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मेधावी छात्र सम्मान समारोह समायोजित 

Sagevaani.com /चेन्नई: आचार्य श्री महाश्रमणजी के शिष्य मुनि श्री हिमांशुकुमार जी के सान्निध्य में, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम, चेन्नई द्वारा रविवार को 10वीं और 12वीं कक्षा के मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान समारोह तेरापंथ भवन, साहूकारपेट, चेन्नई में आयोजित किया गया।  नमस्कार महामंत्र से शुरुआत कार्यक्रम में मुनि श्री हिमांशुकुमारजी और मुनि श्री हेमन्तकुमारजी ने ‘मैनेज योर टैलंट’ विषय पर ज्ञानवर्धक प्रेरणा प्राथेय प्रदान किया।  मेधावी छात्र सम्मान समारोह के संयोजक श्री सुनील बाफना ने कार्यक्रम का संचालन किया और टीपीएफ की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी, जिसमें समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को आगे लाने के लिए ‘मेधावी छात्र सम्मान समारोह’ का आयोजन भी शामिल है।  टीपीएफ अध्यक्षा श्रीमती बबीता चोपड़ा ने छात्रों, अभिभावकों और दर्शकों का स्वागत किया और उन्हें आगे बढ़ने और...

अण्णा हज़ारे जी से आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी एवं विश्वस्त मंडल द्वारा सदिच्छा भेंट

ज्येष्ठ समाज सेवी पद्मविभुषण श्री अण्णा हज़ारे जी से आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघाध्यक्ष सुभाषजी ललवाणी एवं विश्वस्त मंडल द्वारा सदिच्छा भेंट! आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ का विश्वस्त मंडल कल उपप्रवर्तिनी, महाराष्ट्र सौरभ,पु. चंद्रकलाश्री जी म.सा., क्रांतिकारी वाणी के जादुगार पु. स्नेहाश्री जी म.सा.,मधुर गायिका श्रुतप्रज्ञाश्री जी म.सा. आदिठाणा 3 का दर्शन, प्रवचन का लाभ लेते हुये सन 2025 का चातुर्मास आकुर्डी श्री क्षेत्र को मिले यह बिनती संघ द्वारा पुर्वाध्यक्ष जवाहरजी मुथा ने विश्वस्तो द्वारा रखी! पु . चंद्रकला श्री जी ने अनुकूलता दर्शाते महाराष्ट्र प्रवर्तक श्री जी एवं नवकार साधक पु. तारक ऋषिजी के आज्ञा पश्चात जयकारा करेंगे इस प्रकार आश्वस्त किया! इस अवसरपर पाथर्डी श्री संघ के अध्यक्ष सुभाषजी चोरडीया, महामंत्री सुरेश जी गुगळे, कोषाध्यक्ष आनंद जी चोरडीया उपस्थित थे! महाराष्ट्र...

पुण्य तत्त्व

क्रमांक – 29 . *तत्त्व – दर्शन*  *🔹 तत्त्व वर्गीकरण या तत्त्व के प्रकार* *👉जैन दर्शन में नवतत्त्व माने गये हैं – जीव, अजीव, पुण्य, पाप, आस्रव, संवर, निर्जरा, बन्ध, मोक्ष।* *🔅 पुण्य तत्त्व* *पुण्य के नौ भेद मुनि को लक्ष्य कर किये गये हैं, ऐसा कहा जा सकता है। मुनि को अन्न-पान आदि की आवश्यकता होती है अतः अन्न पुण्य, पान पुण्य आदि कहा गया है। मुनि को गाय-भैंस और सोना-चांदी आदि की आवश्यकता नहीं होती है। अतः गाय पुण्य, भैंस पुण्य, सोना पुण्य, चांदी पुण्य आदि नहीं कहा गया है। साधु की साधना में सहयोगी बनना श्रावक जीवन का अंग है। साधु को संयमानुकूल अन्न-पान आदि का दान देना, दान देने के संबंध में मन, वचन तथा काया की प्रवृत्ति शुद्ध रखना और साधु को नमस्कार करना श्रावकाचार है।* *धर्म के बिना पुण्य नहीं होता है। पुण्य का बंध सत्प्रवृत्ति से होता है और सत्प्रवृत्ति मोक्ष का उपाय है। जो...

प्रभू महावीरजींनी अखंड देसना केली-साध्वी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा.

जालना: प्रभू महावीरांनी अखंडपणे देसना का केली. तर आपण का करु शकत नाहीत, आपणही प्रभूंसारखी देसना केली पाहिजे,असा हितोपदेश संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. तत्पूर्वी प. पू. साध्वी हर्षप्रज्ञाजींनी याच विषयावर मार्गदर्शन केले. संथारा प्रेरिका उपप्रवर्तीनी प. पू. सत्यसाधनाजी म. सा. म्हणाल्या की, हमारी आत्मा समक्य दृष्टी जरुर कर सकती है! क्यों ना हम करे। प्रभू महावीरांनी प्रथम चातुर्मास केला. आणि त्यांचा शेवटचा चातुर्मास होता तो देखील कुठे केला. हे आपणासर्वांना अवगत आहे. परंतू सांगायचं तात्पर्य हेच की ते जे करतात आपण का करु शकत नाहीत. आपण सुद्दा करु शकतो. परंतू ती इच्छा शक्ती आपल्यात नसते म्हणून त्यांच्यासारखं कार्य आपणाकडून होत नाही,आपण ते करु शकत नाहीत. प्र...

लोक संज्ञा को पुष्ट करने में समय बरबाद करना अधःपतन का मार्ग है

*☀️प्रवचन वैभव☀️*   *🪷 सद् उपदेशक:🪷* *युग प्रभावक कृपाप्राप्त* मुनि श्रीवैभवरत्नविजयजी म.सा. ✒️ 9️⃣1️⃣ ⚜️ *_451)_* मान सम्मान, लोक संज्ञा को पुष्ट करने में समय बरबाद करना अधःपतन का मार्ग है.! *_452)_* तत्त्वनिर्णय के बिना आर्त रौद्र से मुक्ति असंभव हैं.! *_453)_* लोगो को भ्रमित करके उन्मार्ग में ले जानेवाला स्वयं भी उन्मार्गी बनता है.! *_454)_* जहां विवेक होगा वहां मूर्खता नही रहेगी.! *_455)_* अध्यात्म पथ पर सफल यात्रा करनी है तो धर्मकथा सत्संग सरल उपाय हैं.!   *🦚श्रुतार्थ वर्षावास 2024🦚*  

उपाध्याय पु. पुष्करमुनीजी म.सा. का 115 वाँ जन्मोत्सव आध्यात्मिक रुपसे संप्पन्न

“साधना के शिखर” उपाध्याय पु. पुष्करमुनीजी म.सा. का 115 वाँ जन्मोत्सव आध्यात्मिक रुपसे संप्पन्न! पुष्कर नाम पवित्र है! अहंकार विरहीत जीवन के साक्षात भगवन! चलते फिरते कल्पव्रुक्ष समान थे !- महासाध्वी डॉ. राज श्री जी म.सा. आज आकुर्डी स्थानक भवन में साधना के शिखर पुरुष श्रध्येय उपाध्याय श्री जी पुज्यनीय पुष्कर मुनीजी महाराज साहब का जन्मोत्सव बड़े धुमधाम से जप, तप, धर्म आराधना, सामायिक एवं गुणानुवाद द्वारा मनाया गया! साध्वी जिनाज्ञा श्री जी ने “ मेरा पुष्कर गुरुसा दरबार बड़ा प्यारा है” इस भजन से अपनी बात रखते समय गुलाब पिसा जाता है, सुवासिक परफ़्यूम के लिए, दीपक जलाया जाता हैl जगत-प्रकाश के लिए, धरती में बीज बोया जाता है अनाज के लिए उसी प्रकार संत की श्रेष्ठता होती है सर्वस्व अर्पण करनेके लिए! जीवन की चार व्यवस्था का ज़िक्र किया! मालमस्त ( पैसा,अहंकार, अकड़) , ढालमस्त ( मधुर वाणी), चालमस्त ( शि...

बालिकाएँ महिलाएं बने स्वयं आत्मविश्वासी : डॉ साध्वी गवेषणाश्री

Sagevaani.com /माधावरम्, चेन्नई: श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ माधावरम ट्रस्ट, चेन्नई के तत्वावधान में, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री गवेषणाश्रीजी ठाणा 4 के सान्निध्य में, “कैसे करें आत्मरक्षा” नामक एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।   इस कार्यशाला में कराटे और जुडो चैंपियन श्रीमती प्रिया संचेती ट्रेनर थीं। उन्होने आत्मरक्षा के बहुत ही उपयोगी और सरल टिप्स बताए, जो सभी के लिए लाभदायक रहे।   साध्वी श्री डॉ गवेषणाश्रीजी ने कहा कि समय-समय पर ऐसी कार्यशालाएँ समाज में होनी चाहिए, जिससे बालिकाओं और महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़े। श्रीमती प्रिया संचेती भी इसी तरह अपनी सेवा देती रहें।  साध्वी श्री मयंकप्रभाजी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथ माधावरम ट्रस्ट द्वारा श्रीमती प्रिया संचेती का अभिनंदन किया गया।

ओपन नेट एग्जाम – 109

  *(SHRUT AMRUT)* 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞   ✍🏻 *परीक्षा देने हेतु क्लिक करे -* https://forms.gle/GUPYfMz6aD68ZRjGA   (कृपया फॉर्म में लिखी सूचना अवश्य पढ़े)   *इस वीडियो से प्रश्न के उत्तर खोजे -*   👉🏻 *श्रुतप्रभावक प्रवचनदाता* 👈🏻 *मुनिराजश्री वैभवरत्न विजयजी म.सा.*   📖 *विषय – श्री अभिधान राजेन्द्र कोष*   🔖 पेपर भरने की अंतिम दिनांक – 26/10/2024 रात्रि 9 बजे तक 🔖 परिणाम घोषणा दिनांक – 27/10/2024 रात्रि 9 बजे   🙏🏻🙏🏻 *: श्रुत बहुमान :* 🙏🏻🙏🏻 प्रथम विजेता – 5000, द्वितीय विजेता – 2000, तृतीय विजेता – 1500, चतुर्थ विजेता – 1000, पंचम विजेता – 500   👌🏻👌🏻 *लाभार्थी परिवार :* 👌🏻👌🏻 *स्वर्गीय शा. जयवंतराजजी पुखराजजी वाणीगोता* *स्वर्गीय शा. हीरचंदजी पुखराजजी वाणीगोता* *(बीजापुर)* 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻   ग्रुप में जुड़ना अनिव...

श्रावक के 14 नियम

🔆 *श्रावक के १४ नियम जो हमें रोज़ लेने चाहिये …..* *१. सचित्त :- सचित्त अर्थात जिस पदार्थ में जीव राशि है ।* इसमें सचित पदार्थो के सेवन की दैनिक मर्यादा रखी जाती है।जैसे कच्ची हरी सब्जी , कच्चे फल , नमक , कच्चा पानी, कच्चा पूरा धान आदि का सम्पूर्ण त्याग अथवा इतनी संख्या से अधिक उपयोग नही करूँगा ऐसा नियम करना । ( 3, 5 ,7 आदि ) *२ . द्रव्य :- खाने – पीने की वस्तु / द्रव्य की प्रतिदिन मर्यादा रखनी है , इसमें पदार्थो की संख्या का निश्चय किया जाता है ।* भिन्न भिन्न नाम व स्वाद वाली वस्तुएं इतनी संख्या से अधिक खाने के काम में नहीं लूँगा । जैसे खिचड़ी , रोटी, दाल, शाक, मिठाई, पापड़, चावल आदि की मर्यादा करना । (11, 15, 21 आदि ) *३ . विगय :-* : – प्रतिदिन तेल घी दूध दही शक्कर / गुड तथा घी या तेल में तली हुयी वस्तु ये छः विगय है । इनका यथाशक्ति त्याग करना या रोज कम से कम 1 विगय त्याग करना ।...

इच्छाओं के अल्पीकरण से व्यक्ति रहता सुखी : मुनि हिमांशुकुमार

Sagevaani.com /साहूकारपेट, चेन्नई : सागर में लहरें निरंतर गतिशील रहती हैं। उसी प्रकार, व्यक्ति की इच्छाएँ भी निरंतर बढ़ती रहती हैं और वह उन्हीं इच्छाओं की पूर्ति में लगा रहता है। यही लोभ है। उपरोक्त विचार तेरापंथ सभा भवन, साहूकारपेट में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि हिमांशुकुमारजी कहे।  ¤ जितनी अधिक इच्छाएँ, उतना ही अधिक तनाव  मुनिश्री ने आगे कहा कि लोभ के परिणामस्वरूप व्यक्ति का हृदय कमजोर रहता है। उसकी जठराग्नि और पाचन शक्ति कमजोर होती है। वह सदैव इस चिंता में रहता है कि पैसा आ गया तो उसे कहाँ रखें? धन के सुरक्षा की भी चिंता उसे सताती रहती है। किसी को दे दिया, तो वह पुन: आएगा या नहीं आएगा? उसकी भी चिंता उसे परेशान करती रहती है। लोभी व्यक्ति का हृदय क्रूर होता है। वह दूसरों का शोषण करता है और अन्याय भी करता रहता है। जिसके कारण वह दुर्गति को प्राप्त करता है। जितनी अधिक इच्छाएँ होती हैं,...

“गुरु पुष्कर” जन्मोत्सव के तीन दिवसीय कार्यक्रम जारी है

उपाध्याय श्री गुरु पुष्कर मुनीजी के जन्मोत्सव का द्वितीय दिवसीय समारोह जाप आराधना से संप्पन्न! आकुर्डी- निगडी- प्राधिकरण श्री संघ के प्रांगण मे आज “गुरु पुष्कर” जन्मोत्सव के तीन दिवसीय कार्यक्रम जारी है! आज डॉ. राज श्री जी डॉ. मेघाश्री जी आदि ठाणा चार के निश्रा मे आज नवकार महामंत्र का जाप, गुरु पुष्कर चालीसा, गुरु आरती का आयोजन किया गया था! 48 मिनीट के जाप में अनेक धर्म प्रेमी महानुभाव सम्मिलित हुये! पुना से पुष्कर धाम के विश्वस्त खिमराज जी भंडारी, अशोकजी सालेचा , आशिष जी झगडावत, श्रीमती कुसुमजी झगडावत आदि महानुभाव अपने परिवार सह उपस्थित थे! उसी प्रकार साधु संतो के विहार की सेवा देनेवाले पुना से रमेशजी बागमार, सपना जी छाजेड, जिया छाजेड आदि ने भी जापमे सहभाग लिया! पुना पुष्कर धाम के मुख्य विश्वस्त अशोकजी सालेचा ने गुरु पुष्कर मुनीजी के जीवनगाथा विस्तार से बतायी! आजकी प्रभावणा झगडावत परिवार ...

जीवनात विनय असला पाहिजे-साध्वी प.पू. गुरुछायाजी म. सा.

जालना : ज्याच्या जीवनात विनय नाही, तो मनुष्य प्राणी नाही. विनय असल्याने काय होते. ज्याच्याकडे विनयाची भावना आहे, काया आहे, तो प्राणी सातत्याने विजयात राहतो, म्हणूनच म्हटले आहे की, जीवनात विजय असला पाहिजे, असा हितोपदेश साध्वी प.पू. ुगुरुछायाजी म. सा. यांनी येथे बोलतांना दिला. तपोधाम परिसरातील गुरु गणेश सभा मंडपात चार्तुमासानिमित्त आयोजित प्रवचनात त्या बोलत होत्या. प. पू. गुरुछायाजी म. सा. म्हणाल्या की, आपण आपल्या जीवनात विनय उतरवला की नाही, हे माहित नाही. परंतू विनय असलाच पाहिजे. आता दिवाळी आली आहे. आपण आपले घर पूर्णपणे साफ करताल, परंतू आतून काय? आपल्या आत्म्याचे कपाट कचरा, जाळ्यांनी भरलेले आहे, ते कोण कधी साफ करणार! अगोदर ते साफ करा आणि नंतर वरवरचे घर! असे सांगून त्या म्हणाल्या की, सुर्य आहे म्हणून चमक आहे, मधुरता के कारण अमृत प्रिय है। शितलता के कारण चंद्रमा प्रिय है। विनय के कारण आनंद सब...

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