तत्व चिंतक श्री विजयश्रीजी म सा ने आज प्रवचन में विवाह समारोह में रात्रि भोज नहीं रखना। खाने में जमीकंद का उपयोग नहीं करना, खाना बनाने वालों से विवेक रखने का आग्रह करने के बारे में बतलाया। आशुकवि पूज्या गुरूवर्या श्री कमलेशजी म सा ने आज व्यावहारिकता के बारे में प्रवचन दिया। जीवन मे व्यवहारिकता का होना अनिवार्य हैं। सामने वाले कि सुनना, जरूरत हो तो ही बोलना। किसी की निंदा नहीं करना। किसी के झगड़े में साधु- साध्वी के आना, बन्द नहीं करना। परिवार के साथ भोजन करना। पूज्या गुरूवर्या प्रवचन में प्रतिदिन आनन्द सेठ का चारित्र धारावाहिक आगे बढ़ा रही हैं। श्री संघ में आयम्बिल की लड़ी, नवकार जाप, प्रश्न श्रृंखला अनवरत चल रहा हैं। आज का प्रश्न: मनुष्य गति के कौनसे जीव कम आहार करते हैं, किन्तु तपस्वी नहीं कहलाते?
थानांग सूत्र के अनुसार गौतम स्वामी प्रभु महावीर से पूछते है की देवता धरती पर किन कारणों से आते है । प्रभु ने फरमाया की देवता तीर्थंकरों का जन्म कल्याणक मनाने के लिये उनकी देशना सुनने के लिये लिए धरती पर आते है। देवलोक में देव शय्या पर देवता का जन्म होता है, मात्र 48 मिनिट में देवता पूरा यौवन प्राप्त कर लेते है, देवता को कभी बुढापा नही आता है । देवता जन्म लेते ही अपने अवधि ज्ञान से अपना पूर्व भव देखते है, एक देवता की सेवा में 32 देवियाँ होती है, देवता के पास सम्पूर्ण सुख सुविधा होती है लेकिन वो दान शील तप और भावना नही भा सकते है, क्योंकि उनकी मोह आकांक्षा कर्म का उदय रहता है। आपने फरमाया की वर्षों पूर्व नीमचौक में विराजित ज्योतिषाचार्य उपाध्याय भगवन श्री कस्तूरचंद जी मासा की सेवा में भी कुबेर के अधीनस्थ देवता रहता था, जिस कारण गुरुदेव दिन दुखियों की भरपूर सहायता करवा देते थे, ऐसे अनगिनत उदा...
जंगल में रहो या बस्ती में रहो, लहरों में रहो या कश्ती, महंगाई में रहो या सस्ती में रहो, लेकिन जँहा भी रहो जिनवाणी की मस्ती में रहो। मानव एक ऐसा मननशील प्राणी है जो कभी भी संतुष्ट नही होता है। *चाणक्य नीति के अनुसार मानव को तीन बातों में हमेशा संतुष्ट रहना चाहिये। पहला स्वंय की पत्नि/पति से दूसरा जो भोजन मिले उससे तीसरा जो धन मिला उससे। सोने के लिए साढ़े तीन गज जमीन और खाने के लिये पाव भर अनाज पहनने के लिये चार गज कपड़ा चाहिये। लेकिन संग्रह हमारा कम नही होता है, बन्द मुट्ठी आए है लेकिन खाली हाथ जाएंगे। तीन बातों से हमेशा असंतुष्ट रहना चाहिये । पहला मुझे और पढ़ना है और अधिक ज्ञान प्राप्त करना है, दूसरा और अधिक जप तप करना है एंव और अधिक जप तप करना है । इच्छाए आकाश के समान होती है । घने जंगल में जाए और आकाश की तरफ देखता है तो आकाश बहुत नजदीक दिखता है, ह्दय रूपी आकाश में अनेक इच्छाए उठती रहती है, ...
जय गुरु जैन दिवाकर जैन स्थानक पनवेल *जैन दिवाकरीय दक्षिण चंद्रिका प्रभावशाली व्यक्तीत्व,प्रखर वक्ता* 😷 *महासाध्वी श्री संयमलताजी म.सा* 😷 *साध्वी श्री अमितप्रज्ञाजी म.सा* 😷 *साध्वी श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा* 😷 *साध्वी श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा* *आदी ठाणा-4 के सानिध्य में* 🙏🏻 *कलयुग का कल्पवृक्ष🌳भक्तामर स्त्रोत के 21 वे श्लोक का महामंगलकारी अनुष्ठान🙌🏻जैन स्थानक पनवेल 🙏🏻 मे भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।* 🔹 *अनुष्ठान के लाभार्थी* *👱🏻♂️श्रीमान चंपालालजी बाफना परिवार, पनवेल* 👏🏻 *आयोजक:-* 👏🏻 🟢 *चातुर्मास आयोजक समिति 2022 पनवेल* 🟣 *श्री वर्धमान स्थाकवासी जैन श्रावक संघ पनवेल* 🟠 *श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ (मेवाड़) उपसंघ पनवेल* 🟤 *जैन स्थानक ट्रस्ट* *कार्यक्रम की झलकियाँ*👇🏻👇🏻👇🏻 *जुलाई* 2⃣0⃣2️⃣2️⃣ *जैन दिवाकरीय दक्षिण चंद्रिका प्रभावशाली व्यक्तीत्व,प्रखर वक्ता* 😷 *महासाध्वी श्री संयमलताजी म.सा*...
*जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा संगठन यात्रा* गुडियात्तम ; जैन श्वेतांबर तेरापंथी महासभा के अंतर्गत महासभा के कार्यसमिति की टीम संगठन यात्रा हेतु (तमिलनाडु) गुडियातम पहुंची। तमिलनाडु (उत्तर) के आंचलिक प्रभारी श्री देवराज आच्छा एवं कार्यसमिति सदस्य श्री विमल चिप्पड, श्री ललित दूगड़ के साथ तेरापंथ भवन, गुडियात्तम में मीटिंग आयोजित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता सभा अध्यक्ष श्री हीरालाल गिरिया ने की एवं सभा की गतिविधियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। महासभा की ओर से सभी के स्वागत के पश्चात आंचलिक प्रभारी श्री देवराज आच्छा ने चुनाव प्रक्रिया संपन्न कराते हुए सर्वसम्मति से अध्यक्ष श्री हीरालाल गिरिया को मनोनीत किया। तेरापंथ सभा प्रभारी श्री विमल चिप्पड़ एवं ललित दुग्गड ने ने नवमनोनीत अध्यक्ष को बधाई एवं शुभकामनाएं संप्रेषित करते हुए ज्ञानशाला और चरित्रआत्माओं के रास्ते की सेवा आदि पर विशेष ध्यान ...
भगवती सूत्राधारित पावन प्रवचन में आचार्यश्री ने लेश्याओं को किया व्याख्यायित कालूयशोविलास का रसपान करा युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण अपने आचार्य की मानों गोद में मुनि कालू, पंचमाचार्य का महाप्रयाण *21.07.2022, गुरुवार, छापर, चूरू (राजस्थान) :* 74 वर्षों बाद तेरापंथ धर्मसंघ के अष्टमाचार्य परम पूज्य आचार्यश्री कालूगणी की जन्मभूमि छापर में वर्ष 2022 का चतुर्मास कर रहे तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, मानवता के मसीहा शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के छापर में विराजमान हो जाने से यह छापर नगरी मानों तीर्थस्थल बन गया है। देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु आचार्यश्री के दर्शन और सेवा के लिए उपस्थित हो रहे हैं। आचार्यश्री का प्रवास स्थल नगर के मध्य होने के कारण जैनेतर जनता को भी अपने मानवता के मसीहा के निकट से दर्शन और उनके प्रवचन श्रवण का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। आचार्यश्री महाश्रमणजी ने भ...
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद बालोतरा द्वारा मुनिश्री मोहजीत कुमार जी के सान्निध्य में सम्यक दर्शन कार्यशाला के किट का अनावरण न्यू तेरापंथ भवन बालोतरा में किया गया।तेयुप अध्यक्ष संदीप ओस्तवाल ने सम्यक दर्शन कार्यशाला की महत्वपूर्ण जानकारी दी। मंत्री नवनीत बाफना ने बताया कि यह कार्यशाला आचार्य महाश्रमणजी की कृति *भगवान ने कहा* पुस्तक पर आधारित है। संयोजक अरिहंत और प्रतीक चोपड़ा ने बताया कि यह कार्यशाला 20 जुलाई से 3 अगस्त 2022 तक तेरापंथ भवन में आयोजित होगी और परीक्षा 21 अगस्त को ऑनलाइन माध्यम से होगी । मुनिश्री मोहजीत कुमार जी ने उपस्थित श्रावक समाज से कार्यशाला में भाग लेने के लिए विशेष प्रेरणा दी। और कहा कि इस कार्यशाला से हम अपने आध्यात्मिक ज्ञान में उत्तरोत्तर वृद्धि कर सकते है। भगवान की वाणी को सुनने और समझने से हम अपने जीवन मे विनम्रता, सरलता,सत्यता...
आज विजय नगर स्थानक में माहसाध्वी श्रीप्रतिभाश्रीजी म सा ने निंदा के ऊपर बहुत ही मार्मिक बात कही साध्वी श्री जी ने फरमाया कि व्यक्ति तीन प्रकार के होते हैं पहला निंदनीय है जो सिर्फ निंदा करता है सभी मे सिर्फ गलतियों को ही देखता है।दूसरा वंदनीय है जो अच्छे कार्यो की ओर देखता है व प्रशंसा करता है,तीसरा अभिनंदनीय जो अपनी उच्चता से श्रेष्ठतम कार्य करके सम्यक्त पुरुषार्थ करके मोक्ष को प्राप्त करता है निंदा करने वाले व्यक्तियों की दृष्टि सदा बुराइयां देखने में ही रहती है व्यक्ति को स्वयं की निंदा करनी चाहिए, जो व्यक्ति आत्म चिंतन से स्वाध्याय करता है जो स्व में रमण करता है वह निंदा से दूर रहता है स्व निंदा करने से मनुष्य केवल ज्ञान को प्राप्त कर सकता है जैसे मृगावती ने स्वयं निंदा की जिससे उसको केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई । साध्वी श्रीदीक्षिता श्री जी ने चौथे आरे दुखमा एवं सुखमा का वर्णन बताते हुए...
जय जितेंद्र, कोडमबाक्कम् वड़पलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज तारीख 21 जुलाई गुरुवार, परम पूज्य सुधाकवर जी मसा के मुखारविंद से:-धर्म और श्रद्धा के द्वारा श्रावक को क्या लाभ मिलता है…? जो श्रावक धर्म करता रहता है वह सांसारिक सुखों से निरस्त हो जाता है वह अणगार सुख में प्रविष्ट हो जाता है! जो भी व्यक्ति किसीको दुर्गति या विप्पत्ति से बचाये उसे धर्म कहते हैं। वस्तु का स्वभाव और धर्म अलग अलग होता है! पानी का स्वभाव निर्मलता, आग का स्वभाव उष्णता होता है! वैसे ही आत्मा का आनंद अहिंसा से है जो उत्कृष्ट धर्म है! धर्म कभी मंगल या अमंगल नहीं होता! वर वधु के शादी के फेरे पडने हो और वहां पर कोई विपत्ति आ जाए या किसी की मृत्यु हो जाए तो वह कार्य अमंगल हो जाता है लेकिन धर्म क़भी अमंगल नहीं होता ! हमारे 8 कर्म है, अगर आठों कर्म टूट जाए तो हम वीतरागी बन जाएंगे! धर्म से जीवन निखरता है, शाश्वत को प्...
पनवेल श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी श्री संयमलताजी म. सा.,श्री अमितप्रज्ञाजी म. सा.,श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में भक्तामर स्तोत्र के 21वे श्लोक का महामंगलकारी अनुष्ठान का आयोजन किया गया। धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासती संयमलता ने कहा- हमारा जीवन द्वंद्वात्मक है। संभवतः कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसके जीवन में द्वंद्व ना हो, समस्याएं ना आए। तनाव वर्तमान जीवन की सबसे बड़ी समस्या है। मंत्रों का जाप इन सारी समस्याओं और तनाव से मुक्त रखता है। महासती जी ने आगे कहा मंत्रा आध्यात्मिक जागरण में भी बहुत सहयोगी बनते हैं। इनका उपयोग केवल विघ्न निवारण के लिए ही नहीं, आध्यात्मिक चेतना के जागरण के लिए भी किया जा सकता है। आज के अनुष्ठान का लाभ श्री चंपालाल जी बाफना परिवार ने लिया। बैंगलोर से शांतिलाल जी खींवसरा, सोहनलाल जी दक ...
नागदा जं. निप्र- मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड़ एवं नितिन बुडावनवाला ने बताया कि धर्मसभा में महासति श्री दिव्यज्योतिजी म.सा. एवं पूज्य काव्याश्रीजी म.सा. ने कहा कि वर्तमान में सुख में सब साथ होते है परन्तु दुःख में कोई साथ नहीं होता। लेकिन जिनवाणी कहती है कि सुख में साथी बनिये अथवा मत बनिये लेकिन जब किसी के उपर दुःख, तकलीफ या समस्या हो उसका साथ अवश्य देना चाहिये एवं उसके निराकरण्एा हेतु जितना प्रयास कर सकते है उससे ज्यादा करना चाहिये। महासति ने आगे कहा कि आत्मा लगातार शरीर बदलती रहती है लेकिन थकती नहीं है। आत्मा में अनंत सुख है, आत्मा कभी भी दुःखी नहीं होती है लेकिन हम किसी को सुख देंगे तो सुख मिलेगा, दुःख देंगे तो दुःख मिलेगा। गुरूदेव ने आगे बताया कि मानव जीवन में ब्रम्हचर्य का अनंत महत्व है। यह महापुरूषो का गहना होती है। यह शूरवीरों का काम है इससे हमें अनंत उर्जा प्राप्त होती है। मीडिया...
श्रीरामपूर दि.21 (रमेश कोठारी) धर्म व कर्म अडीच अक्षरे आहेत.धर्म मोक्षाकडे नेतो तर कर्म नरकाची वाट दाखवतात.असे प्रतिपादन प्रज्ञाज्योती प्रखर व्याख्यात्या पू.श्री.विश्वदर्शनाजी म.सा यांनी केले. पू.विश्वदर्शनाजी प्रवचनात म्हणाल्या की,मनावर संयम कसा ठेवायचा धर्माचारणाकडे कसे वळावयाचे हे धर्म शिकवतो पण अशुद्ध कर्मामुळे नरकाच्या मार्गावर वाटचाल करावी लागते.धर्माने वागणाय्राला नेहमीच फळ चांगले मिळते.हे विसरु नका.कर्मामुळे सुख दुःख प्राप्त होते.म्हणून धर्माचारण करणे चांगले आहे. आज आपण नाती विसरत चाललो हे दुर्दैव आहे.आपल्याला जीवनरुपी कोरा कागद मिळाला आहे त्यावर चांगल्या विचारांचे पत्र लिहावे.त्यामुळे आनंदच मिळेल.चांगले कर्म चांगले फळ हे ठरलेलेच आहे.एकमेकांशी नाती टिकवली पाहीजेत.पुर्विच्या काळी पत्रव्यवहार लिहीण्याची पध्दत होती.पत्राव्दारे आपण आपल्या भावना, व्यथा,सुख दुःखाच्या गोष्टी दुसय्रा...