श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ कम्मनहल्ली में प.पू. आगमश्रीजी म.सा. ने बताया कि जहां समझ है वहां शांति है, सुख है, वही समाधि है। जीवन जीने की कला हो तो कभी भी वियोग से दुखी नहीं होगा।आज का मानव परिस्थिति जन्म दुख से 80% घिरा हुआ है दुखों से मुक्त होने के लिए धर्म की शरण ग्रहण करो।
प.पू. धैर्याश्रीजी म.सा. ने बताया सूदक्षता, बुद्धिमान श्रावक वे होते हैं जो वस्तुस्थिति को जान लेते हैं। जिससे अन्य को भी हानि नहीं होती और स्वयं भी सुखी रहते हैं।अध्यक्ष विजयराज चुत्तर ने अभिवादन किया। मंत्री हस्तीमल बाफना ने संचालन किया।