलताजी म.सा. मधुर गायिका तप आराधिका पु. महाप्रज्ञाजी, वास्तु विशारद वर्षितप आराधिका पु. डॉ. पद् मकिर्ती जी म.सा. वर्षितप आराधिका पु राजकुर्ती जी म.सा. आदि ठाणा 4 “ दिवाकर दरबार” सुभाष नगर भिलवाडा मे चातुर्मासार्थ विराजमान है ! प्रवेश से लगाकर आजतक हज़ारों के तादाद मे भक्तगण जिनवाणी, दर्शन , धर्मचर्चा का लाभ ले रहे है! संघ द्वारा विविध धार्मिक आध्यात्मिक कार्यक्रमोका सुचारु रुपसे आयोजन किया जा रहा है! आज के धर्मसभा में अहिल्यानगर महाराष्ट्र से भामाशा, शिँक्षा महर्षि गुरुभक्त CA श्रीमान रमेशजी फिरोदिया फिरोदिया पधारे थे, जिनका आज 80वाँ जन्मदिवस है! यह औचित्य सामने रख रमेशजी को राजस्थानी साफ़ा एवं गमच्छा देकर पदाधिकारीयों...
आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ मे उपप्रवर्तिनी महाराष्ट्र सौरभ पु. चंद्रकलाश्री जी म.सा. आदि ठाणा ३ का चातुर्मास जारी है ! आजके प्रवचन मे साध्वी स्नेहाश्री जी ने मुस्कुराते चेहरेपर उद्बोधन दिया! एक हंसता हुआ चेहरा व्यक्ति के खुले जीवन, अनुशासन , उसकी खुशनुमा जिंदगी , उसका मधुर व्यवहार, व्यक्ति का मित्रीत्व जीवन, समायोजन की शक्ति, शालीनता, अपनापन और रिश्ते की गहराई आदि विशेषताओं को दर्शाता है। मुस्कुराना ही अपने आप में एक कला है, जो प्रत्येक व्यक्ति के पास नहीं होती और हमेशा मुस्कुराना भी बड़ा कठिन कार्य है, जो हर किसी द्वारा संभव भी नहीं है। क्योंकि व्यक्ति के जीवन में अनेक प्रकार की परिस्थितियां होती है, उन परिस्थितियों के अनुसार सुख और दुख में स्वयं का समायोजन करते हुए खुद के चेहरे पर एक मुस्कुराहट रखना अपने आप में मुश्किल कार्य है। मुस्कुराकर के व्यक्ति दुश्मन को भी मित्र बना सकता ...
श्रीमती सुभद्रा लुणावत बनी अध्यक्ष, कुशल बांठिया मंत्री अणुव्रत समिति की नवगठित टीम का हुआ शपथ ग्रहण Sagevaani.com / चेन्नई : अणुव्रत समिति चेन्नई की नवगठित टीम का शपथ ग्रहण समारोह साध्वी उदितयशा ठाणा 4 के सान्निध्य में तेरापंथ भवन, साहूकारपेट में समायोजित हुआ। अणुव्रत समिति महिला सदस्याओं ने अणुव्रत गीत मंगलाचरण से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। निवर्तमान अध्यक्ष ललित आंचलिया ने नवमनोनीत अध्यक्ष एवं टीम को शुभकामनाओं के साथ शपथ दिलाई। डाॅ कमलेश नाहर ने अणुव्रत आचार संहिता का वाचन किया, जिसे सभागार में उपस्थित जनमेदनी ने दोहराया। मंगल पाथेय प्रदान करते हुए साध्वी उदितयशा ने कहा कि संभव हो तो व्यक्ति महाव्रती बने। पर सभी अणुव्रती तो जरूर बने। गणाधिपति पूज्य गुरुदेव तुलसी ने जन जन के मानस में नैतिक चेतना के जागरण के लिए अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया। साधु-संतों ने पांव पांव पदयात्रा कर जनमानस...
वड़गांव शेरी, पुणेमे प्रवर्तिनी भारतमाता प्रमोदसुधाजी म सा तथा सजक संथारा साधिका उपप्रवर्तिनी प्रियदर्शनाजी म सा इनकी सुशिष्याए प्रनवदर्शनाजी म सा तथा ईशदर्शनाजी म सा इनका 2025 का चातुर्मास बड़ी जोर शोर से भावपुर्ण वातावरण मे चल रहा है. हररोज 500 से 600 श्रावक , श्राविका स्थानक भवन मे पधारके इसका लाभ ले रहे है. वड़गांव शेरी पुणे के अध्यक्ष श्री संतोषजी कटारिया और महामंत्री श्री हर्षदजी दुगड़ और सभी कमिटी मेंबर की उपस्थिती मे बड़ेही उस्साहपूर्ण वातावरण मे सभी लाभ ले रहे है.🙏🏻
गांधीनगर, बैंगलोर चातुर्मास- वरुण वाणी श्री गुजराती जैन संघ, गांधीनगर, बेंगलुरू में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय उपप्रवर्तक श्री पंकजमुनिजी म. सा. ने मंगलाचरण के साथ प्रवचन सभा का शुभारंभ किया एवं मधुर गायक परम पूज्य श्री रुपेशमुनिजी म. सा. ने गुरु पद्म अमर आरती के मधुर संगान के साथ सभा को भावविभोर कर दिया । तत्पश्चात दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार प. पू. डॉ श्री वरुणमुनिजी म. सा. ने अपने मंगल उद्बबोधन में फरमाया कि यदि आप संत नहीं बन सकते तो कम से कम शांत अवश्य बने । जिस प्रकार सूर्य की कोई प्रशंसा करें या निंदा, सूर्य उससे अप्रभावित रहता है, इसी प्रकार क्रोध या आवेश आने पर मौन रहने या मन को शांत रखने से हम उसके दूरगामी दुष्प्रभावों से बच सकते हैं । मुनि श्री ने आगे फरमाया कि जैसे शर्ट का पहला बटन यदि गलत लग जाए तो बाकी के सारे बटन गलत ही लगेंगे । इसी प्रकार यदि आध्यात्म में हमारा पहल...
सुख- महासुख-परमसुख इन तीन सुखो मे परमसुख का अनुभव करोंगे तो आत्मा महान बन सकती है- महासाध्वी डॉ. संय्यमलताजी का प्रतिपादन! रतलाम- जैन दिवाकरीय, दक्षिण चंद्रिका पु. डॉ. संय्यमलताजी म.सा. प्रखर वक्ता पु. डॉ.अमित प्रज्ञाजी म. सा. एकांतर तप आराधिका डॉ. कमल प्रज्ञाजी म.सा. एवं एकांतर तप आराधिका पुसौरभ प्रज्ञाजी म.सा. आदि ठाणा 4 धर्म नगरी रतलाम मे चातुर्मासार्थ विराजमान है! रतलाम नगरी से बड़े बड़े महान संत जिनशासन की सेवामे समर्पित हुये है! आज असंख्य भाविको के सामने डॉ. महासाध्वी संय्यमलताजी ने सुख के तीन प्रकारो का विश्लेषण कर हमे परमसुख का लाभ लेने का एहलान किया तो डॉ. अमित प्रज्ञा जी ने पिता के अनन्य साधारण महत्व का वर्णन विविध द्रष्टांत के माध्यम से विशद किया! चातुर्मास क़ालीन विविध आध्यात्मिक कार्यकमो की जानकारी देकर वंदना के मॉंसखमण की घोषणा की जिसमें हर रोज़ 31 वंदनाएँ गुरुचरणो मे रखी जाय...
भक्ति करने से मन को शांति मिलती है, हृदय शुद्ध होता है, और आत्मा को आनंद की प्राप्ति होती है। – साध्वी स्नेहा श्री जी का उद्बोधन! इसके अतिरिक्त, भक्ति से मनुष्य के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है, और वह अंदर और बाहर से शुद्ध हो जाता है। भक्ति का अर्थ है भगवान के प्रति समर्पण, निस्वार्थता, विनम्रता और श्रद्धा। जब कोई व्यक्ति सच्चे मन से भक्ति करता है, तो उसे ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है, और उसके जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति मिलती है। भक्ति के कई लाभ हैं: मन को शांति: भक्ति करने से मन शांत होता है और तनाव कम होता है. आंतरिक शुद्धि: भक्ति से हृदय शुद्ध होता है और नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिलती है. आत्मा को आनंद: भक्ति करने से आत्मा को आनंद और संतुष्टि का अनुभव होता है. पापों का नाश: भक्ति से मनुष्य के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है. ईश्वर की कृपा: सच्चे ...
चेन्नई-पुरषवाक्कम स्थित एएमकेएम जैन मेमोरियल ट्रस्ट में विराजमान आगम ज्ञाता, प्रज्ञा महर्षि डॉ. समकित मुनिजी म.सा. ने शनिवार को अपने प्रवचन में कहा जिसमें अपनी मेहनत और प्रयास लगते हैं, वही हमारी सच्ची यात्रा होती है। इस संसार में सैकड़ों यात्राएँ हैं मधुबन की यात्रा है तो पतझड़ की भी यात्रा है। लेकिन जीवन में कुछ कर सको या न कर सको, समकित यात्रा जरूर करना। ‘परदेसी’ की कथा को आगे बढ़ाते हुए मुनिश्री ने बताया कि वह एक बहुत बड़ा राजा था, लेकिन उसने बड़े होने के कर्तव्यों को नहीं निभाया। ज्ञानी सदा कहते हैं कि अगर तुम बड़े बने हो तो कार्य भी बड़े करो, क्योंकि यह जीवन बार-बार बड़ा नहीं बनाता। यदि कोई बड़ा बनकर खड़ा हो जाए लेकिन व्यवहार में प्रेम न हो, तो उसकी महानता खो जाती है। श्रेष्ठ बनना हमारा काम है — मनुष्य होकर भी कोई श्रेष्ठ बन सकता है, और मनुष्य होकर भी नीचता की ओर जा सकता है। श्रेष्ठत...
गांधीनगर, बैंगलोर चातुर्मास- वरुण वाणी श्री गुजराती जैन संघ, गांधीनगर, बेंगलुरू में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय उप- प्रवर्तक श्री पंकजमुनिजी म. सा. ने मंगलाचरण के साथ प्रवचन सभा का शुभारंभ किया एवं मधुर गायक परम पूज्य श्री रुपेशमुनिजी म. सा. ने गुरु पद्म अमर आरती के मधुर संगान के साथ सभा को भावविभोर कर दिया तत्पश्चात दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार प. पू. डॉ. श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने आज अपने प्रवचन में फरमाया कि जीवन का चरम परम-लक्ष्य है- वीतराग बनना । जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा एवं समर्पण के साथ भक्ति करते हैं, वह अमर हो जाते हैं । आचार्य मानुतुंग द्वारा रचित भक्तामर स्तोत्र के प्रथम श्लोक के दूसरे अक्षर *प्रणत* शब्द का आज हम विवेचन करेंगे । प्रणत शब्द नत शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है – नमन करना । कोई भी व्यक्ति जाति से महान या निकृष्ट नहीं होता किंतु अपने कर्म से निकृष्ट य...
आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे “ गुरु- पौर्णिमा” महोत्सव मनाया गया! उपप्रवर्तिनी गुरुमॉं पु चंद्रकला श्री जी की सुशिष्या पु स्नेहाश्री जी म.सा. ने अपने उद् बोधन मे बताया गुरु वह दीपक हैं जो हमारे जीवन के अंधकार को दूर कर के हमें सफलता की राह दिखाते हैं। वे हमारे चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राचीन काल से ही भारत में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है — “गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर:” इस मंत्र से गुरु की महानता झलकती है। गुरु केवल वही नहीं होते जो हमें किताबों का ज्ञान दें बल्कि वे होते हैं जो हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं. सही और गलत में फर्क समझाते हैं और हमारे अंधकारमय जीवन में प्रकाश लाते हैं. एक अच्छा गुरु न केवल पढ़ाता है, बल्कि हमें सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता भी देता है. गुरु पूर्णिमा का संबंध महर्षि ...
266 वां तेरापंथ स्थापना दिवस एवं गुरु पूर्णिमा मनाई गई Sagevaani.com / किलपॉक,चेन्नई : श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, किलपॉक के तत्वावधान में ‘266वाॅ तेरापंथ स्थापना दिवस’ भिक्षु निलयम के महाश्रमणम् हॉल में मुनि मोहजीतकुमार ठाणा 3 के सान्निध्य में विशाल उपस्थिति में मनाया गया। मुनि मोहजीतकुमार ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने त्रिपदी क्रांति की, जिसमें आचार, विचार अनुशासन के आधार पर इस धर्मसंघ को प्रस्थापित किया। उन्होंने कहा शुद्ध साधन से ही शुद्ध साध्य की प्रप्ति होती है। तेरापंथ धर्मसंघ समर्पण, सेवा, वैचारिक उदारता और समन्वयशीलता का साकार रूप है। यह संघ एक आचार्य के नेतृत्व में संचालित है। इस धर्मसंघ की गौरवशाली परम्परा में गुरु निष्ठा, आचार निष्ठा, मर्यादा निष्ठा, अनुशासन निष्ठा का सर्वोच्च स्थान है। मुनि जयेशकुमार ने कहा कि आचार्य भिक्षु बॉस नहीं, एक लीडर थे। वे सिर्फ आदे...
ऋषि दुगड़ की मधुर स्वर लहरीयों से भिक्षुमय बना भिक्षु निलयम आचार्य भिक्षु कुशल विधिवेता, कवि, साहित्यकार थे : मुनि मोहजीतकुमार Sagevaani.com /किलपाॅक, चेन्नई : श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, किलपाॅक के तत्वावधान में, मुनिश्री मोहजीतकुमार के सान्निध्य में आचार्य श्री भिक्षु स्वामी जन्म त्रिशताब्दी वर्ष के प्रथम चरण पर ‘भिक्षु भजनोत्सव’ विशाल धम्मजागरणा का कार्यक्रम भिक्षु निलयम के महाश्रमणम हाल में मनाया गया। अर्हत् वन्दना, नमस्कार महामंत्र से प्रारंभ धम्मजागरणा में सभाध्यक्ष अशोक परमार ने पधारे हुए संगायक ऋषि दुगड़, श्रावक समाज का स्वागत- अभिनन्दन कियाl उपस्थित विशाल जनसैलाब को सम्बोधित करते हुए हुए मुनिश्री मोहजीतकुमार ने कहा कि आचार्य भिक्षु एक कुशल विधिवेता के साथ-साथ एक सहज कवि एवं महान साहित्यकार थे। वे जब तक जिये, ज्योति बनकर जिये। उनके जीवन का हर पृष्ठ, पुरुषार्थ की ...