महाराष्ट्र की धर्मनगरी कोल्हापुर में राष्ट्र संतों का प्रथम मंगलमय आगमन, गुरु अमर पुण्य स्मृति महोत्सव का होगा भव्य आयोजन
राष्ट्र संत श्रमण संघ के उपप्रवर्तक परम पूज्य श्री पंकज मुनि जी महाराज एवं भारत गौरव परम पूज्य गुरुदेव डॉक्टर वरुण मुनि जी महाराज, मधुर वक्ता मुनि रत्न पूज्य श्री रुपेश मुनि जी महाराज आदि संतों का गांधीनगर, बेंगलुरु में वर्ष 2025 का चातुर्मास संपन्न कर राजाजीनगर, कृष्णागिरी, हुमचा पद्मावती, हंपी, बदामी एवं गोवा होते हुए महाराष्ट्र की धर्मनगरी कोल्हापुर में प्रथम बार मंगलमय आगमन हुआ।
यहां समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने पूज्य गुरुदेव की अगवानी की। संघ के अध्यक्ष श्रीमान साहब हीरालाल जी कर्णावट ने बताया कि यह हमारे श्रीसंघ का परम सौभाग्य है कि पूज्य गुरु भगवंतों का हमारी नगरी में मंगलमय पदार्पण हुआ है।
समाज के महामंत्री श्री जयंत भाई सेठ ने बताया कि पूज्य गुरु भगवंतों के नित्य दर्शन एवं प्रवचन का हमें सौभाग्य प्राप्त होगा। साथ ही “सोने में सुगंध” की कहावत को सार्थक करते हुए गुरु अमर पुण्य स्मृति महोत्सव मनाने का अवसर भी हमारे श्रीसंघ को प्राप्त हो रहा है।
श्रीसंघ के कोषाध्यक्ष श्री प्रीतम भाई जैन ने जानकारी दी कि 13 फरवरी को जप दिवस, 14 फरवरी को तप दिवस तथा 15 फरवरी को सामायिक दिवस के अंतर्गत गुणगान सभा का आयोजन किया जाएगा। प्रातः 9 से 10 बजे तक आयोजित गुणगान सभा में पूज्य गुरु भगवंत अपनी मंगलमय वाणी का दान प्रदान करेंगे।
गुणगान सभा के पश्चात श्रुताचार्य साहित्य सम्राट पूज्य गुरुदेव श्री अमर मुनि जी महाराज की तेरहवीं पुण्यतिथि के वार्षिक अवसर पर कोल्हापुर श्रीसंघ की ओर से वृद्धाश्रम, कुष्ठाश्रम, अनाथाश्रम एवं अंध विद्यालय में अन्न-प्रसादम का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इस अवसर पर पुणे (आकुर्डी, निगड़ी, प्राधिकरण) गोवा एवं बेंगलुरु से अनेक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि श्रुताचार्य, साहित्य सम्राट पूज्य गुरुदेव श्री अमर मुनि जी महाराज एक महान प्रवचनकार एवं संत शिरोमणि थे। उनके प्रवचनों में जैन धर्म के साथ-साथ गीता, पुराण, कुरान, बाइबिल, गुरु ग्रंथ साहिब, वेद एवं उपनिषद सहित सभी धर्मग्रंथों का सुंदर समन्वय होता था। इसी कारण जैन समुदाय के साथ-साथ हिंदू , मुस्लिम, सिख, ईसाई एवं अन्य धर्मावलंबी भी बड़ी श्रद्धा-भक्ति से उनके प्रवचनों का श्रवण करते थे।
उन्होंने अपने जीवनकाल में 108 युवक-युवतियों को दीक्षा मंत्र प्रदान कर उन्हें संन्यास जीवन की ओर अग्रसर किया। पूज्य गुरुदेव की सद्प्रेरणाओं से सैकड़ों संस्थाओं की स्थापना हुई — जिनमें विद्यालय, महाविद्यालय, चिकित्सालय एवं विभिन्न धर्मस्थल सम्मिलित हैं। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि स्थानों पर जहां-जहां गुरुदेव का पदार्पण हुआ, वहां उनकी एक ही भावना रही — “मुझे समाज के लिए कुछ विशेष सेवा कार्य करना है।” सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्थापित संस्थान आज भी मानवता की सेवा कर रहे हैं।
गौरतलब है कि पूज्य गुरुदेव के जीवन का कण-कण और क्षण-क्षण लोककल्याण एवं विश्वकल्याण के लिए समर्पित रहा। ऐसे पूज्य गुरुदेव को समाज और देश सदैव स्मरण रखेगा।
मुनि रत्न श्री रुपेश मुनि जी महाराज ने बताया कि पूज्य गुरु भगवंतों के पावन सान्निध्य में सभी कार्यक्रम वर्तमान स्थल कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में अत्यंत श्रद्धा-भक्ति के साथ आयोजित किए जा रहे हैं।