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मन के बिना सिर्फ वचन काया से तीव्र कर्मबंध नही होता

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 6️⃣6️⃣ 🧘🏼‍♂️ ⚡ मन के बिना सिर्फ वचन काया से तीव्र कर्मबंध नही होता.! ♦️ *वचन,* *काया के बिना,* *सिर्फ अकेला मन* *अतितीव्र कर्मबंध हेतु समर्थ हैं.!* 💥 विवेकहीन जीव के लिए तो मनोनिग्रह दुष्कर ही है लेकिन निकट भव मोक्षगामी एवं विवेक संपन्न के लिए भी मन का नियंत्रण मुश्किल हैं.! 🤔 दुर्गति एवं संसार के मूलरूप ऐसा कोई दुख नहीं है जिसका कारण मन न हो.! 🏴 मन, पवन एवं धजा से भी अधिक चंचल हैं.! ✅ समस्त धर्माचरणो का एक ही उद्देश्य है मन का निग्रह करना.! 🪔 *जिस स्थान,* *व्यक्ति के संग से,* *मन बिगड़े ऐसे व्यक्ति* *स्थान को छोड़ देना चाहिए.!* *_📒श्री मनोनिग्रह कुलकम्_*   🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर ...

स्वाध्याय मन शांती एवं पुण्य की चाबी

स्वाध्याय मन शांती एवं पुण्य की चाबी ! अतित में नही वर्तमान मे जिना सिखों- साध्वी डॉ. राज श्री जी म. सा. आज आकुर्डी स्थानक भवन मे कोथरुड जैन श्रावक संघ का महिला मंडल दर्शनार्थ एवं प्रार्थना हेतु सुबह 6.45 बजे आया ! इस अवसर पर उद् भोदन में डॉ. राज श्री जी म. सा. नीयमीत रुपसे स्वाध्याय करने का एहलान करते हुये घड़ी मे लगे तीन कमेंटों का उदाहरण देते हुये सेकंद कॉंटे की गती जैसा बचपन शीघ्र गती से गुजर जाता है, मिनिट कॉंटे समान जवानी गुज़र जाती हैं और हर एक घंटे मे आगे बढ़ने वाला कॉंटा धिमी गतीसे हमारा बुढ़ापा बिताता है ! हमें उसका इंतज़ार न करते नियमित रुपसे बचपन सेही धर्म आराधना करनी चाहिएँ! वह पुण्य की पुंजि है ! इस अवसर पर आयोजक कविता जी गोठी को श्री संघ द्वारा विश्वस्त ज्योति खिंवसरा ने सन्मानित किया! लुधियाना से जैन अमर परिवार के मुखियॉं वयोव्रुध्द सेनानी कस्तुरीलालजी एवं माताजी कमलादेवी अ...

तेरापंथ जैन विद्यालय, पट्टालम ने मनाया शिक्षक दिवस

Sagevaani.com /पट्टालम, चेन्नई: तेरापंथ जैन विद्यालय पट्टालम में मंगलवार को शिक्षक दिवस मनाया गया।  कार्यक्रम का शुभारंभ ईश- वंदना से किया गया। प्रधानाचार्या श्रीमती आशा क्रिस्टी ने विद्यालय कार्यकारिणी के सदस्यों का स्वागत किया एवं शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में अपने विचार व्यक्त किये। इसके पश्चात वरिष्ठ शिक्षकों ने अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। ट्रस्ट के चेयरमैन श्री गौतमचंद बोहरा में अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यालय के शिक्षकों के सेवा कार्य की सराहना की। महासंवाददाता श्री संजय भंसाली ने शिक्षक दिवस पर प्रेरणादायी विचार व्यक्त करते हुए बताया कि शिक्षकों को कैसा होना चाहिए। ट्रस्ट के महामंत्री श्री रेख धोका ने अपने भाव प्रकट करते हुए सभी शिक्षकों को बधाईयाँ दी एवं आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंध मंडल से श्री मेघराज जी लुणावत, श्री कमलेश नाहर, श्री प्रमोद गादिया भी उपस्थित थे, जिन...

द्रव्य के प्रकार

क्रमांक – 7 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹सत् (द्रव्य) के प्रकार* *👉 द्रव्य या तत्त्व कितने हैं? इस प्रश्न का उत्तर विभिन्न ग्रंथों में विविध रूपों में दिया गया है। जहाँ तक द्रव्य सामान्य का प्रश्न है, सब एक हैं। वहाँ किसी प्रकार की भेद-कल्पना उत्पन्न ही नहीं होती। जो सत् है, वही द्रव्य है और वही तत्त्व है।* *यदि हम द्वैत दृष्टि से देखें तो द्रव्य को दो रूपों में देख सकते हैं। ये दो रूप हैं – जीव और अजीव। चैतन्य लक्षण वाले जितने भी द्रव्य विशेष हैं, वे सब जीव विभाग के अन्तर्गत आ जाते हैं। जिनमें चैतन्य नहीं है, वे सभी द्रव्य विशेष अजीव विभाग के अन्तर्गत आ जाते हैं।* *जीव और अजीव के अन्य भेद करने पर द्रव्य के छः भेद भी हो जाते हैं। वे हैं – धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय, आकाशास्तिकाय, काल, पुद्गलास्तिकाय और जीवास्तिकाय। इनमें जीवास्तिकाय जीव विभाग में तथा शेष पांच अजीव विभाग क...

सुर्योदयालाही अनन्य साधारण महत्व-साध्वी प.पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना : सुर्योदयाला अनन्य साधारण असे महत्व आहे. पूर्वी लोक सुर्योदयापूर्वी जेवायचे आणि सुर्यास्तानंतर जेवण सोडून देत असत, असा हितोपदेश संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. व अन्य काही साध्वींची याप्रसंगी उपस्थिती होती. आज संघामध्ये विविध प्रकारचा जाप करण्यात आला. श्रावक- श्राविकांना उभे राहून चारही दिशांना वळण्याचे सांगण्यात आले. पुढे बोलतांना संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. म्हणाल्या की, खरे तर सिंह राशीच्या लोकांना सुर्याचे खूप वेड आहे, असे म्हटले तर ते वावगे ठरणार नाही. सिंह राशीचा स्वामी आहे सुर्यदेव! सुर्याचं महत्व काय आहे? आपण सु...

अनित्य का अर्थ है क्षणभंगुर या हमेशा बदलने वाला

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक में साध्वी विनित प्रज्ञा ने अनित्य भावना को समझाते हुए कहा अनित्य का अर्थ है क्षणभंगुर या हमेशा बदलने वाला। अनित्य भावना हमें यह एहसास कराती है कि इस दुनिया में हमारा भौतिक शरीर, यौवन, सौंदर्य, स्वास्थ्य, धन, कामुक सुख, प्रसिद्धि, पारिवारिक संबंध आदि सब कुछ अस्थायी है और एक दिन नष्ट हो जाएगा। इन क्षणभंगुर चीजों से लगाव इनके खोने पर दुख देता है। हम अक्सर अपने दैनिक जीवन में इस नश्वरता का अनुभव करते हैं और उदास हो जाते हैं। यह अनित्यता सभी पर लागू होती है। जिस दिन भगवान राम को राजा बनाया जाना था, उसी दिन उनके जीवन में एक अजीब मोड़ आया। उनके पिता ने उन्हें 14साल के लिए वन जाने को कहा! राज्याभिषेक का उत्साह एक पल में उदासी और कयामत में बदल गया। साध्वी चंदनबाला ने कहा कोई भी कर्मों का फल प्राप्त किए बिना मुक्त नहीं हो सकता। कर्म के आगे किसी का जोर तथा रि...

समकित रहित जीव भी चलता फिरता मुर्दा है

*🌧️विंशत्यधिकं शतम्* *📚📚📚श्रुतप्रसादम्🌧️* 🌧️ 6️⃣5️⃣ ⚡ प्राण रहित देह को मुर्दा कहते है, वैसे ही समकित रहित जीव भी चलता फिरता मुर्दा है.! ❌ मुर्दा लोक में आदरपात्र नही है, *वैसे ही* *ये चल मुर्दा भी* *आध्यात्मिक क्षेत्र में* *अनादरणीय है…* *सम्मान पात्र नहीं है..!* समकित ही जीव का वैभव हैं, सम्मान है,भूषण है.! *_📔श्री भाव प्राभृत📔_*   🌷 *तत्त्वचिंतन:* *मार्गस्थ कृपानिधि* *सूरि जयन्तसेन चरण रज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर  

सब कुछ भूलना पर मां-बाप को कभी मत भूलना

मां बाप जिंदगी के पेड़ की जे पेड़ कितना ही बड़ा क्यों हो जाए कितना ही हरा भरा क्यों ना हो जाए जड़ काटने से हरा भरा नहीं हो सकताl जिन बच्चों की खुशियों के लिए एक बार अपनी मेहनत की पाई पाई हंसते-हंसते उन पर खर्च कर देता है वही बच्चे जब बाप की आंखें धुंधली हो जाती हैl तो उन्हें कटरा भर रोशनी देने से क्यों कतराते हैं? आज आप कोई यहां बैठे हैं जिनके साथ मां-बाप है पर कोई ऐसे हैं की जिनकी मां बाप नहीं चाहे मन से लड़ लेना बुलाना देना मन को डांट देना पर मां की कितनी अच्छी ममता कितनी हैl भोली भाली फिर भी वह थाली लेकर आती है कहती है बेटा खा ले म माही होती हैl धरती का भगवान मां बाप ही है इन मां बाप को कभी छोड़ना मत इनको कभी सताना मत पर आज इस कलयुग के बेटे अपनी मां-बाप को क्या क्या सुना जाते हैंl वह तो अपने दिलों से भी उनको निकाल दिया तो घर से निकाल दिया तो कौन सी बड़ी बात है साध्वी आगमश्री जी ने अपने ...

एसएस जैन सभा सिरसा ने करवाया भव्य जन्म व दीक्षा जयंती समारोह

बहुमंडल ने नाटक के माध्यम से कुसुम प्रभा म. सा. के जीवन पर डाला प्रकाश Sagevaani.com /सिरसा। एसएस जैन सभा की ओर से आत्म शुक्ल-शिव जन्म जयंती एवं कुसुम प्रभा म. सा. की दीक्षा जयंती पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महासाध्वी ज्ञान प्रभा म. सा. व मधुबाला म. सा. ठाणे-8 का पावन सान्निध्य रहा। कार्यक्रम में मक्खन लाल गोयल ने अध्यक्ष हरियाणा प्रांतीय तेरापंथ सभा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की और लीलावती जैन धर्मपत्नी स्व. अभयनंदन जैन ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का आगाज किया। इस मौके पर पद्मश्री अवार्ड व भाई कन्हैया आश्रम के संचालक स. गुरविंद्र सिंह व एडवोकेट संजीव जैन ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थिति दर्ज करवाई। कार्यक्रम में कुसुम प्रभा म. सा. के जीवन पर बहुमंडल द्वारा नाटक प्रस्तुत किया गया। इस मौके पर छोटे-छोटे बच्चों ने अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थिति का मन मोह लि...

भय मृत्यु से अधिक घातक है

*☀️प्रवचन वैभव☀️* 🌧️ 6️⃣4️⃣ 🌺 316) भय मृत्यु से अधिक घातक है.. क्योंकि इसके कारण शक्ति का विकास अवरुद्ध होता हैं.! 317) किसी के कषाय करने पर हम भी कषाय करें तो अनर्थदंड का दोष लगता है.! 218) संसार की सभी स्थितियों का Expiry date के साथ आगमन होता है, ये त्रैकालिक सत्य को समकिति साधक जानता है, इसलिए आर्तध्यान नही करता.! 319) दर्शनाचार अर्थात धर्म की विकास यात्रा..! 320) जहां वात्सल्य होता है वहां गिनती नहीं होती.! बनावट,दिखावा नही होता.! 🌧️ *प्रवचन प्रवाहक:* *सूरि जयन्तसेन चरणरज* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा.   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚* श्रीमुनिसुव्रतस्वामी नवग्रह जैनसंघ @ कोंडीतोप, चेन्नई महानगर

जीवन हे नेहमीच चांगल्या पध्दतीने जगले पाहिजे-साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

जालना: जीवन हे नेहमीच चांगल्या पध्दतीने जगले पाहिजे. खूप कठीण परिश्रमानंतर आपल्याला हा मानव जन्म मिळाला असून त्याचा सदुपयोग करुन घेतला पाहिजे, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा व अन्य काही साध्वींची याप्रसंगी उपस्थिती होती. पुढे बोलतांना साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, मानव हा जन्म उगीच आपल्याला प्राप्त झालेला नाही. त्याचा सदुपयोग आपण केला पाहिजे, करायला शिकले पाहिजे. आत्मा तर बनलो आहोत परंतू परमात्मा कधी बनणार? याचा विचार आपण केला पाहिजे. संसार तर नेहमीच आहे. परंतू हे जीवन नेहमीच मिळणारे नाही. म्हणूनच त्याचा सदुपयोग करायला हवा. आपण आतापर्यंत अनेक साधू- साध्वींचे प्रवचन ऐकले ...

मोह माया में फंसकर मनुष्य परमात्मा को भूल जाता है

वीरपता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक में साध्वी आनंद प्रभा ने कहा जिस तरह हमारे परिवार के सदस्यों के प्रति हमारा फर्ज होता है उसी तरह ही परमात्मा के प्रति भी हमारा फर्ज बनता है जिसने इस दुनिया में हमारे को भेजा। मोह माया में फंसकर मनुष्य परमात्मा को भूल जाता है जिस कारण उसे दुखों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि दुख आने पर फिर परमात्मा की याद आती है अगर हम नित्य प्रति भगवान का सिमरन करें तो हमें किसी तरह की विपदा का सामना नहीं करना पड़ेगा। अगर भगवान के भक्तों पर विपदा आती भी है तो भगवान स्वयं अपने भक्तों की रक्षा को दौड़े चले आते हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन में नाम सिमरन की कमाई करनी चाहिए जो लोक में भी काम आती है और परलोक में भी काम आती है। मीडिया प्रभारी प्रकाश चंद्र बडोला वह मुकेश सिरोहियां ने बताया कि साध्वी चंदन बाला एव साध्वी विनित प्रज्ञा ने भी अपने उद्बोधन श्रावक और...

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