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भावनाओं के वाइब्रेशन सीधे हृदय को छूते हैं: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

परमात्मा के मार्ग का अंशत: अनुकरण करने वाला करता है दुनिया पर राज चेन्नई. अपने परिजनों के प्रति प्रेम, समर्पण, दया और करुणा की भावना रखें। भावनाओं के वाइब्रेशन सीधे हृदय को छूते हैं। डिस्टर्ब और डेवलप दोनों प्रभाव आपको आसपास के लोगों से मिलते हैं। भगवान महावीर ने कहा है कि कोई भी जीव जिनके साथ संपर्क में है, उनसे ही परमाणु या ऊर्जा ग्रहण करता है। इसमें संभल जाएं तो जीवन सफल हो जाएगा। कभी भी नकारात्मक शब्द और भावना न रखें। दूसरों को परेशान करने से पहले आप स्वयं परेशान हो जाएंगे। मंगलवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज का प्रवचन कार्यक्रम हुआ। उपाध्याय प्रवर ने विराधना के सूत्रों के बारे में बताते हुए कहा कि किस प्रकार यह होती है और इसके दुष्चक्र से कैसे बाहर निकला जाए। स्पर्श भी किसी को प्रताडि़त भी कर सकता है और डेवलप भी ...

शांति के लिए पैगम्बर ने हरा रंग चुना: साध्वी धर्मलता

चेन्नई. बुद्ध ने करुणा को चुना और एक पक्षी को बचाने के लिए अपने हाथ का मांस काट कर देने लगे। शांति के लिए पैगम्बर ने हरा रंग चुना व जीसस ने शूली पर चढ़ते हुए प्रेम एवं घावों पर मरहम लगाने की बात कही। जब महावीर ने पैर डसने वाले सर्प के मुख में दूध की धारा बहाई। यह परम अहिंसा है। ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा संस्कृति की रक्षा के लिए मोहम्मद का ईमान, पैगम्बर की शांति, बुद्ध की करुणा, जीसस का प्रेम और महावी कर परम अङ्क्षहसा जब तक देश में नहीं होगी तब तक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती कुछ घंटे का ही खेल एवं मन का संतोष मात्र होगी। एक परंपरा ही बनी रह जाएगी। महात्मा गांधी ने स्वयं का सुख त्यागकर अहिंसा के पथ पर चलकर हमें स्वतंत्रता दी। इस स्वतंत्रता का हमें क्या करना है यह सोचना जरूरी है। साध्वी अपूर्वा ने कहा अनंत ज्ञान, दर्शन, वीर्य एवं अनिर्वचनीय आनंद से परिपूर्ण ह...

मंगल जीवन में कर्तव्य का पाठ पढ़ाता है: साध्वी कुमुदलता

चेन्नई. मंगल जीवन में कर्तव्य का पाठ पढ़ाता है लोग कहते हैं मंगल जीवन में दंगल करता है, ऐसा नहीं है मंगल जीवन में दंगल नहीं करता, मंगल तो जीवन में कर्तव्य करवाता है। अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में विराजित साध्वी कुमुदलता ने 12 राशियों में से सबसे प्रथम मेष राशि के बारे में बताया कि मेष राशि का चिन्ह है। बकरी, बकरी में बहुत शक्ति होती है वह कांटे को भी खा लेती है, कांटा खाने के बाद भी उसे कुछ नहीं होता। वह वक्त आने पर कांटा खाती भी है और कांटा चुभो भी देती है। साध्वी ने मंगलवार के बारे में बताया कि हम इतिहास उठाकर रामायण को देखें तो पूरी रामायण कर्तव्य से भरी है, मां का बेटे के प्रति, बेटे का मां के प्रति, भाई का भाई के प्रति, देवरानी का जेठानी के प्रति एवं सास का बहू के प्रति कर्तव्य दर्शित होता है। इस तरह पूरी रामायण में कर्तव्य ही दर्शित है तो एक बार हम रामायण जरूर देखें जिससे हमें कर्त...

सभी दानों में अभयदान सर्वश्रेष्ठ

चेन्नई. सभी दानों में अभयदान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। सब कुछ हम दे रहे हैं, फिर भी सामने वाला यदि भयभीत है तो हमारा दिया हुआ समस्त दान निष्फल चला जाता है। यदि हम किसी को जीवनदान दे नहीं सकते, तो किसी को मारने का अधिकार भी हमें नहीं है। साहुकारपेट स्थित राजेंद्र भवन में विराजित मुनि संयमरत्न विजय व भुवनरत्न विजय के सान्निध्य एवं भारतीय संस्कृति संरक्षण समिति के तत्वावधान में श्री वि_ल नामदेव समाज ट्रस्ट द्वारा रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुनि संयमरत्न विजय ने कहा हमारे द्वारा किया गया रक्तदान किसी के लिए जीवनदान बन सकता है। वस्त्र दान, अन्न दान और धन दान तो धनवान कर सकता है, लेकिन जीवन में एक बार दिया जाने वाला नेत्र व अंग दान सामान्य लोग भी कर सकते हैं। जीते-जी हम काम आए या न आए लेकिन हमारे जाने के बाद भी हम किसी के लिए काम आ सके इसके लिए रक्तदान जैसे शिविर लगाए जाते हैं...

अपने धर्म के प्रति निष्ठावान रहें: महाश्रमण

चेन्नई. धर्मगुरु अपने धर्म के प्रति निष्ठावान होने चाहिए। उन्हें अपने धर्म और ग्रंथों पर श्रद्धा होने के साथ ही उनको यथार्थ बोलना चाहिए। धर्मगुरु यथार्थवादी होंगे तो ही उनके प्रति लोगों का विश्वास जमा रह सकता है। उनमें मेधा भी होनी चाहिए। मेधा शक्ति होती है तो धर्मगुरु अपने धर्म और उसका अनुपालन करने वालों का विकासकर्ता बन सकते हैं। माधवरम में जैन तेरापंथ नगर स्थित महाश्रमण सभागार में आचार्य महाश्रमण ने कहा दुनिया में अनेक धर्म संप्रदाय हैं। भारत में भी विभिन्न धर्म संप्रदायों के लोग निवास करते हैं। सभी धर्मों के धर्मगुरु भी होते हैं और जनता पर उनका प्रभाव भी होता है। वे जनता को उद्बोध प्रदान करते हैं तो जनता भी उनके बताए मार्ग पर गति करने का प्रयास करती होगी। आचार्य ने कहा धर्मगुरु में बुद्धि सम्पन्नता भी होनी चाहिए। बुद्धि सम्पन्न धर्मगुरु कोई निर्णय स्वयं द्वारा भी ले सकते हैं अन्यथा दूस...

चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत धारा: वीरेन्द्र मुनि

कोयम्बत्तूर आर एस पुरम स्थित आराधना भवन में चातुर्मासिक प्रवचन की अमृत धारा बरस रही है, जैन दिवाकर दरबार में विमलशिष्य वीरेन्द्र मुनि नें धर्म सभा को संबोधित करते हुवे कहा कि सुबाहू कुमार की भावना के अनुसार प्रभु महावीर स्वामी पधार गये। नगर की जनता के साथ राजा अदिनशत्रु राज परिवार युवराज आदि सभी लोग प्रभु की अमृत के समान वाणी का पान कर रहे थे। सुबाहू कुमार ने वाणी सुन करके प्रभु से हाथ जोड़कर वंदन करते हुए निवेदन करते हैं कि हे प्रभु मैंने आपकी वाणी सुनी अति आनंद आया और चिंतन किया कि यह संसार आसार है। इस संसार में अनंत काल से हमारी आत्मा भटक रही है, सो कृपा करके अब तो तीरा दों में अपने माता पिता परिवार से आज्ञा प्राप्त करके आता हूँ। आपके पास दीक्षा लेना चाहता हूँ, भगवान ने कहा, अहा सुयं देवाणुपिया – जिसमें तुम्हें सुख प्राप्त हो वैसा करो। परंतु शुभ काम में अर्थात धार्मिक कार्य देरी न...

वस्तु के ज्ञान को विवेक कहते हैं: साध्वी धर्मलता

चेन्नई. वस्तु के ज्ञान को विवेक कहते हैं। बिना इसके मनुष्य पशुतुल्य है। भारतीय संस्कृति से दूर होते ही ऐसा लगता है जैसे विनय ने विदाई ले ली हो और विवेक का विहार हो गया है। इंसान के रूप में दिखाई देने वाले हैवान बहुत मिलेंगे पर इंसानियत को प्राप्त किए हुए मनुष्य दुनिया में कम ही दिखाई देते है। ताम्बरम जैन स्थानक में विराजित साध्वी धर्मलता ने कहा कि विवेक से धर्म बढ़ता है। विवेक मुक्ति का साधन है। अनंत जीव विवेक के माध्यम से आराधना करते हुए मुक्ति को प्राप्त हुए है। विवेक तो हृदय के अंतर से उत्पन्न हुआ है। अग्नि अंश मात्र भी नहीं है और फूंक लगा दी जाए तो कोई फायदा नहीं है। वैसे ही विवेक बिना धार्मिक उन्नति के कुछ नहीं है। साध्वी अपूर्वा ने तीर्थंकर वासुपूज्य के बारे में बताते हुए कहा कि वसु शब्द का प्रयोग आगमकारों ने सोने की मुहरों और लक्ष्मी के अर्थ में किया। श्रद्धापूर्वक परमात्मा का स्मरण...

शीतलनाथ भगवान की माला जपने से मिलती है शीतलता साध्वी कुमुदलता

चेन्नई. गुस्सा कम करने के लिए चंद्रप्रभु की माला का जाप किया जाए जबकि शीतलनाथ भगवान की माला शीतलता प्रदान करती है। सोमवार के दिन उपवास व्रत एकासन करें एवं सफेद वस्त्र पहनें व सफेद चीज का भोजन करें। अयनावरम स्थित जैन दादावाड़ी में विराजित साध्वी कुमुदलता ने सोमवार को धर्मसभा में सात वारों की राशियों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कर्क राशि का सिंबोल है केकड़ा इस राशि वालों को पानी से मोह होता है। कर्क राशि वाले इंसान ज्यादातर पानी से प्यार करते हैं एवं पानी वाले स्थानों पर घूमना ज्यादा पसंद करते हैं। इस राशि के लिए चंद्रप्रज्ञप्ति के माध्यम से बताया की चंद्र हमें क्रिया देता है, लोगस्स की आराधना साधना में आकाश की ऊर्जा के साथ, चंद्र पूर्णिमा के साथ साधना करने से शीतलता एवं निर्मलता प्राप्त होती है। शरद पूर्णिमा को ओम चंद्रप्रभवे की माला का जाप करने से सुंदरता की प्राप्ति होती है। स...

गुरु का सानिध्य मिलने पर खुद को धर्म कार्य से जोड़े

चेन्नई. गुरु का सानिध्य मिलने पर खुद को धर्म के कार्यो से जोडऩा चाहिए। उन्होंने कहा भिक्षु दया के तहत गोचरी लेने जाने पर बहुत कष्ट झेलने के बाद संत बनते हैं। इसमें बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है लेकिन सच तो यही है कि जीवन में बिना कठिनाई के मनुष्य को मक्खन खाने को नहीं मिलता। अगर मक्खन खाने का शौक है तो कठिनाई का सामना करना होगा तभी जीवन में सफलता मिल पाएगी। साहुकारपेट जैन भवन में विराजित उपप्रवर्तक गौतममुनि ने कहा राग-द्वेष, झूठ और पाप से दूर रहने वाले ही सही मायने में सच्चे श्रावक बन पाते हैं। जीवन में आगे जाना है तो मन में जीवदया के प्रति अच्छे भाव रखने चाहिए। जीवन को सुगम बनाने के लिए जिनवाणी का परम आभार होना चाहिए। इससे मनुष्य आत्म तप को समझ कर आत्मा से परमात्मा बनने की ओर बढ़ता है। ऐसा मौका मिलने पर मनुष्य को कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए। प्रार्थना, प्रवचन, शास्त्र वाचन और...

अहिंसा में अपना बनाने की ताकत है

चेन्नई. अहिंसा में ताकत है अपना बनाने की। हिंसा में कायरता है दूसरों को मिटाने की। हिंसा के पास शस्त्र है। कोंडीतोप स्थित सुंदेशा मूथा भवन में विराजित आचार्य पुष्पदंत सागर ने कहा गांधीजी का देश की स्वतंत्रता में बहुत बड़ा योगदान है। गांधीजी के तीन बंदरों को प्रतीक क्यों माना। सिंह भी बंदरों से डरता है और उनके मन में दूसरी जाति के लिए दया भावना होती है। वे हमेशा ही सकारात्मक रहे, अच्छा सोचा, अच्छा किया, अच्छा बोला। अहिंसक आदमी की सोच नकारात्मक नहीं हो सकती। अहिंसा, अपरिग्रह, सकारात्मक विचार उनके अंगरक्षक थे। उनका मैनेजमेंट बहुत अच्छा था। गांधीजी के दो वस्त्र, दो उद्देश्य और तीन विचार थे। परिग्रह कम अहिंसा ज्यादा। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र और सद्व्यवहार, सदाचरण का पालन करना। पहले पिता देश की सुरक्षा के लिए बेटे के हाथ में शस्त्र सौंपता था जबकि आज पिता राजनीति सौंपता है। आदमी ...

धर्मकार्य पूर्ण आस्था और श्रद्धा के भावों से करने वाला ही मेधावी: उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि

चेन्नई. सोमवार को श्री एमकेएम जैन मेमोरियल, पुरुषावाक्कम में विराजित उपाध्याय प्रवर प्रवीणऋषि एवं तीर्थेशऋषि महाराज का प्रवचन कार्यक्रम हुआ। उपाध्याय प्रवर ने जैनोलोजी प्रैक्टिल लाइफ सत्र में सामायिक की आराधना के सूत्र बताए। उन्होंने कहा कि विराधना के दस रास्ते और आराधना के दस रास्ते होते हैं। विराधना के दस सूत्रों में से यदि एक को भी रोक दें तो बाकी नौ अपने आप रूक जाएंगे। जब किसी से गलत व्यवहार हो जाए तो उससे क्षमा मांग लें, क्षमापना से अभिहया के चक्र को रोक सकते हैं। क्षमापना से यह विराधना नहीं होगी। अन्तर मन में इच्छा तो रहती है सुलह की लेकर करते नहीं है, तो सामने वाला भी नहीं करता है और इस तरह यह अभिहया की विराधना रूकती नहीं है। जब हम वास्तविकता को स्वीकारते नहीं हैं तब दूसरों के साथ स्वयं की भी वत्तिया करते हैं। यह जीवन में ऐसा तनाव लाती है जिससे पापों का बंध करते ही जाते हैं। परमात्म...

संविधान का सम्मान भी आवश्यक होता है: महाश्रमण

चेन्नई. प्रत्येक राष्ट्र व संस्था का अपना-अपना संविधान होता है। संविधान का सम्मान भी आवश्यक होता है। जहां संविधान के अपमान की स्थिति आ जाती है, वह संगठन खतरे में भी पड़ सकता है। साधु संस्था के मुखिया बनने वाले को यथार्थवादी होना चाहिए। यदि सत्य का पालन करे और सत्य संभाषण करे तो वह मुखिया अच्छा हो सकता है। माधवरम में जैन तेरापंथ नगर स्थित महाश्रमण सभागार में आचार्य महाश्रमण ने कहा जहां संगठन या संस्था होती है, वहां संचालन व व्यवस्था की दृष्टि से मुखिया की नियुक्ति करनी होती है। नेतृत्व के बिना तो किसी संगठन या संस्था में कार्य भी कैसे हो सकता है। प्रजातांत्रिक व्यवस्था हो अथवा लोकतांत्रिक किसी को मुखिया बनाया जाता है। इसी प्रकार धार्मिक संगठनों व धर्मसंघ में नेतृत्व करने वाले आचार्य होते हैं। आचार्य के लिए कुछ आवश्यक कसौटियां बताई गई हैं। जिस साधु को मुखिया बनाया जाए, वह श्रद्धाशील हो। उसमे...

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