स्वाध्याय भवन साहूकारपेट चेन्नई में श्रमण संघीय उपाध्याय श्री रमेशमुनिजी शास्त्री म.सा के श्रमणाचार विषय अष्ठ प्रवचन माता”पांच समिति तीन गुप्ति” पर स्वाध्याय अनुप्रेक्षा 30 नवम्बर 2025 रविवार को साहूकारपेट के चेन्नई में बेसिन वाटर स्ट्रीट स्थित स्वाध्याय भवन में स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में श्रमण संघीय उपाध्याय श्री रमेशमुनिजी शास्त्री म.सा के जिनवाणी मासिक नवम्बर में प्रकाशित चिन्तन श्रमणाचार अष्ठ प्रवचन माता : स्वरुप और चिन्तन पर वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्रजी कांकरिया द्वारा स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा की गई | वरिष्ठ स्वाध्यायी बन्धुवर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने स्वाध्यायी बन्धुवरों को संबोधित करते हुए कहा कि उपाध्याय रमेशमुनिजी ‘शास्त्री’ ने श्रमणाचार विषय चिन्तन अष्ठ प्रवचन माता स्वरुप में चिन्तन रखा हैं कि मुनि की माता अष्ठ प्रवचन माता हैं | समिति का अर्थ शु...
23 नवम्बर 2025 रविवार स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में श्रमण संघीय उपाध्याय श्री रमेशमुनिजी म.सा ‘शास्त्री’ के श्रमणाचार विषय अष्ठ प्रवचन माता : स्वरुप और चिन्तन पर वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्रजी कांकरिया द्वारा स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा की गई | वरिष्ठ स्वाध्यायी बन्धुवर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने मासिक पत्रिका जिनवाणी में प्रकाशित उपाध्याय श्री रमेशमुनिजी म.सा ‘शास्त्री’ के श्रमणाचार विषय अष्ठ प्रवचन माता : स्वरुप और चिन्तन के अंतर्गत कहा कि मुनि की माता अष्ठ प्रवचन माता हैं | ईर्या समिति के महत्वपूर्ण चार कारण गुरु वन्दन,आहार, विहार एवं निहार व ईर्या की विशुद्धि के चार कारण आलम्बन,काल, मार्ग एवं यतना पर विस्तृत अनुप्रेक्षा की | ईर्या समिति साधक की आत्मा के लिए परम विशुद्धि का कारण हैं | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्र...
पूज्यश्री शालिभद्रजी म.सा के बालोतरा में संथारा पुर्वक देवलोकगमन हो जाने पर चेन्नई के साहूकारपेट बेसिन वाटर वर्क्स में स्थित स्वाध्याय भवन में गुणानुवाद संपन्न राजस्थान बालोतरा में श्रुतधर श्रदेय पूज्यश्री प्रकाशमुनिजी म.सा के सुशिष्य पूज्यश्री शालिभद्रमुनिजी म.सा के संथारा पुर्वक देवलोकगमन हो जाने पर चेन्नई के साहूकारपेट बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में गुणानुवाद किये गए | वरिष्ठ स्वाध्यायी श्री वीरेन्द्रजी कांकरिया ने शालिभद्रमुनिजी म.सा के दृढ़ता पूर्वक संयम पालन के अनेक उद्दरण धर्मसभा में रखते हुए कहा कि मुनि दीक्षित होने के पश्चात राजस्थान की गर्मी व भीषण सर्दी ठण्ड के मौसम में धूप व सर्दी की दैनिक रुप आतापना लेने वाले सन्त रत्न थे,जो भी श्रदालु राजस्थान में उनके विचरण क्षेत्र के नजदीक में जाते तो अवश्य ही महान सन्त रत्न के दर्शन की भावना से अवश्य दर्शन करने जाते थ...
तमिलनाडु हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष डा. दिलीपजी धींग ने अपनी नई काव्यकृति ‘समय के अश्व’ के विमोचन करने के पश्चात शनिवार को श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ, तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया को भेंट की । अभुषा फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक में कवि डा. धींग के विद्यार्थी जीवन की एक से बढ़कर एक कविताएँ को समावेश किया गया हैं | आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि जैन समाज की श्रेष्ठ मासिक पत्रिका ‘जिनवाणी’ में डा. दिलीपजी धींग की कविताएँ नियमित रुप से प्रकाशित होती रहती हैं। अ.भा. श्री जैन रत्न आध्यात्मिक संस्कार केन्द्र के लिए तैयार काव्यसंग्रह में डा. धींग की 12 कविताएँ सम्मिलित हैं। मधुर व्याख्यानी श्रदेय श्री गौतममुनिजी म.सा,बहुश्रुत श्रदेय श्री जयमुनिजी म.सा, मुनि श्री मोहजीत कुमारजी म.सा आदि संतो व अनेक कवियों ने भी डॉ.धींग के सृजन को सराहा है । इस अवसर पर श्री जैन रत्न आ...
भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने अपने अमृतमय प्रवचन से श्रद्धालु जनमानस को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। सभागार में श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति यह दर्शा रही थी कि समाज में धर्म, सत्संग और साधना के प्रति गहरी आस्था निरंतर बढ़ रही है। मुनि श्री ने अपने प्रवचन के आरंभ में कहा कि—“जीवन में परिवर्तन तभी संभव है जब मनुष्य अपनी भूलों को सहजता से स्वीकार कर सही दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प ले।” उन्होंने बताया कि सच्चा जीवन-परिवर्तन किसी बाहरी चमत्कार का परिणाम नहीं होता, बल्कि वह आत्म-जागरण, सत्संग, सद्विचार और निरंतर आत्म-साधना का फल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि मनुष्य का अंतर्मन ही उसके जीवन की दिशा निर्धारित करता है; यदि मन पवित्र, शांत और संयमित हो तो जीवन स्वयं ही उज्ज्वल हो जाता है। भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने विशेष रूप से चार बातों पर बल दिया— विचारों की पवित्रता – “...
दिनांक 20th गुरुवार 2025 *अमावस्या* के उपलक्ष मैं *जैन सेवा मंडल* बैंगलोर कैंट, कि और से तीमैया रोड स्थित सेठ श्री *किशनलाल फूलचंद लुनिया मेटरनिटी होम”* (“पुअर हाउस हॉस्पिटल”) के बाहर अल्पाहार अन्नाधानम का कार्यक्रम रखा गया ! इस अवसर पर चांदमल जी सियाल, शांतिलाल चुतर, महावीर चंद गादिया, उत्तम चंद लुनावत, ताराचंद लुणावत, अशोक खिवंसरा, प्रदीप मेहता,सुनील पोखरना,महेन्द्र लुनिया, विशाल गादिया, आनंद चुतर, दिनेश लोढ़ा, ललित लोढ़ा, राकेश गुलेच्छा, महावीर बोहरा,हरीश गादिया, महेन्द्र सेन,विजयराज सुराणा, राजेश सोलंकी, भरत मेहता, सुनीता विमल चंद बरलोटा,किशोर कोठरी, अशोक कोठारी, प्रमोद संघवी, प्रवीण गुलेच्छा, सुनिल खिवंसरा, मनोज नणेशा, ललित सोलंकी, राकेश पोखरना, सुनील सुराणा, मांगीलाल, इंदर चंद मेहता, सुरेंद्र जी रातडिया मुथा, मेहता, मनोहर सुराणा, महावीर फुलफगर, जितेंद्र लुणावत, चंदू...
जिनालय प्रणेता आचार्य पु. विश्वकल्याण जी म. सा. को आदर की चादर प्रदान! आकुर्डी स्थानक भवनमे आज दक्षिण चंद्रिका पु. संय्यमलताजी म. सा. के सानिध्य मे दिक्षा ग्रहण करने वाली दिक्षार्थी बहना कु. शितल सोलंकी का अभिनंदन एवं अनुमोदना समारोह का आयोजन निगडी प्राधिकरण श्री संघ एवं आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघद्वारा किया गया! जैन कॉन्फ़्रेंस पंचम झोन के अध्यक्ष नितीनजी बेदमुथा के नेत्रुत्व मे इस सुंदर समारोह का आयोजन हुआ! दिक्षार्थी बहना की अनुमोदना करने एवं उन्हें मंगलमय आशिर्वाद देने हेतु श्री संघ की बिनती स्वीकार जिनालय प्रणेता आचार्य भगवंत पु. विश्वकल्याण जी म.सा. पधारे एवं अपने उद् बोधन में संय्यम का महत्व विस्त्रुत रुपसे बताते हुये कुँछ द्रुष्टांत उन्होंने इस समारोहमे रखे! दिक्षार्थी बहना कु. शितल जीने अपने संय्यम पथ पर चलने का द्रुढ निच्शय एवं भावनाएँ प्रकट की और आचार्य भगवंत सह पुरे संघ स...
साधु-संत गुलाब जैसे—सभी को समान सुगंध देते हैं “संत चलते-फिरते तीर्थ के समान होते हैं, जिनकी चरण-रज से तीर्थ भी पावन हो जाते हैं।” यह मंगलमय उद्बोधन भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि साधु-संत गुलाब के कोमल और सुगंधित फूल के समान होते हैं—जहां भी जाते हैं, वहां ज्ञान, धर्म, प्रेम, भक्ति और सेवा की सुगंध समान भाव से वितरित करते हैं। जिस प्रकार गुलाब का पुष्प बिना किसी भेदभाव के सभी को अपनी सुगंध देता है, उसी प्रकार साधु-संत, अमीर-गरीब, शिक्षित-अनभिज्ञ, बड़े-छोटे सभी को समभाव से कृपा, आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। डॉ. वरुण मुनि जी ने कहा कि संतों का प्रत्येक कदम लोक-कल्याणकारी होता है। वे नगर-नगर, ग्राम-ग्राम जाकर प्रवचन, सत्संग और धर्मप्रचार के माध्यम से प्रभु-भक्ति, नैतिकता, संयम और जीवन-मूल्यों की अमूल्य शिक्षा जन-जन तक ...
सेवा, श्रद्धा और समर्पण का अनंत प्रकाश भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में आज समाज के समक्ष सेवा, समर्पण, विनम्रता और धर्म–उत्थान का अत्यंत प्रेरणादायी संदेश प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जब कोई परिवार धर्म के प्रति श्रद्धा, समाज के प्रति करुणा और मानवता के प्रति संवेदनशीलता से कार्य करता है, तब उसकी सेवा स्वयं इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित हो जाती है। ऐसा ही अनुपम उदाहरण बेंगलुरु का सुराणा परिवार है, जिसने उद्योग, व्यापार, शिक्षा, चिकित्सा और धार्मिक सेवा—सभी क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी है। चेन्नई या हैदराबाद की ओर जाने वाले राजमार्ग पर स्थित जैन तीर्थ सुशील धाम अत्यंत शांत, सौम्य और दिव्य वातावरण से परिपूर्ण धार्मिक केंद्र है। यह धाम चिंतामणि भगवान पार्श्वनाथ तथा अनेक तीर्थंकर भगवंतों के भव्य मंदिरों से अलंकृत है। जिन शासन अधिष्ठायक देवी–देवताओं के अनेक दि...
चेन्नई में साहुकारपेट के बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में संघ समर्पण दिवस मनाया गया | वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्रजी कांकरिया ने स्वाध्यायीगण को संबोधित करते हुए कहा कि सामायिक स्वाध्याय के प्रबल प्रेरक इतिहास मार्तण्ड बाल ब्रह्मचारी आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हस्तीमलजी म.सा की अनमोल कृति जैन धर्म का मौलिक इतिहास में वर्णित किया हैं कि भगवान महावीर स्वामी के छपनवें पट्टधर आचार्य श्री गजसेनजी महाराज के आचार्यकाल में जिनशासन के महान प्रभावक महादानी श्री जगड़ू शाह हुए | दानवीर सुश्रावक जगड़ू शाह ने विक्रम संवत 1315 से त्रिवार्षिक दुष्काल के समय देश भर में 112 भोजनशालाएँ खोलकर अकालग्रस्त जनसाधारण के लिए मानवता की मिसाल स्थापित करते हुए अभूतपूर्व सेवाएं की | प्रतिदिन प्रातःकाल पर्दे के पीछे रहकर दान लेने वाले का मुंह देखे बिना वे मुक्त हाथों से दान देते थे | राजा गुर्जरराज बीस...
16 नवम्बर 2025 रविवार स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम में रत्नवंश के अष्ठम पट्टधर आचार्य भगवन्त पूज्यश्री हीराचन्द्रजी के सुशिष्य मधुर व्याख्यानी श्रदेय श्री गौतममुनिजी म.सा के प्रवचन स्व का ज्ञान स्व की पहचान पर वरिष्ठ स्वाध्यायी आर वीरेन्द्र कांकरिया द्वारा स्वाध्याय- अनुप्रेक्षा की गई | श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने बताया कि वरिष्ठ स्वाध्यायी बन्धुवर श्री वीरेन्द्रजी कांकरिया ने श्रदेय श्री गौतममुनिजी म.सा के द्वारा प्रवचन में फरमाये गए दशवैकालिक सूत्र के प्रथम अध्ययन की पहली गाथा,धर्म भावना,प्रभु एवं प्रभु के वचनों व अपनी आत्मा के प्रति सच्चे समर्पण भावों का विस्तृत उल्लेख किया | उन्होंने स्वाध्यायी बन्धुवर के प्रति साधुवाद ज्ञापित करते हुए बताया कि रत्न स्वर्ण महोत्सव के अंतर्गत साप्ताहिक स्वाध्याय अनुप्रेक्षा कार्यक्रम मे...
सुशील धाम में विराजमान भारत गौरव डॉ. वरुण मुनि जी महाराज ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में जीवन के मूल तत्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार में संचित की गई धन-दौलत, पद, प्रतिष्ठा और भौतिक साधन मनुष्य के साथ नहीं जाते, परंतु प्रभु भक्ति से विकसित हुई आत्मिक शक्ति, सद्गुण और पुण्य ही जीव का वास्तविक सहारा बनते हैं। महाराजश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जन्म बड़ा दुर्लभ है और इसका सर्वोत्तम उपयोग तभी है जब हम अपने कर्मों को पवित्र करें, मन को निर्मल बनाएं और प्रभु के चरणों में स्थिर भक्ति स्थापित करें। उन्होंने कहा कि—“धन जीवन को सुविधा दे सकता है, परंतु भक्ति आत्मा को शांति, स्थिरता और मोक्ष का मार्ग प्रदान करती है। ”उन्होंने आगे कहा कि संसार में देखा जाता है कि लोग संपत्ति और संग्रह में तो बहुत समय व्यतीत करते हैं, किंतु आत्मा के कल्याण की ओर ध्यान नहीं देते। जबकि ...