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श्रेष्ठ बनना है तो दूसरों को खुश करना सीख लें : डॉ. वसंतविजयजी म.सा.

श्रेष्ठ बनना है तो दूसरों को खुश करना सीख लें : डॉ. वसंतविजयजी म.सा.

पर्यूषण पर्व में सामूहिक अठाई आयोजन होगा

इंदौर। कृष्णगिरी शक्तिपीठाधिपति यतिवर्य राष्ट्रसंत डॉ. वसंतविजयजी म.सा. ने शुक्रवार को दिव्य भक्ति चातुर्मास प्रवचन में कहा कि दूसरों को खुश करना सीख लें तो इस जन्म में निहाल हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि जो भी प्राणी दु:खी है वह मन से दरिद्र है, दूसरों के प्रति हीन भावना रखता है और जो सुखी है वह स्वयंगुण के साथ सुख को पाते हैं।

हृींकारगिरी तीर्थ धाम में श्री नगीन भाई कोठारी चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में उन्होंने कहा कि अधिकतर लोग दूसरों को गलत दृष्टि से देखकर उनके साथ बुरा बर्ताव करते हुए सुखी होने की कामना करते हैं। यदि जीवन में श्रेष्ठ बनना है तो सेवा, कर्म से ही श्रेष्ठता का मार्ग प्रशस्त होगा।

डॉ. वसंतविजयजी म.सा ने यह भी कहा कि दूसरों का भला चाहोगे तो यश, कीर्ति मिलेगी। हमें कामना ही ऐसी करनी चाहिए कि हर व्यक्ति इस संसार में श्रेष्ठ बने। उन्होंने कहा कि दूसरों को आदर दें तथा सौहार्द्र रखें। हर समय सच्चे दिल से दूसरों की सुख-समृद्धि की मंगल कामना करते रहें।

ट्रस्टी विजय एवं जय कोठारी ने बताया कि धाम में ही प्रतिष्ठापित मूलनायक परमात्मा पार्श्वनाथजी की प्रतिमा का विधिकारक हेमंत वेदमूथा मकशी द्वारा 50 दिवसीय 18 अभिषेक शुक्रवार को भी जारी रहा।

वहीं शुक्रवार सुबह के सत्र में संतश्री वज्रतिलकजी की निश्रा में प्रतिक्रमण व सामूहिक भक्तामर मंत्र जाप किया गया। देश के विभिन्न शहरों से श्रद्धालुओं ने संतश्रीजी के दर्शन, प्रवचन व मांगलिक श्रवण का लाभ लिया।

पर्यूषण पर्व में सामूहिक अठाई आयोजन होगा

हृींकारगिरी तीर्थ धाम में मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार वैज्ञानिक रुप से पर्यूषण पर्व में अलौकिक सामूहिक अठाई आयोजन 26 अगस्त से होगा।

श्री नगीन भाई कोठारी चैरिटेबल ट्रस्ट के ट्रस्टी विजय कोठारी व वीरेंद्र कुमार जैन ने बताया कि कृष्णगिरी शक्ति पीठाधिपति राष्ट्रसंत यतिवर्य डॉ. वसंतविजयजी म.सा. की निश्रा में जो भी श्रावक-श्राविकाएं पर्यूषण पर्व में अपनी आराधना को सफल करना चाहते हैं उन्हें विभिन्न अलौकिक रुप से आत्म सजावट की ओर अग्रसर हो रहे हृींकारगिरी तीर्थ धाम में ही आवास की व्यवस्था करायी जाएगी।

उन्होंने बताया कि पर्यूषण पर्व में जो भी श्रावक-श्राविकाएं उपवास करने का भाव रखते हैं उन्हें आठ दिन तक हर प्रकार की उत्तम क्रियाओं से परिपूर्ण अठाई महोत्सव की आराधना करायी जाएगी।

ट्रस्टी जय कोठारी ने यह भी बताया कि तपस्या करने वाले श्रद्धालूओं के साथ यहां सुबह नित्य प्रतिक्रमण, भक्तामर पाठ, नित्य क्रिया आराधना-जप के साथ-साथ उत्तम रुप से प्रवचन श्रवण के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की धर्म आध्यत्मिक क्रियाओं को सुनने, समझने का अद्भुत अवसर मिलेगा।

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