आकुर्डी स्थानक भवन में “ लाखिना “ आयंबील का आयोजन 63 आराधको ने किया आयंबील! आज आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे गुरुमॉं पु चंद्रकलाश्री जी म. सा. के मुखान्वये 63 धर्म आराधक- आराधिका ने लाखिना आयंबील के प्रत्याख्यान लिए! शासन सुर्यां पु स्नेहाश्री जी म.सा. ने लाखिना आयंबील का महत्व विशद किया! आयंबील व्यंजन में भी केवल तीन चिजो का उपयोग किया गया! आज के लाखीना आयंबील के लाभार्थी बने इंदौर के प्रसिध्द उद्योजक श्रीमान हनुमान प्रसाद जी जैन परिवार! आयंबील तप आराधको का संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी ने स्वागत कर अनुमोदना दी!
मानव का मन भावनाओं का एक अक्षय भंडार होता है। इसे सागर की उपमा दी जाए तो भी अतिशयोक्ति नहीं है। सागर में जिस प्रकार प्रतिपल असंख्य लहरें आती और जाती है, उसी प्रकार मन में भी निरन्तर भावनाओं की लहरें उठती रहती है। उसमें कुछ शुभ और कुछ अशुभ होती हैं, वही भावनाएं मनुष्य के चरित्र का निर्माण करती है। शुभ भावनाएं उत्तम संस्कारों को बनाती है, अशुभ भावनाएं कुसंस्कारों को। जिस प्रकार एक ही क्यारी में कान्दा और गन्ना बोने से गन्ने की मिठास समाप्त नहीं होती, कांदा अपनी दुर्गन्ध नहीं छोड़ता। उसी प्रकार मनुष्य में भी अच्छी और बुरी दोनों भावनाओं का एक साथ जन्म होता है। जब मानव को किसी में लाभ नजर आता है तो उसके उत्तम संस्कार जाग्रत हो जाते हैं और तब इच्छाओं पर कुठाराघात होता है तो तब उत्तम संस्कार ही कुसंस्कार बन जाते हैं। मानव यदि अपनी कुभावनाओं पर काबू नहीं रख पाता तो उसके मन में कुसंस्कारों का बीज ज...
चेन्नई के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट साहूकारपेट में स्थित स्वाध्याय भवन में भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा पक्खी पर्व जप-तप- त्याग पूर्वक मनाया गया | श्रद्धालुओं द्वारा आलोयणा का पाठ किया गया | अनन्त चतुर्दशी पर्व पर स्वाध्यायी बन्धुवर श्री कांतिलालजी तातेड़,श्री ए नवरतनमलजी बागमार ने चार प्रहर के पौषध व्रत एवं श्री वीरेन्द्रजी ओस्तवाल,श्री दीपकजी श्रीश्रीमाल व श्री योगेशजी श्रीश्रीमाल ने रात्रिकालीन संवर की साधना की | भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा पक्खी पाक्षिक पर्व पर स्वाध्यायी श्री बादलचन्दजी बागमार ने देवसीय प्रतिक्रमण करवाया | पौषध व संवर साधना करने वालों के संग श्री पदमचंदजी श्रीश्रीमाल, लीलमचन्दजी बागमार, उच्छबराजजी गांग,संदीपजी ओस्तवाल,नेमीचंदजी कर्णावट,आर नरेन्द्रजी कांकरिया,कांतिलालजी तातेड़,योगेशजी श्रीश्रीमाल, इंदरचंदजी कर्णावट ने सायंकालीन प्रतिक्रमण करते हुए सर्व जीव राशि से क्षमायाचना की | ग...
जहॉं पर सब कुछ अच्छा अच्छा है उसे स्वर्ग कहते हैं और जहॉं पर दुःख ही दुःख है वहॉं पर नरक कहते है! स्वर्ग नरक के इस भेद में हमारा शाश्वत घर मोक्ष है! यदि हाय क्लास चाहिये तो तयारी भी फर्स्ट क्लास करनी होगी! मानव जन्म दुर्लभ है ज्यो हमें मिला है! जिनवाणी का श्रवण कर आत्म कल्याण करना आवश्यक है! आज चंद्रग्रहण है ! उसका महत्व हानी फायदा आदि साध्वी स्नेहाश्री जी ने गुरुमॉं के आज्ञा से समझाया एवं जप आराधना करने का रात्री भोजन त्याग करने का प्रत्याख्यान दिया! आज के धर्मसभा मे इंदौर के प्रसिद्ध उद्योजक भामाशा हनुमंत प्रसाद जैन सहपरिवार दर्शनार्थ पधारे ! पहली बार विदेश मे दुबई जाकर पर्युषण पर्व के अवसर पर स्वाध्यायी गये प्रा अशोकजी पगारीया एवं श्री पुनमचंद जी जैन को भी आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ द्वारा नवाज़ा गया! प्रा अशोकजी पगारीया ने अपने दुबई के स्वाध्याय अनुभव बयान किये! संघाध्यक्ष सुभा...
जालना : आपको भगवान महावीर का अनुभव करना है। भगवान महावीर केवळ अनुभव घेण्यासाठी नाही तर ते आम्हाला जी देसना देतात, लगात्तार बोलण्याच सामार्ध्य कोणात आहे. हे सामार्ध्य केवळ आणि केवळ भगवान महावीरांमध्येच आहे, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, आपण आपल्या कपड्यांना सुंदर ठेवण्याची विधी जाणता, तण की सफाई ठेत्तण्याचं तंत्र आपल्याकडे आहे. तर मग भगवान महावीरांनाच का आम्ही दूर करतो. त्यांनाही जवळ करा, सुंदर करा, आपण आपलं खरं अहोभाग्य भाग्य समजलं की चातुर्मास आणि प्रभू भगवान महावीरांचं च...
जालना : दोषाने मनुष्यातील अंतर वाढत जाते तर गुणांमुळे हेच अंतर कमी होते, म्हणूनच अगोदर दोष- गुणांचा विचार प्रत्येकानेच करायला हवा, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, 27 दिवसांची श्रृत आराधना लवकरच आपल्या भेटीला येणार आहे. या आराधनेतूनच आपल्याला प्रभू महावीरांचे यथासांग दर्शन घडणार आहे. म्हणून तुम्हाला जेवढा आराम करायचा तेव्हढा तो करुन घ्या. ही आराधना केवळ टीव्ही किंवा मोबाईलवर ऐकावयाची नसून येथे येऊन तिचा आनंद घ्या, दिपावलीपूर्वी म्हणजेच पाडव्या दिवशीच प्रभू महावीरांनी 48 घंटे ...
श्री गुजराती जैन संघ गांधीनगर में चातुर्मास विराजित दक्षिण सूर्य ओजस्वी प्रवचनकार डॉ श्री वरुण मुनि जी म सा ने रविवार को धर्म सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को महान आचार्य श्री जयमल जी महाराज की 338 वीं जन्म जयंती पर उनके महान संयमी विराट व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य श्री जयमल जी महाराज जिनशासन के एक दैदीप्यमान नक्षत्र थे। उन्होंने अपने ज्ञान, साधना,तप, संयम साधना के बल पर भगवान महावीर के धर्म शासन की महती प्रभावना की। उन्होंने तप साधना को कर्म निर्जरा का माध्यम मानते हुए अपने संयमी जीवन में अनेक प्रकार की विशिष्ट तप साधना करते हुए अपनी आत्मा को भावित करते हुए आम जनमानस में भी तप साधना का महत्व समझाया। झोपड़ी से लेकर महलों तक उनकी पहुंच थी। आप संगठन विकास, जिनशासन प्रभावक, दीन असहायों के सहायक, महान तप साधक एवं जन कल्याण के मार्ग पर चलने के लिए सबको प्रेर...
तप साधक विजय जी पटवा [27दिन] का तपोभिनंदन समारोह युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण जी के प्रबुद्ध सुशिष्य डाॅ मुनिश्री ज्ञानेन्द्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गुवाहाटी के तत्वावधान में आज दीक्षार्थी मुमुक्षु हनुमान मल जी दूगङ का मंगलभावना एवं मासखमण की तपस्या करने वाले तप साधक विजय जी पटवा [ 27 दिन ] की तपस्या पर तपोभिनन्दन समारोह का आयोजन स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में आयोजित हुआ। मुनि श्री डाॅ ज्ञानेन्द्र कुमार जी ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा – दीक्षा जीवन की विशेष उपलब्धी है। हजारों लाखों व्यक्तियों कोई दो चार व्यक्ति ही दीक्षित होते है। मुमुक्षु हनुमान मल जी ने तप त्यागमय जीवन जिया है। इरोड ( तमिलनाडु ) में रहते हुए साधु साध्वियों की बहुत सेवा उपासना की है। अच्छा श्रावक का जीवन जीया है। मेरे ईरोड चातुर्...
अनंत चतुर्दशी सामुहिक पारणा – चार पीढ़ी एकसंघ श्री पोपटलालजी गुगळे परिवार द्वारा आयोजन ! आज अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघ की सुश्रावुकाओं के लिए चार पिढी साथ मे रहनेवाले गुगळे परिवार द्वारा सामुहिक पारणे का आयोजन किया गया था! 42 सुश्राविका ने अनंत चौदस का उपवास कर श्री संघ की शान बढाई! पारणे पुर्व सभी जैन विधियोंका नियोजन सौ शारदा जी चोरडीया ने किया! श्रीमान पोपटलालजी, हिरालालजी, संतोष जी सुनील जी , अनिलजी गुगळे परिवार लाभार्थी बने! “ युग” गुगळे पड पोते के कारण यह समारोह हुआ! इस अवसर पर आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघ के अध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी जैन कॉन्फ़्रेंस दिल्ली पंचम झोन के अध्यक्ष नितीनजी बेदमुथा के करकमलो द्वारा लाभार्थी परिवार के श्री पोपटलालजी एवं संतोष जी गुगळे को नवाज़ा गया! महाराष्ट्र सौरभ पु. चंद्रकलाश्री जी म.सा.,शासन सुर्या पु स्नेहाश्र...
तप साधिका सुश्री ऐश्वर्या बोथरा के 11 की तपस्या पर तपोभिनंदन टीपीएफ की ए स्पेशल सेशन ऑन हेल्थ एंड कैरियर गाइडेंस कार्यशाला आयोजित आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी , मुनि रमेश कुमार जी , मुनि पद्म कुमार जी एवं मुनि रत्न कुमार जी के पावन सान्निध्य में मंगलवार को स्थानीय तेरापंथ धर्मस्थल में तप साधिका सुश्री ऐश्वर्या बोथरा (सुपुत्री : राकेश-एकता बोथरा, रतनगढ़) के ग्यारह (11) की तपस्या के उपलक्ष्य में तपोभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। साथ ही तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम की ए स्पेशल सेशन ऑन हेल्थ एंड कैरियर गाइडेंस कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर मुनि डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा संकल्प जब अनकन्शेस माइंड अवचेतन मस्तिष्क तक चला जाता है तब वह फलीभूत हो जाता है। तपस्या हमें निर्जरा व स्वभाव परिवर्तन के लिए करनी चाहिए। तप में अपरिमित श...
जालना : ध्याना काही पैसे लागत नाहीत, तेही अत्भूत आहे, प्रत्येकानेच ध्यान मग्न राहयाला हरकत नाही, असा हितोपदेश वाणीचे जादुगार श्रमण प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. ते गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित विशेष प्रवचनात श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार प.पू. रमणीकमुनीजी म.सा.बोलत होते. यावेळी विचार पिठावर अन्य साध्वींची उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना श्रमणसंघीय सलाहकार, वाणीचे जादुगार, प.पू.रमणीकमुनीजी म. सा. म्हणाले की, ध्यान म्हणजेच धर्म कार्य आहे, जे ध्यान करतात ते सुध्दा धर्मकार्य करतात, असे म्हटले तर ते मुळीच वावगे ठरणारे नाही. ध्यानाचेही दोन प्रकार आहेत, असे सांगून ते म्हणाले की, ज्यावेळी आपल्याला खूप गर्मीचा त्रास होऊ लागतो. तेव्हा आपण एखाद्या झाडाचा आसरा घ्यायला लागतो. दिवा जेव्हा विझू लागतो, तेव्हा तो विझू नये म्हणून आपणच अंधार्या खोलीचा आसरा घेतो. अशा खो...
तेरापंथ धर्मस्थल में 223वां भिक्षु चरमोत्सव एवं मासखमण तपोभिनंदन समारोह आचार्य महाश्रमण के प्रबुद्ध सुशिष्य मुनिश्री डॉ. ज्ञानेन्द्र कुमार जी एवं मुनिश्री रमेश कुमार जी आदि ठाणा-4 के पावन सान्निध्य में 223वां भिक्षु चरमोत्सव तथा तपस्वी श्रीमान राजेंद्र भंसाली के मासखमण (30 दिन) एवं युवा तपस्वी प्रवेश बैद (17 दिन) के तप के उपलक्ष्य पर शुक्रवार को तेरापंथ धर्मस्थल में भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आज सैकड़ों लोगों ने उपवास भी किया। मासखमण तप साधक राजेंद्र भंसाली के परिवार ने जुलूस भी निकाला, जो छत्रीबाड़ी स्थित सिपानी बिल्डिंग के सामने से तेरापंथ धर्मस्थल में पहुंचकर धर्मसभा के रूप में परिणत हो हुआ। मुनि श्री डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार जी ने उपस्थित जनमेदिनी को फरमाया कि तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य प्रवर्तक आचार्य भिक्षु ने तपस्या में ही तेरापंथ धर्मसंघ की नींव र...