पूज्यश्री शालिभद्रजी म.सा के बालोतरा में संथारा पुर्वक देवलोकगमन हो जाने पर चेन्नई के साहूकारपेट बेसिन वाटर वर्क्स में स्थित स्वाध्याय भवन में गुणानुवाद संपन्न
राजस्थान बालोतरा में श्रुतधर श्रदेय पूज्यश्री प्रकाशमुनिजी म.सा के सुशिष्य पूज्यश्री शालिभद्रमुनिजी म.सा के संथारा पुर्वक देवलोकगमन हो जाने पर चेन्नई के साहूकारपेट बेसिन वाटर वर्क्स स्ट्रीट में स्थित स्वाध्याय भवन में गुणानुवाद किये गए |
वरिष्ठ स्वाध्यायी श्री वीरेन्द्रजी कांकरिया ने शालिभद्रमुनिजी म.सा के दृढ़ता पूर्वक संयम पालन के अनेक उद्दरण धर्मसभा में रखते हुए कहा कि मुनि दीक्षित होने के पश्चात राजस्थान की गर्मी व भीषण सर्दी ठण्ड के मौसम में धूप व सर्दी की दैनिक रुप आतापना लेने वाले सन्त रत्न थे,जो भी श्रदालु राजस्थान में उनके विचरण क्षेत्र के नजदीक में जाते तो अवश्य ही महान सन्त रत्न के दर्शन की भावना से अवश्य दर्शन करने जाते थे |
श्री जैन रत्न हितैषी श्रावक संघ तमिलनाडु के निवर्तमान कार्याध्यक्ष आर नरेन्द्रजी कांकरिया ने धर्मसभा में कहा कि महान सन्त रत्न का जन्म राजस्थान के अलवर में पिता श्री रतनचंदजी संचेती व माता श्रीमती चम्पादेवीजी संचेती के यहां हुआ,उनका जन्म नाम प्रकाश था वे पांच बहिनों के एक भाई थे | आपने जयपुर को कर्म क्षेत्र बनाया व पूर्ण सफलता पाते हुए भी प्राप्त सुख सुविधाओं का त्याग कर एक छाप बनाई व प्रभु वाणी को सिद्ध व चरितार्थ किया कि सच्चा सुख त्याग में ही हैं,माताजी की इच्छा को पूर्ण करने हेतु जयपुर में श्री जयंतीलाल महाराज के चातुर्मास में ज्ञान ध्यान सीखा व वैराग्य जागृत होने पर 12 वर्षों तक वैराग्य अवस्था में रह कर पूज्यश्री चम्पालालजी म.सा के पास जयपुर में 1994 में अपनी धर्म सहायिका श्रीमती शशिजी के संग दीक्षित हुए |
दीक्षित होने के पश्चात तेले तेले की तपस्या पारणे में भी आयम्बिल की तपस्या,ध्यान कार्योत्सग,मौन आदि साधना वर्षों तक करते रहे | आपकी साधना से प्रभावित होकर वर्ष 2006 में आपकी मातुश्री ने भी जैन भागवती दीक्षा ली व उन्हें चौबीस दिनों का संथारा आया | आप वर्ष 2018 से स्वास्थ्य व साधना की दृष्टि से राजस्थान में बालोतरा विराज रहे थे | 5 नवम्बर 2025 से चोविहार उपवास की साधना निरंतर बढ़ाते हुए कल 20 नवम्बर को रात्रि में संथारा पूर्वक समाधिमरण का वरण किया | सैंतालीस वर्ष की आयु में दीक्षित श्रदेय पूज्यश्री शालिभद्रमुनिजी म.सा ने इकतीस वर्षों तक संयम का दृढ़तापूर्वक पालन किया व 78 वर्ष की वय में सोलह दिनों की साधना संथारा पूर्वक पूर्ण हुई |
स्वाध्याय संघ जोधपुर के सह संयोजक श्री नवरतनमलजी बागमार ने गुणगान करते हुए कहा कि महान तपस्वी सन्त रत्न ने विचरण क्षेत्र की सीमा की मर्यादा भी की हुई थी |
धर्मसभा में श्री महावीरचन्दजी बागमार वीरपिता व वीर पति बाबू धनपतराजजी सुराणा पदमचंदजी श्रीश्रीमाल वीरेन्द्रजी ओस्तवाल नवरतनमलजी चोरडिया रुपराजजी सेठिया योगेशजी श्रीश्रीमाल लीलमचन्द बागमार दीपकजी श्रीश्रीमाल उच्छब राजजी गांग आदि स्वाध्यायीगण की उपस्थिति प्रमोदजन्य रही | चरित्र आत्मा के देवलोकगमन हो जाने पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने चार लोग्गस का ध्यान किया |