दिवाकर भवन पर जप तप आराधना के साथ विभिन्न धार्मिक गतिविधीयो के साथ पाँच माह का चातुर्मास गतिमान है। प्रतिदिन नवकार आराधक श्रावक श्राविकाओ के साथ ज्ञान जिज्ञासु महानुभव प्रवचनो की श्रंखला के माध्यम से जिनवाणी का श्रवण कर रहे है। प्रवचनो के माध्यम से प्रखर वक्ता मेवाड़ गोरव पुज्यश्री रविन्द्रमुनि जी म सा “नीरज” ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए फरमाया कि जब तक आप भोले बनकर रहेंगे तब तक आप समझदार नहीं बन सकते हैं। हमें समझदार बनकर धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपनी आत्मा को को निर्मल बनाना है। जिस तरह एक फूल भी मुरझाकर भी अपनी सुगंध छोड़कर जाता है उसी तरह क्या आप भी दुनिया में कुछ छोड़कर जाना चाहते हो।
दुनिया में व्यक्ति कैसा भी हो लेकिन श्रद्धांजलि सभा में व्यक्ति की तारीफ की जाती है कैसा जीवन जीने से कोई लाभ नहीं। शाकाहार एवं मांसाहार मानव सभ्यता की दो अलग-अलग विपरित शाखा है जो आपस में कभी मेल नहीं खाती आप अपने जीवन को सुधार के मार्ग पर ले जाएं। शाकाहार अपनाने एवं शाकाहार के लिए लोगों को प्रेरित करें, शाकाहारी व्यक्ति ही मन में दया एवं करुणा के भाव रख सकता है। अपने आपको मितभाषी बनाए हमेशा कम शब्दों का उपयोग करें और वाणी मीठी ही बोले इस संसार को धर्म पंथ जातिवाद से आगे बढ़ाना है तो हमें मनुष्य में मानवता, करुणा के गुण उत्पन्न करने होंगे।
उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकडिया कार्यवाहक अध्यक्ष ओम प्रकाश श्रीमाल ने बताया की गुरुदेव प्रतिदिन कथानक के माध्यम से रुकमणी मंगल की कथा का विवेचन भी कर रहे हैं। ताल निवासी प्रकाशचंद्र जी पितलीया ने 33 उपवास के प्रत्याख्यान गुरुदेव से लिये। धर्मसभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया। आभार श्रीसंघ उपाध्यक्ष विनोद ओस्तवाल ने माना।