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जीवन जगायचे तर ते गौतममुनीसारखे जगावे-साध्वी प.पू. सत्यसाधना म. सा.

Sagevaani.com /जालना : पुण्यकर्म पदरात पाडू घ्यायच ेअसेल तर जीवन जगायचे तर ते गौतममुनीसारखे जगावे, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. प्रवचनाच्या प्रारंभीच छोट्या साध्वींनी गौतममुनींवर गायिलेल्या गितावर आधारीत पुढे बोलतांना संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. म्हणाल्या की, आताच आपण सर्वांनी छोट्या साध्वींचेप्रवचन ऐकले आहे. त्यांनी अत्यंत चांगले असे प्रवचन सांगितले आहे. संसारात राहुनही आपण प्रभूंची आराधना करु शकतो, हेच गौतममुनींनी शिकवले आहे. आपण सामायिक करतो. पण कसे करतो, सामायिक करतांना नियमाचे पालन हे केले पाहिजे, असे सांगून त्यांनी गौतममुनीबद्दल इंत्यभूत माहिती दिली. याप्रसंगी सभा मंडपात अनेक श्रावक- श्राविकांसह संघाच्या पदाधिकार्‍याची मोठी उपस...

पुण्य तत्त्व

क्रमांक – 27 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 पुण्य तत्त्व* *👉 नवतत्त्वों में जीव और अजीव के बाद तीसरा स्थान पुण्य का है। ‘शुभं कर्म पुण्यम्’ शुभ कर्मों को पुण्य कहा गया है। वास्तविक परिभाषा के अनुसार सात वेदनीय आदि शुभ कर्मों को पुण्य कहा जाता है। पहले बंधे हुए शुभ कार्य जब शुभ फल देते हैं तो वे पुण्य कहलाते है। किंतु कारण में कार्य का उपचार होने से जिन-जिन निमित्तों से शुभकर्म का बंध होता है, उन्हें भी पुण्य माना जाता है। जैनदर्शन में पुण्य को हो भी बन्धनकारी माना गया है। आचार्य भिक्षु के अनुसार पुण्य और पाप दोनों जंजीर हैं। दोनो बांधने का कार्य करते हैं। एक सोने की जंजीर है और दूसरी लोहे की पर दोनों बांधती ही हैं। पुण्य को सोने की...

जैसा पुरुषार्थ होगा वैसा परिणाम मिलेगा

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *युग प्रभावक कृपाप्राप्त* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 9️⃣0️⃣ 🌻 *_446)_* जैसा पुरुषार्थ होगा वैसा परिणाम मिलेगा.! *_447)_* क्रिया के माध्यम से योग नियंत्रित होते है, ज्ञान के माध्यम से योग सहयोगी बनते हैं.! *_448)_* अपने अंतर के प्रकाश को पहचानो.! *_449)_* देह की मृत्यु भले हो जावे लेकिन मार्ग से विचलित होकर प्रतिज्ञा तोड़कर धर्म की मृत्यु नही होने देता समकिती.! *_450)_* आत्म दर्शन से पर दर्शन छूट जाएगा.!   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*  

दुनिया घूमना आसान है लेकिन  मन को स्थिर करना बहोत कठिन हैं

*☀️प्रवचन वैभव☀️* *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *युग प्रभावक कृपाप्राप्त* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 8️⃣9️⃣ ♦️ *_441)_* दुनिया घूमना आसान है लेकिन मन को स्थिर करना बहोत कठिन हैं.! *_442)_* अज्ञानी दुख से, ज्ञानी दोष से दुखी.. *_443)_* श्रावक का लक्ष्य संयम है, साधवाचार के ज्ञान से प्राप्ति की लगनी बढ़ती है.! *_444)_* व्यसन से कभी टेंशन दूर नहीं होते.! *_445)_* घिसने से चंदन का गुण शीतलता प्रगट होती हैं जिसका एहसास व्यक्ति को तिलक लगाने से होता है वैसे ही साधना से आत्मा निखरता है.! *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*

आचार्यश्री हमीरमल म.सा की पुण्यतिथि सामायिक दिवस

चेन्नई आज शुक्रवार 18 अक्टूबर 2024 को आचार्यश्री हमीरमल म.सा की पुण्यतिथि सामायिक दिवस के रुप में स्वाध्याय भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ के तत्वावधान मे मनाई गई | धर्मसभा में श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने पूज्य आचार्यश्री हमीरमलजी म.सा के गुण स्मरण करते हुए कहा कि नागौर में श्री नगराजजी -ज्ञानकुमारीजी गांधी के यहां जन्मे हमीरमलजी के ऊपर से गयारह वर्ष की वय में ही पिताजी का साया उठ गया | अपनी मातुश्री के संग पीपाड़ शहर में ननिहाल में आपका लालन- पालन हुआ | रत्नवंशीय महासती श्री बरजूजी म.सा का संयोग मिलने पर आपकी मातुश्री को वैराग्य प्राप्त हुआ व आचार्यश्री रतनचंद्रजी म.सा के पास बर के समीप ही बिरांटिया ग्राम में अपने पुत्र हमीरमल को दीक्षित करने के पश्चात आचार्यश्री हस्तीमलजी म.सा की मातुश्री रूपादेवी की तरह आ...

उपाध्याय पु. श्री. पुष्करमुनीजी म.सा. का जन्मोत्सव

उपाध्याय पु. श्री. पुष्करमुनीजी म.सा. का जन्मोत्सव! आकुर्डी संघ में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन! आज आकुर्डी-निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे महासाध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. , डॉ. मेघाश्री जी म.सा. के निश्रा में गुरुदेव उपाध्याय पु. पुष्कर मुनीजी म.सा. के 115 वे जन्मोत्सव का आयोजन तीन दिवसीय कार्यक्रम के माध्यमसे किया गया है! यह जानकारी संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी ने दी! आज प्रथम दिवसीय कार्यक्रम “ पुष्कर प्रश्न मंच” साध्वी जिना ज्ञा श्री जी के माध्यमसे आयोजित किया गया! जिसमें दस समुह तीन तीन का ग्रुप कर प्रश्न मंच में सहभाग लिया! विविध धार्मिक प्रश्न मंच का यह सिलसिला तीन घंटे तक चला! प्रथम क्रमांकसे जिते तीन समुह को युवक मंडल द्वारा बक्षीस का वितरण हुआ! प्रथम समुह विजेताः मनिषा जी जैन, पल्लवी जी नहार, भुमिका जी रांका द्वितीय समुह विजेताः मंजु जी संचेती, स्मिता जी रांका, मनिषा जी लु...

ओली का समापन हुआ

“नवपद”आयंबील ओली का समापन! आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण में डॉ. राज श्री जी, डॉ. मेघा़श्री जी , साध्वी समिक्षा श्री जी साध्वी जिनाज्ञा श्री जी के निश्राय मे आयंबील ओली का समापन आज हुआ! 21 भाई बहनोने आयंबील ओली की आराधना की! बैठते उठते 36 आयंबील हुये! संपूर्ण आयंबील ओली के लाभार्थी बने श्रीमान दिलीपजी प्रसाद जी फिरोदिया. इस परिवार के औरसे आयंबील धारकोंको रजत मुद्रा द्वारा नवाज़ा गया! संपुर्ण आयंबील ओली के आराधक थे माधुरी भंसाली,साधना खिंवसरा, सरला गांधी, विजया जी कर्नावट,मंगलजी जैन, निताजी गांधी,ऑंचल रांका , पुजा भंसाली , प्रियंका ललवाणी , पुर्वा चोरडीया, चेतना मुथा, प्रिया फिरोदिया, लिना ओस्तवाल। गुलाबबाई मुथा, मनिषा बेदमुथा, राजेंन्द्र जैन, हर्षद भंसाली, मंजु संचेती, आदि। आयंबील के पुरे व्यवस्था का सुचारु रुपसे नियोजन जवाहरजी मुंथा, ज्योति खिंवसरा, साधना खिंवसरा, मनिषा जैन ...

पुद्गल द्रव्य चार प्रकार का माना गया है

क्रमांक – 26 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 अजीव तत्त्व* *✨अजीव के प्रकार* *♦️पुद्गलास्तिकाय* *⚡पुद्गल द्रव्य चार प्रकार का माना गया है -1. स्कन्ध, 2. देश, 3. प्रदेश, 4. परमाणु।* *〽️3. प्रदेश –* *👉 परमाणु जितने वस्तु के भाग को प्रदेश कहते हैं। परमाणु और प्रदेश का माप बराबर होता है। परमाणु जब तक स्कन्धगत है, तब तक वह प्रदेश कहलाता है। दूसरे शब्दों में स्कन्ध का सूक्ष्मतम भाग, जब तक वह स्कन्ध के साथ जुड़ा हुआ है, प्रदेश कहलाता है। पर वही सूक्ष्मतम भाग जब स्कन्ध से अलग हो जाता है, तब उसे परमाणु कहा जाता है। उदाहरणतः एक वस्त्र हजारों-हजारों तंतुओं से बना एक स्कन्ध है। कल्पना से प्रत्येक तंतु को एक प्रदेश मान लें। इस प्रकार एक वस्त्र में हजार...

दर्शन यात्रा का आयोजन

आकुर्डी-निगडी-प्राधिकरण श्री.संघ द्वारा पुना संत दर्शन यात्रा का आयोजन! प्रथम चरण संत दर्शन यात्रा का महाराष्ट्र प्रवर्तिनी स्वर्गीय ज्ञानप्रभाजी महाराज साहब की सुशिष्याएं पुज्यनीय. पुष्पचुलाजी महाराज साहेब पुज्यनीय सुप्रियादर्शनाजी महाराज साहेब आदिठाणा 5 के दर्शन एवं मंगल आशिर्वाद लिये ! संघाध्यक्ष श्री पोपटलालजी ओस्तवाल द्वारा सुभाषजी ललवाणी को जन्मदिवस की बधाई देते हुये सन्मानीत किया गया! महासतीयो ने भी ललवाणी कुल नाते मामाजी इस नाते सुभाष जी के गुण विशेष बताते हुये शुभकामनाएँ प्रकट की! द्वितीय चरण पुष्कर-धाम पुज्यनीय सौरव मुनीजी, उपप्रवर्तक गौरवमुनीजी आदि ठाणा4 एवं महासाध्वी पुण्यस्मिताजी आदि ठाणा 3 का प्रवचन, तपस्वी पुज्यनीय. सक्षम मुनीजी के तप की अनुमोदना एवं मासखमण आराधक महावीर जी बेदमुथा का सन्मान! सुखसागर श्री संघ द्वारा अध्यंक्ष श्री पुखराज जी हिरण चातुर्मास समिती अध्यक्ष विवेक ज...

जीवनात आल्यानंतर तप हे केलेच पाहिजे-साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा.

Sagevaani.com /जालना: जीवनात आल्यानंतर तप हे केलेच पाहिजे. तप करणार्‍यांची अनुमोदना केली पाहिजे, त्यांना प्रोहत्सान दिले पाहिजे, त्याचे पुण्यकर्म हे आपल्यालाच लाभते, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. यावेळी विचारपीठावर संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा व अन्य काही साध्वींची याप्रसंगी उपस्थिती होती. नवकार मंत्राची महिमा अपरामपार या गितावर आधारीत पुढे बोलतांना साध्वी प.पू. हर्षप्रज्ञाजी म. सा. म्हणाल्या की, नवपद ओलीचा आजचा शेवटचा दिवस! प. पू. गुरु गणेशलालजी महाराजांनी जालन्यात ज्यावेळी प्लेगची साथ आली होती. त्यावेळी काय केले होते. हे आपणासर्वांना अवगत आहे.म्हणून जे कोणी तप करत असतील त्यांची अनुमोदना केली पाहिजे, त्यांना प्रोहत्सान दिले पाहिजे. न...

मन्त्र साधना से मिलती आत्मिक प्रसन्नता – साध्वी डॉ॰ गवेषणाश्री

 लोगस्स कल्प अनुष्ठान का हुआ आयोजन   Sagevaani.com /माधावरम, चेन्नई: आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी ने शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर जैन तेरापंथ नगर, माधावरम्, चेन्नई में लोगस्स कल्प का अनुष्ठान कराते हुए कहा कि लोगस्स शक्ति जागरण का एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली प्रयोग है। यह अत्यधिक गंभीर और अनेक उत्तम गुणों से युक्त स्तोत्र है। इस पाठ में चौबीस तीर्थकरों की स्तुति की गई है। जिनकी स्तवना से सहज ही कर्मों की निर्जरा होती है और पवित्रता का विकास होता है। साधक इस लोगस्स की साधना से अपनी आत्मा का उत्कर्ष करते हैं।  साध्वीश्री ने आगे कहा कि इस मंत्र साधना के प्रयोग के अंतर्गत भावशुद्धि, लेश्या विशुद्धि और आत्मिक प्रसन्नता की अनुभूति होती है।  साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने कहा कि वैदिक संस्कृति के अनुसार आज चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है। अनेक भाई-बहन चन्द...

पुद्गल द्रव्य चार प्रकार का माना गया है

क्रमांक – 25 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 अजीव तत्त्व* *✨अजीव के प्रकार* *♦️पुद्गलास्तिकाय* *⚡पुद्गल द्रव्य चार प्रकार का माना गया है -1. स्कन्ध, 2. देश, 3. प्रदेश, 4. परमाणु।* *〽️1. स्कन्ध –* *👉 स्कन्ध एक इकाई है। दो से लेकर अनन्त परमाणुओं के समूह को स्कन्ध कहते हैं। दो परमाणुओं के मिलने से द्विप्रदेशी स्कन्ध बनता है। दस परमाणुओं के मिलने से दसप्रदेशी स्कन्ध बनता है। संख्येय परमाणुओं के मिलने से संख्येय प्रदेशी, असंख्येय परमाणुओं के मिलने से असंख्येय प्रदेशी तथा अनन्त परमाणुओं के मिलने से अनन्तप्रदेशी स्कन्ध बनते हैं। अनन्तानन्त प्रदेशी स्कन्ध ही हमारी दृष्टि के विषय बनते हैं। प्रदेशी स्कन्ध सूक्ष्म होने के कारण हमारी दृष्टि के हैं। स...

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