क्रमांक – 27 . *तत्त्व – दर्शन* *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 पुण्य तत्त्व* *👉 नवतत्त्वों में जीव और अजीव के बाद तीसरा स्थान पुण्य का है। ‘शुभं कर्म पुण्यम्’ शुभ कर्मों को पुण्य कहा गया है। वास्तविक परिभाषा के अनुसार सात वेदनीय आदि शुभ कर्मों को पुण्य कहा जाता है। पहले बंधे हुए शुभ कार्य जब शुभ फल देते हैं तो वे पुण्य कहलाते है। किंतु कारण में कार्य का उपचार होने से जिन-जिन निमित्तों से शुभकर्म का बंध होता है, उन्हें भी पुण्य माना जाता है। जैनदर्शन में पुण्य को हो भी बन्धनकारी माना गया है। आचार्य भिक्षु के अनुसार पुण्य और पाप दोनों जंजीर हैं। दोनो बांधने का कार्य करते हैं। एक सोने की जंजीर है और दूसरी लोहे की पर दोनों बांधती ही हैं। पुण्य को सोने की...
क्रमांक – 26 . *तत्त्व – दर्शन* *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 अजीव तत्त्व* *✨अजीव के प्रकार* *♦️पुद्गलास्तिकाय* *⚡पुद्गल द्रव्य चार प्रकार का माना गया है -1. स्कन्ध, 2. देश, 3. प्रदेश, 4. परमाणु।* *〽️3. प्रदेश –* *👉 परमाणु जितने वस्तु के भाग को प्रदेश कहते हैं। परमाणु और प्रदेश का माप बराबर होता है। परमाणु जब तक स्कन्धगत है, तब तक वह प्रदेश कहलाता है। दूसरे शब्दों में स्कन्ध का सूक्ष्मतम भाग, जब तक वह स्कन्ध के साथ जुड़ा हुआ है, प्रदेश कहलाता है। पर वही सूक्ष्मतम भाग जब स्कन्ध से अलग हो जाता है, तब उसे परमाणु कहा जाता है। उदाहरणतः एक वस्त्र हजारों-हजारों तंतुओं से बना एक स्कन्ध है। कल्पना से प्रत्येक तंतु को एक प्रदेश मान लें। इस प्रकार एक वस्त्र में हजार...
क्रमांक – 25 . *तत्त्व – दर्शन* *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 अजीव तत्त्व* *✨अजीव के प्रकार* *♦️पुद्गलास्तिकाय* *⚡पुद्गल द्रव्य चार प्रकार का माना गया है -1. स्कन्ध, 2. देश, 3. प्रदेश, 4. परमाणु।* *〽️1. स्कन्ध –* *👉 स्कन्ध एक इकाई है। दो से लेकर अनन्त परमाणुओं के समूह को स्कन्ध कहते हैं। दो परमाणुओं के मिलने से द्विप्रदेशी स्कन्ध बनता है। दस परमाणुओं के मिलने से दसप्रदेशी स्कन्ध बनता है। संख्येय परमाणुओं के मिलने से संख्येय प्रदेशी, असंख्येय परमाणुओं के मिलने से असंख्येय प्रदेशी तथा अनन्त परमाणुओं के मिलने से अनन्तप्रदेशी स्कन्ध बनते हैं। अनन्तानन्त प्रदेशी स्कन्ध ही हमारी दृष्टि के विषय बनते हैं। प्रदेशी स्कन्ध सूक्ष्म होने के कारण हमारी दृष्टि के हैं। स...