जिनवाणी में संसार का स्वरूप बताया गया है यह संसार निश्चित ही दुःख रूप है। आधि, व्याधि और उपाधि से ग्रस्त इस संसार में सुख की अपेक्षा दुःख की मात्रा अधिक है। मनुष्य के पास सौ सुख हो और एक दुःख है तो वह एक दुःख भी उसे पीडित करता रहेगा। क्योकि सौ सुख होने पर भी वह स्वयं को सुखी नहीं मानता। सौ सुखों में से यदि एक सुख भी चला जाता है तो मनुष्य रोने लगता है हालाँकि निन्यानवें सुख उसके पास है फिर भी वह रोता है और शिकायत करता है। मानव मन की यह बहुत बड़ी कमजोरी है कि जो सुख उसके पास नहीं है, उसके लिए वह सदैव चिन्ताग्रस्त रहता है। इस महत्वाकांक्षा ने मानव को जन्म से मृत्यु तक दौड़ाया है। इस दौड़ में मनुष्य थकान, टूटन और घुटन भले ही महसूस करता हो पर वह अपनी हार नहीं मान सकता। महत्वाकांक्षा की फाँस आदमी को कितना दौड़ाती है यह केवल भुक्तभोगी ही बता सकता है। ऐसे व्यक्ति केवल घड़ी की सूईयों की भाँति घूमते...
साहूकारपेट में बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में सांवत्सरिक पर्व मनाया गया | स्वाध्याय भवन,साहूकारपेट में संवत्सरी महापर्व 27 अगस्त बुधवार को देवसिय व 28 अगस्त को प्रातःकाल रायसी प्रतिक्रमण युवा स्वाध्यायी योगेशजी श्रीश्रीमाल ने करवाया | एम प्रकाशजी कांकरिया ने पौषध सहित बेला योगेशजी श्रीश्रीमाल व मोहितजी छाजेड़ ने अष्ठ प्रहर सज्जनराजजी बोथरा ने पांच प्रहर उच्छबराजजी गांग गौतमचन्दजी मुणोत, गौतमचन्दजी बागमार, सी विमलचन्दजी सुराणा,एन शांतिलालजी कर्णावट, किशोरजी डाकलिया,पी वीरेन्द्रजी ओस्तवाल,एस रविन्द्रजी बोथरा शिखरजी छाजेड़ सुनीलजी सांखला ने चार प्रहर का पौषध व संवर आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने किया | वरिष्ठ श्रावक रत्न श्री मोहनलालजी कांकरिया ने मांगलिक सुनाई व प्रत्याख्यान करवाये | जैन जीवन संकल्प, गुरु-वन्दन व गुरु भगवन्तो की साता पृच्छा पाठ के संग प्रतिक्रमण में चौरासी ला...
जालना (प्रतिनिधी) : जालना शहरातील गुरु गणेश तपोधाम येथे आज सामूहिक क्षमा याचनाचा भव्य व पवित्र सोहळा मोठ्या श्रद्धा, भक्ती व उत्साहाच्या वातावरणात संपन्न झाला. या प्रसंगी प.पू. रमनिकमुनिजी म.सा. यांच्या सान्निध्यात भाविकांनी एकमेकांना मिच्छामी दुक्कडम् म्हणत वैरभाव विसरून मैत्री, शांती आणि सद्भावनेचा संदेश दिला. सकाळपासूनच तपोधाम परिसरात भाविकांची गर्दी उसळली होती. स्त्री-पुरुष, युवक-युवती आणि ज्येष्ठ नागरिकांनी उत्साहात सहभागी होत क्षमा धर्माची परंपरा जपली. सामूहिक प्रार्थना, भजन व आत्मचिंतनाने वातावरण अधिक पवित्र झाले. आपल्या प्रेरणादायी आशीर्वचनांत प.पू. रमनिकमुनिजी म.सा. यांनी सांगितले की, क्षमाशीलता हेच धर्माचे खरे लक्षण आहे. क्षमा मागणे म्हणजे कमजोरी नसून ती आत्मशुद्धीची दिशा आहे. कटुता, वैरभाव, मत्सर व अहंकार या मानवी दुर्बलता आहेत. त्या क्षमाशीलतेनेच दूर होतात. क्षमा दिल्याने हृदय ...
एक बने आग तो दूसरा बने पानी यही हैं प्रभु महावीर कि वाणी माफ़ी मांगने वाला हर हाल मे बड़ा होता हैं – साध्वी स्नेहाश्रीजी का “ क्षमापना” पर्व पर उद्बोधन ! आज आकुर्डी स्थानक भवन मे “ सामुदायिक-क्षमापना” महोत्सव गुरुमॉं पु. चंद्रकला श्री जी म.सा. शासन सुर्या पु. स्नेहाश्रीजी म.सा. एवं मधुरकंठी पु श्रुतप्रज्ञाश्री जी के पावन सानिध्य मे मनाया गया।इस अवसर पर क्षमापना का महत्व विशद कर साध्वी स्नेहाश्रीजी ने बताया एक बने आग तो दूसरा बने पानी यही हैं प्रभु महावीर कि वाणी माफ़ी मांगने वाला हर हाल मे बड़ा होता हैं !वर्ष बीत जाने पर हम कैलेण्डर उतार देते हैं, फिर हम वर्ष बीत जाने पर किसी की कही बात को अपने दिल से क्यों नहीं उतार फेंकते। हम खुद की तो हजार गलतियाँ माफ कर देते हैं, फिर किसी दूसरे की दो चार गलतियों के कारण जीवनभर के लिए नफरत क्यों पालें। जैसे ब्लेक बोर्ड को टीचर हर रोज साफ कर देता है,...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर बंगलौर में चातुर्मास के लिए विराजमान दक्षिण सूरज ओजस्वी प्रवचनकार डॉ. श्री वरुण मुनि जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि धर्म स्थान का भाव है कि मन में ही धर्म का निवास हो। धन, विद्या, संपत्ति, रूप, पदवी — इन सबसे बढ़कर धर्म है। उन्होंने कहा कि क्षमा और सत्य से ऊपर कोई धर्म नहीं। धर्मप्रेमी बहनों-भाइयों को जागरूक करते हुए उन्होंने कहा कि भवन को भोजनशाला नहीं बनाना चाहिए। धर्म स्थान का अर्थ है जहाँ साधना का कार्यक्रम बने। आगे उन्होंने कहा कि सत्संग, साधना करने से मन की शुद्धि होती है। मुनि जी ने कहा कि धर्म केवल धर्म स्थान में ही नहीं, बल्कि सभी स्थानों पर होता है। सत्संग में समय बिताने से जीवन का कल्याण होता है, लेकिन यदि जीवन विषय-विकारों में बीतता है, पैसा मौज-मस्ती में खर्च होता है और समय कुसंगति में गुजरता है, तो जीवन व्यर्थ है। इसलिए जवानी, धन और समय का स...
सामूहिक क्षमायाचना आस्था संचेती के 9 की तपस्या पर तपोभिनंदन तेरापंथ धर्मस्थल में भव्य रूप से मना क्षमायाचना दिवस आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी, मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन वृहस्पतिवार को प्रात: 9 बजे से स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में क्षमायाचना दिवस का भव्यातिभव्य समारोह का आयोजन उल्लासमय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर अपने प्रेरक उद्बोधन में मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने कहा कि खमतखामणा और अपनी भूलों का प्रतिक्रमण इस पर्व की आत्मा है। ग्रंथि भेद अपेक्षित है। इस पर्व की प्रेरणा यही है कि मन की गांठें खोलें। मुनि रमेश कुमार ने उपस्थित जनमेदिनी को संबोधित करते हुए कहा कि जैन धर्म में पर्युषण महापर्व को उत्तम पर्व माना गया है, जिसमें तप-त्याग के जरिए कर्मों की ...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा. ने पर्व पर्यूषण आराधना के आठवें दिन संवत्सरी महापर्व पर बुधवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि क्षमा वीरस्य भूषणम। अर्थात् तीर्थंकर परमात्मा भगवान महावीर स्वामी ने क्षमा को वीरों का भूषण बताया है। शूरवीर ही क्षमा कर सकते हैं, कायर व्यक्ति नहीं। उन्होंने कहा कि आज आप सब जीवों से क्षमा की अभिलाषा कीजिए, क्षमा याचना कीजिए और सर्व प्रथम उन लोगों से क्षमा याचना करें जिनके साथ आपका पहले कोई मन मुटाव, वैर वैमनस्य, शत्रुता का भाव रहा हो। तभी आपका इस महापर्व पर क्षमा करना और क्षमा मांगना सार्थक होगा। वरना मात्र अपने ही मिलने वालों से क्षमा याचना करना ही केवल एक औपचारिकता ही रह जायेगी। भगवान महावीर ने क्षमा के अमृत से क्रूर हिंसक अर्जुन मालाकार, अपने पर तेज़ोलेश...
तेरापंथ धर्मस्थल में संवत्सरी महापर्व आयोजित क्षमापना दिवस कल आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, मुनि रमेश कुमार, मुनि पद्म कुमार एवं मुनि रत्न कुमार के पावन सान्निध्य एवं श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से बुधवार को प्रात: 8 बजे से स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में भगवती संवत्सरी महापर्व का भव्यातिभव्य आयोजन किया गया।सैकडों भाई बहनों ने उपवास और पौषध भी किये। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने संवत्सरी महापर्व के बारे में विस्तार से समझाया। मुनिश्री ने इस महापर्व की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस व्यक्ति का अंत:करण शुद्ध एवं सरल होता है वहां धर्म का वास होता है। हम धर्म के प्रति निरंतर अग्रसर रहेंगे तो एक समय ऐसा आएगा जब हम वीतराग बन जाएंगे। मुनिश्री ने भगवान महावीर की जीवन गाथा पर विस्तार से प्रका...
जालना : जैन समाजातील आठ दिवसांच्या पर्युषण पर्वाचा समारोप झाला. अंतिम दिवस संवत्सरी महापर्व – आलोयणा हा जैन धर्मीयांसाठी अत्यंत पवित्र मानला जातो. या दिवशी सकाळपासूनच शहरातील विविध जैन मंदिरांमध्ये भाविकांची मोठी गर्दी झाली. सर्वत्र धार्मिक वातावरण, उपवास, स्वाध्याय व सामूहिक प्रतिक्रमणाचे आयोजन करण्यात आले.या प्रसंगी प.पू. रमणिकमुनीजी म.सा. यांनी आपल्या प्रबोधनपर प्रवचनातून संवत्सरीच्या पावन दिवसाचे महत्त्व व तत्त्वज्ञान अधोरेखित केले. त्यांनी सांगितले की – मानवी जीवनात चुका अपरिहार्य आहेत. विचारांनी, वाणीने वा कृतीने आपण कितीही सजग राहिलो, तरी कधी ना कधी नकळत इतरांना दु:ख पोहोचतेच. पण त्या चुकांकडे दुर्लक्ष न करता त्या कबूल करणे आणि त्यासाठी क्षमा मागणे हेच खरी साधना आहे. क्षमा मागणारा आणि क्षमा करणारा – दोघांचेही अंत:करण हलके होते, आत्मा पवित्र होतो आणि समाजात सौहार्द ...
सबके साथ मैत्रीभाव रखना ही संवत्सरी पर्व का संदेश – सवंत्सरी पर्व बिते वर्ष मे हुई भुलवतो क्षमा करनेका एवं क्षमा माँगने का पर्व है! साध्वी स्नेहा़श्री जी म.सा. उप प्रवर्तिनी महाराष्ट्र सौरभ पूज्या गुरूवर्या श्री चंद्रकला श्री जी म सा वाणी के जादूगर शाशन सूर्या पूज्य स्नेहा श्री जी म सा मधूर गायिका पूज्या श्रुतप्रज्ञा श्री जी म सा के पावन सानिध्य में जैन समाज ने एक साथ मनाया संवत्सरी महापर्व! प्रवचन सूर्या पूज्या स्नेहा श्री जी म सा ने कहा संवत्सरी पर्व बीते वर्ष में हुई भूलों के लिए क्षमा करने का एवं क्षमा माँगने का पर्व है। क्षमा का अर्थ है, जो बीत गया उसे जाने दो, उसे पकड़कर मत बैठो। खुद के दिल को ठेस लगी, फिर भी क्षमा कर दिया तो समझो आपने संवत्सरी पर्व के सही अर्थ को जी लिया। छप्पन इंच का सीना उसका नहीं होता, जो रोज दण्ड-बैठक लगाता है, बल्कि उसका होता है, जो दूसरों की गलतियों को मा...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म.सा.ने पर्यूषण पर्व के सातवें दिन धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि तप आत्म शुद्धि का पवित्र माध्यम है। उन्होंने अंतगड सूत्र के माध्यम से राजा श्रेणिक की काली, सुकाली, महाकाली आदि दस रानियों के प्रभु महावीर के पास जाकर दीक्षा ग्रहण करके विभिन्न रत्नावली आदि अनेक प्रकार की विशिष्ट तप साधना करते हुए परम पद मुक्ति मोक्ष को प्राप्त करने के प्रेरक जीवन प्रसंग पर सारगर्भित विवेचना प्रस्तुत की। उन्होंने आगे कहा कि तपस्या करने से साधक के भवो भवो के किये संचित कर्म नष्ट हो जाते हैं। तप आत्मा की ज्योति है। तप आत्मा का श्रृंगार है। उन्होंने कहा कि श्रमण संस्कृति तप प्रधान संस्कृति है तप श्रमण संस्कृति का प्राण तत्व है। जीवन की श्रेष्ठ कला है। तप जीवन का दिव्य आलोक है। शुरव...
पर्युषण पर्व में ध्यान दिवस बना तप दिवस तेरापंथ धर्मस्थल में तपस्या का मेला 30 तपस्वी भाई बहनों का एक साथ तपोभिनंदन पूर्वोत्तर भारत के गुवाहाटी में तपस्या का नया कीर्तिमान बना संवत्सरी महापर्व कल इस चातुर्मास में तपस्या का नया कीर्तिमान बन गया। गुवाहाटी में आज 30 तपस्वी भाई-बहिनों का एक साथ तपोभिनंदन का मेला लगा। इस अद्भुत मेले में 14 तपस्वी भाई एवं 16 तपस्विनी बहिनों का मुनिश्री डाॅ ज्ञानेंद्र कुमार जी मुनि श्री रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा की ओर से अभिनंदन किया गया। पूर्वोत्तर भारत में एक साथ ऐसा तप अभिनंदन कभी नहीं हुआ। पर्युषण महापर्व के ध्यान दिवस एक तरह से तप दिवस के रुप में परिवर्तन हो गया। तेरापंथ समाज की सभी संघीय संस्थाओं के सहयोग से मंगलवार को प्रात: 9 बजे से स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में सामूहिक तपोभिनंदन समारोह का आयोजन हुआ। इस...