शाश्वत नवपद ओलीजी की आराधना मंगलवार से प्रारम्भ।
बाड़मेर, 11 अक्टूबर।
धर्म नगरी बाड़मेर में 22 दिवसीय भक्तामर अभिषेक अनुष्ठान का समापन सोमवार को भक्तामर महापूजन का आयोजन के साथ सानंद सम्पन्न हुआ।
श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ, चातुर्मास समिति बाड़मेर के गौतमचंद डूंगरवाल व मिडिया प्रभारी चन्द्रप्रकाश छाजेड़ ने बताया कि परम् पूज्या भक्तामर प्रचारिका साध्वी श्री मृगावती श्रीजी म.सा. आदि ठाणा-3 की पावन निश्रा में 20 सितंबर भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा के दिन प्रारम्भ हुए 22 दिवसीय भक्तामर अभिषेक अनुष्ठान का समापन 10 अक्टूबर को हुआ। जिसकी पूर्णाहुति निमित्त सोमवार को प्रातः 9 बजे स्थानीय आराधना भवन में भक्तामर महापूजन का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न अनाजों का रंगबिरंगा मांडला बनाया गया तथा मुख्य पीठिका पर भक्तामर की 44 गाथा यंत्र स्थापित किया गया।
जिस पर सैकड़ों मंत्रोच्चारण के माध्यम से अभिषेक व जल, चंदन, धूप, दीपक, अक्षत, नैवेद्य, फल आदि अर्पण किए गए। आधि-व्याधि-उपाधि दूर करने वाले ऐसे महान चमत्कारिक स्त्रोत के महापूजन करवाने का लाभ रायपुर छत्तीसगढ़ निवासी सौभाग्यवती विमलाबाई महावीरचंद बुरड़ परिवार ने प्राप्त किया है। विधि-विधान रायपुर से पधार रहे सुप्रसिद्ध विधिकारक विमलचंद गोलेच्छा द्वारा करवाया जाएगा। महापूजन में गौरव मालू एण्ड पार्टी द्वारा सभी प्रभु भक्तों को भक्ति में झूमाया गया। गुरूवर्या श्री मृगावतीश्रीजी द्वारा भक्तामर स्त्रोत्र के महात्मय के बारे में बताया गया। मांडला बनाने में उदय गुरूजी, सोनू वडेरा व रूपेश संखलेचा का विशेष योगदान रहा। 22 दिवसीय अनुष्ठान में सहयोग प्रदान करने वाले उदय गुरुजी, रक्षा मालू, संगीता छाजेड़, लक्ष्मी सिंघवी, मोंटू डाकलिया* का संघ की ओर से बहुमान किया गया।
शाश्वत नवपद ओलीजी की आराधना मंगलवार से प्रारम्भ।
बाड़मेर नगर में स्थानीय आराधना भवन में आसोज मास की ‘‘शाश्वती ओली तप की आराधना 12 अक्टूम्बर, मंगलवार से प.पू. साध्वी श्री मृगावतीश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की पावन निश्रा मे प्रारम्भ होगी।
खरतरगच्छ चातुर्मास समिति के पारसमल मालू़ (कवास वाले) ने बताया कि इस वर्ष यह ओली करवाने का लाभ श्रीमान लूणकरण-जसोदादेवी, प्रकाशचंद-मीनादेवी, महावीरचंद-सरोजदेवी, गौरव, प्रेरणा, ईशा, कल्प, सिद्धि गोलच्छा परिवार झाकवालों ने लिया। ओली में नवपद की आराधना होगी ओर प्रतिदिन एक एक पद पर गुरूवर्याश्री का प्रवचन होगा। नौ दिन तक तपस्या करने वाले आराधक लुखा (अलुणा) अर्थात बिना नमक मिर्च, मसाला तेल व घी का एक बार नीचे बैठकर भोजन यानि आंयबिल करेगें ओर गर्म पानी का ही उपयोग करेगें।
चंद्रप्रकाश छाजेड़,
मीडिया प्रभारी



