चेन्नई, साहुकारपेट स्थित श्री जैन भवन में विराजित उपाध्याय प्रवर रवीन्द्र मुनि ने कहा बोलने से भी व्यक्ति की ऊर्जा खर्च होती है। जैसे व्यक्ति काम करके थक जाता है वैसे ही बोलने से भी उसकी ऊर्जा घट जाती है। मनुष्य बोलना तो तीन साल से ही सीखता है लेकिन क्या बोलना है जीवन भर नहीं सीख पाता। जैसे बोलना जरूरी होता है वैसे ही मौन रहना भी जरूरी है। यदि बोलते ही जाएगा तो ऊर्जा तो खर्च होगी ही। यदि यही रवैया...
चेन्नई, साहुकारपेट स्थित जैन आराधना भवन में विराजित गणिवर्य पदमचंद्र सागर भगवान महावीर ने कहा कुछ जीव इन्द्रिय सहित जन्म लेते हैं तो कुछ जीव इन्द्रिय रहित। इन्द्रिय दो प्रकार के होते हैं- द्रव्य और भाव। द्रव्य इन्द्रिय के दो प्रकार हैं, निवृत्ति (आकृति) और उपकरण। बाहर से जो इन्द्रिय दिखती है उसे निवृत्ति कहा जाता है और भीतर में जो यंत्र है जिससे बाहरी इन्द्रिय संचालित होती है, उसे उपकरण कहते हैं। ...
चेन्नई. ईदापेट जैन स्थानक में विराजित ज्ञानमुनि ने कहा हिंसा अधर्म का मार्ग है, यह दुखों की खान है, नरक का द्वार है इसलिए ङ्क्षहसा से हमेशा बचें और दया धारण करें। हिंसा अशांति एवं दुख-दुर्गति देती है। यही कारण है पहले लोग जीवन जीने में भी ज्यादा हिंसा से बचते थे। समय बदल गया, आज पग-पग पर हिंसा के साधन हो गए हैं। पुराने जमाने के लोग बड़े दयालु होते थे। कमजोर, अमुक जानवरों व गरीबों की बहुत सहायता कर...
चेन्नई, साहुकारपेट स्थित श्री जैन भवन में विराजित उपाध्याय प्रवर रविन्द्र मुनि ने कहा कि व्यक्ति का मन ही उसका सबसे बड़ा मित्र और सत्रु होता है। मन में अगर नाकारात्मक भावना उत्पन्न होती है तो वह सत्रु है और साकारात्मक उत्पन्न होतो मित्र होता है। लेकिन जब तक मनुष्य स्वयं से कोशिश नहीं करेगा तो उसके सुखी, दुखी होने का कारण कोई और नहीं हो सकता है। जीवन में सत्रुता का भाव रखने वाले व्यक्ति अगर किसी को...
चेन्नई सईदापेट जैन स्थानक में विराजित ज्ञानमुनि ने कहा कल्याण चाहते हैं तो नम्र बनकर रहना होगा। धर्म के अंदर जाने के चार गुर हैं-पहला क्षमा यानी सहनशील होना चाहिए। इसी से एकता रहती है। दूसरे को निभाया जा सकता है। यह व्यक्ति को मजबूत करती है। दूसरा है सहनशीलता। क्षमा और सहनशीलता संत का आ ाूषण है। तीसरा विनय-द्वार। विनय धर्म का मूल है। चौथा सरलता, यह धर्म का पात्र है। सरल पात्र में ही धर्म टिकता है।...
चेन्नई, साहुकारपेट स्थित श्री जैन भवन में विराजित उपाध्याय प्रवर रवीन्द्र मुनि ने कहा व्यक्ति का सब कुछ ज्ञान और राग पर निर्भर करता है। जिन मिट्टी में मैत्री भाव का प्रभाव होने पर ज्ञान होता है वैसे ही राग के परिहार से साधुता आती है। जीवन में जैसे उजाले के समय में अंधेरा नहीं और अंधेरे के समय में उजाला नहीं होता है। इनको एक साथ करने की अगर व्यक्ति कोशिश करे तो कभी पूरी नहीं होती, क्योंकि दोनों को ...
Dynamically brand synergistic schemas via cross functional networks. Quickly visualize web-enabled strategic theme areas for cross functional e-business. Enthusiastically productize client-centered web-readiness without cost effective outsourcing. Uniquely target integrated content whereas backend deliverables. Appropriately simplify viral bandwidth via premier users. Continually formulate virtual...
Completely extend intuitive potentialities before an expanded array of web services. Appropriately communicate front-end process improvements through interactive imperatives. Conveniently grow excellent results rather than integrated supply chains. Rapidiously recaptiualize. Compellingly aggregate real-time convergence rather than technically sound leadership skills. Rapidiously mesh backend netwo...
Interactively disseminate extensive ROI via scalable vortals. Completely streamline team building imperatives before reliable technology. Appropriately generate next-generation alignments through real-time initiatives. Distinctively innovate e-business growth strategies through parallel platforms.Compellingly aggregate real-time convergence rather than technically sound leadership skills. Rapidiou...
Completely parallel task competitive collaboration and idea-sharing with interoperable web-readiness. Objectively engage turnkey services and prospective products. Completely optimize ubiquitous technologies through high standards in human capital. Appropriately recaptiualize functional bandwidth with excellent convergence. Dynamically synergize user friendly e-business and. Dynamically brand syne...