Featured Slider

जिस तरह से हम रोज कपड़े बदलते हैं उसी तरह हमारी आत्मा भी हर जन्म में नया शरीर धारण करती हैं: काव्याश्रीजी म.सा.

पूज्य महासती उपप्रवर्तिनी पूज्य श्री दिव्य ज्योतिश्रीजी म.सा.आदि ठाणा -6 के सानिध्य में के श्री महावीर भवन नागदा जंक्शन मे ज्ञान वर्धक प्रवचन की श्रृंखला निरंतर चल रही है जप, तप, एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रति योगिताओं का भी आयोजन शुरू हो गया है छोटे महासती पूज्य श्री काव्याश्रीजी म.सा.ने मधुर प्रवचन में फरमाया की जिस तरह से हम रोज कपड़े बदलते हैं उसी तरह हमारी आत्मा भी हर जन्म में नया शरीर धारण करती हैं हमारा मानव जन्म सूर्य की भांति है +बचपन बाल सूर्य के समान, युवावस्था दोप. तेज सूर्य के समान, और वृद्धावस्था सांध्य के ढलते सूर्य के समान होता है इसी प्रकार पूज्य महासती श्री दिव्यज्योति जी म.सा. ने फरमाया कि जब जीवन मे पाप कर्म का क्षय होता है तभी आत्मिक सुख की प्राप्ति होती है और ये”धर्म” के बैगर असंभव है धर्म कल्पवृक्ष के समान होता है संसार के सारे सुख एवं सार भूत तत्व”...

अध्यात्म की गीता उत्तराध्ययन सूत्र – साध्वी सुधा

जय जिनेंद्र, कोडम्बाक्कम वडपलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज 16 जुलाई शनिवार कोो सुधाकंवर जी म सा ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए 32 आगमों और जैन दर्शन में उत्तराध्यन सूत्र का महत्व बताते हुए कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र अध्यात्म की गीता है। जब शरीर गंदा हो जाता है तो पानी में डुबकी लगाने से शरीर साफ हो जाता है! वैसे ही भीतर के मैल को हटाने के लिए जिनवाणी रुपी गंगा की डुबकी लगानी चाहिए! उत्तराध्ययन सूत्र एवं विपाक सूत्र उस वसीयत के समान हैं जो परमात्मा ने अपने अंतिम समय में अपनी संतानों को दिया।  सुयशाश्रीजी म सा के मुखारविंद से:- आज का विषय:- इस संसार में सबसे महत्वपूर्ण और बेशकीमती चीज अगर कोई है तो वह है हमारा जीवन । हमारी उपलब्धियां, हमारी संपत्ति, हमारा ऐश्वर्य तब तक ही मायने रखता है जब तक की हमारा अस्तित्व है। यह सारी चीजें हमसे हैं, हम इन चीजों से नहीं है। परमात्मा की अनंत कृपा से हमे...

विनय ही धर्म है और जीवन का आधार भी —प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज

15 जुलाई खवासपुरा विनय ही धर्म संत शिरोमणी प्रवर्तक सुकन मुनि महाराज ने श्री मरूधर केसरी रूप सुकन दरबार मे श्रध्दांलूओ को सम्बोधित करतें हुये कहाँ कि जीवन को संवारने के अनेकों मार्ग है ! उनमे से विनय ऐसा गुण जो मानव मे आ जाये तो जीवन को बदलने मे देर नही लगती ! वह धर्म के द्वारा ही आ सकता है ! मानव के जीवन मे विनय और नम्रता आना जरूरी है वो धर्म के द्वारा ही जीवन मे आएगी ! विनय धर्म भी है और जीवन का आधार भी ! इसदौरान नानेश मुनि और हितेश मुनि ने भजन और सुविपाक सूत्र का वाचन करते हुये कहां कि जीवन मे सुख पाना है तो राग द्वेष माया को त्याग ने पर जीवन मे सुख पाया जा सकता है! श्री संघ के अध्यक्ष प्रसन्नचन्द कोठारी महामंत्री जे विजयराज कोठारी ने बताया कि धर्म सभा मे पीपाड़,ब्यावर,जौधपुर पाली,अजमेर,सुरत आदि अनेको क्षैत्रो से पधारे अतिथियों का संघ के सदस्यों द्वारा धर्म सभा मे सुकनमुनि, महेश मुनि,हरी...

बुजूर्गोकी छाया बडी चीज है, मनाच्या संतुलनासाठी संयम आवश्यक – पू .श्री. विश्वदर्शनाजी म .सा

श्रीरामपूर दि. 15 (रमेश कोठारी) वडिलधार्यांची छाया असणे हि भाग्याची बाब आहे. वडीलधारी माणसे ही दीपस्तंभासारखी आहेत.थोरांचे आशीर्वाद वाया जात नाही. वडीलधारी माणसे घरात असलीच पाहिजेत .म्हणूनच म्हणतात कि “बुजूर्गोकी छाया बडी चीज है” ! असे प्रतिपादन प्रखर व्याख्यात्या साध्वी पू .श्री. विश्वदर्शनाजी म .सा यांनी केले.       दादा गुरुदेव स्व. पू .श्री तिलोकऋषीजी यांचे पुण्यस्मृती दिनानिमित्त त्यांना वंदन करून त्यांनी सांगितले कि. इमारतीचा पाय बडी चीज है ! तिजोरीकी माया बंदी चीज है !तसेच बुजूर्गोकी छाया बंदी चीज है !प्रत्येकाने वडीलधाऱ्यांच्या आदर सन्मानाने मन ठेवा. त्यांना अपमानित करू नका. त्यांचे मार्गदर्शन घ्या .पूर्वीचे रीतिरिवाज ,चाली परंपरा बंद झाल्याने आज दुर्घटना वाढल्या आहेत . दादा गुरुदेव यांचे कार्याबद्दल सविस्तर माहिती प पू . विश्वदर्शनाजी म .सा यांनी प्रवचनातून दिली. त्यां...

सुख दुख हंसी खुशी हमारे अंदर है या बाहर.

कोडमबाक्कम वडपलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज ता: 15 जुलाई शुक्रवार, सुयशा श्रीजी मसा के मुखारविंद से:   हमें एक करोड़ की लॉटरी लगी है तो हम खुशी से फूले नहीं समायेंगे, अपने दोस्त नाते रिश्तेदारों को बताएंगे और कार, बंगला रिनोवेशन, पढ़ाई लिखाई के बारे में सोचेंगे हमें नींद भी नहीं आएगी! यह प्रकृति का नियम है कि अगर अधिक खुशी हो या अधिक दुख तो नींद नहीं आती! दूसरे दिन अगर वही न्यूज़पेपर में यह आ जाए कि कल के नंबर में थोड़ा सा करेक्शन है, और आखिरी नंबर दो नहीं चार है, हमारी सारी खुशियां फैल हो जाएगी और हम अत्यंत दुखी हो जाएंगे! हमारी स्थिति कल जैसे ही थी लेकिन एक समाचार ने हमें बहुत सारी खुशियां दें दी और एक समाचार ने हमें बहुत दुखी कर दिया! हमारे पास 1 दिन मोबाइल नहीं है तो भी हम परेशान हो जाते हैं! दृष्टांत:- एक सम्राट ने वृद्ध सन्यासी से (पुरोहित या intellectual) पूछा कि हमारे जीव...

प्रवचन माला का शुभारम्भ

इतिहास मार्तंड सामयिक स्वध्याय के प्रबल प्रेरक आचार्य भगवंत *1008 पूज्य गुरुदेव श्री हस्तीमल जी म.सा.* के सुशिष्य एवं ध्यान योगी , आचार्य सम्राट *पूज्य श्री डॉ. शिव मुनि जी म.सा.* व श्रमण संघीय सलाहकार ,पूज्य प्रवर्त्तक श्री सुकन मुनि जी म.सा. के आज्ञानुवर्ती रोचक व्यख्यानी , पंडित रत्न पूज्य गुरुदेव श्री ज्ञान मुनि जी म.सा.मधुर वक्ता पूज्य श्री लोकेश मुनि जी म.सा* आदि ठाणा के शुभ सान्निध्य में चातुर्मासिक पर्व शुरू होगया. चातुर्मास के पहले दिवस पर पूज्य लोकेश मुनिजी ने अपने उद्बोद्धन में कहा की चातुर्मास न की जैन दर्शन बल्कि वैदिक परम्परा का भी हिस्सा हैं. इस समय में जीवो की उत्पत्ति होने के कारण प्रभु महावीर ने साधु साध्वी को एक ही जगह रुकने व धर्म आराधना व आत्मकल्याण का लक्ष्य रखे. आत्मा ही परमात्मा हैं और भवी जीव अपने पुरुषार्थ से आत्मा कल्याण कर सकता हैं. आत्मा भाव में जागृति से जीव म...

पद्मावती माता एकासना

वादिमान मर्दक चर्चाचक्रवती दादा गुरुदेव *श्री नंदलाल जी महाराज* की पुण्यतिथि पर दो दिवसीय कार्यक्रम महाश्रमण संथारा साधक प्रवर्तक गुरुदेव श्री रमेश मुनि जी महाराज के सुशिष्य परम पूज्य दिवाकरीय संस्कार मंच प्रणेता संस्कार सूर्य प.पू. श्री सिद्धार्थ मुनीजी म.सा. एवम मधुर गायक प.पू. श्री शालीभद्र मुनीजी म.सा.* के सानिध्य में   शुक्रवार १५/०७/२०२२ को पद्मावती माता एकासना होने जा रहे है!   *एकासना की व्यवस्था* जैन स्थानक राणा प्रताप चौक में कई गई है.   *लाभार्थी परिवार* सतिषकुमारजी उरवेशजी कोठारी परिवार.   *स्थान* जैन स्थानक राणा प्रताप चौक सिडको नाशिक.   16/7/2022 को *सामयिक दिवस / दोपहर 2 बजे *प्रश्न मंच* टीम वाइज   *विनित* श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ. सिडको सिडको जैन महासंघ. ▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬ *🌹स्वागत आपका सौभाग्य हमारा।🌹* ▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬

गुरूंच्या हृदयात जागा मिळवणारेच खरे यशवंत : साध्वी विश्वदर्शनाजी म.सा

 श्रीरामपूर दि. 14 (रमेश कोठारी) गुरूंशिवाय जीवनाला अर्थ नाही. गुरूंच्या मार्गदर्शनानेच जीवन सफल होते. गुरु अंधार दूर करून प्रकाश दाखवितात .जे गुरूंच्या चरणी बसतात ते भाग्यवंत पण गुरूंच्या हृदयात जे जागा मिळवितात तेच खरे यशवंत असे विचार जैन स्थानकमध्ये प्रवचनातून प्रखर व्याख्यात्या प.पु.विश्वदर्शनाजी यांनी व्यक्त केले.  गुरूंची महती विषद करताना त्या म्हणाल्या कि, गुरु हे भूतकाळातील दुवा आणि भविष्यकाळातील दिवा असतात. गुरुकृपा होते हि भाग्याची गोष्ट आहे. गुरुचरण,स्मरण व वंदन हि त्रिसूत्री लक्षात ठेवावी.भक्त हि लहान नौका तर गुरु हि मोठी नौका आहे. मोठी नौका लहान नौकेला आधार देत नदी किंवा समुद्र पार करते.गुरूंची निंदा करू नका.  आपल्या जीवनात माता पिता हे आपले प्रथम गुरु आहेत. गुरूच्या प्रति अंतःकरणापासून प्रेम असेल तर गुरूंपासून आपल्याला ऊर्जा मिळते .गुरुवर अटळ श्रद्धा ठेवा. तेच निश्चित मार्ग द...

चातुर्मास में जप, तप, ध्यान, साधना, दानशील का बड़ा महत्व है- महासति दिव्यज्योतिजी म.सा.

नागदा जं. निप्र- स्थानकवासी जैन समाज के मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड एवं नितिन बुडावनवाला ने बताया कि चातुर्मास के प्रथम दिन महावीर भवन में महासति पूज्य दिव्यज्योतिजी म.सा. ने कहा कि यह चातुर्मास का पर्व में जप, तप, ध्यान, साधना, दान, शील का बहुत बड़ा महत्व होता है क्योंकि इन चार माह में हमारे मन को विचलीत कर रहे कांटे को, कचरे को, कषायों को, बैरभाव को खत्म कर हम पुनः समभाव से जीवन व्यतीत करते है। महासति काव्याश्रीजी एवं पूज्य नाव्याश्रीजी के गुरू महिमा पर मधुर स्तवनी की प्रस्तुती पर सभी का मन मोह लिया।  धर्मसभा में महासति नाव्याश्रीजी ने कहा कि मानव को अंत समय में संत दर्शन सानिध्य एवं धर्म मंत्रो से मोक्ष की प्राप्ती होकर प्रभु चरणों में उच्च स्थान की प्राप्ति होती है। आपने कहा कि गुरू से ही जीवन शुरू होता है। बाल्यकाल में माता गुरू का कार्य करती है बचपन में पिता गुरू का कार्य करते है उ...

बिना भक्ति के मानव को मुक्ति नही मिलेगी– प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज 

14 जुलाई खवासपुरा बिना भक्ति के संसार से मुक्ति नही मिलने वाली गुरूवार को संत शिरोमणी प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने श्री मरूधर केसरी रूप सुकन दरबार मे विशाल धर्मसभा मे उपस्थित गांववासियों जैन समाज से कहां कि परमात्मा की वाणी जीवंत वाणी है जिनवाणी को सुनकर करोड़ो भव जिवों ने संसार से मुक्ति पाई ! चोरासी लाख योनियों मे मानव योनी ही ऐसी योनी है जिससे संसार के जन्म मरण के चक्रो से छुटकारा पाया जा सकता है तो वह मनुष्य योनी से मर्यादित होकर धर्म आराधना और साधना मे सलंग्न रहने वाला प्राणी ही संसार सागर से भव सागर को पार करवा पाएगा! युवाप्रणेता महेश मुनि, हरीश मुनि,नानेश मुनि,हितेश मुनि आदि सभी संतो ने कहां कि साधना वो मार्ग है जिससे प्राणी अपने जीवन का उध्दार और कल्याण कर पाएगा ! श्री संघ खवासपुरा के मंत्री अशोक कोठारी ने बताया कि प्रवर्तक सुकनमुनि और सभी संतो के प्रवचन 10 बजे से 11 बजे तक दोपहर 3 ब...

अमूत मूनि का कल्प चातुर्मास प्रवेश हूआ सम्पन्न

चार महीने धर्म से जूडने का समय -चातूर्मास गुरूवार अलवर पेट स्थित श्री उच्चब राज गौतम चंद ललवानी हाउस में उपपर्वतक अमूत मूनि अखिलेश मूनि,वरूण मूनि कल्प चातुर्मासार्थ प्रवेश श्री मरूधर केसरी रूप-सुकन अमूत चातुर्मास समिति के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। इससे पूर्व आध्यात्मिक प्रवेश शोभा यात्रा कोऑपरेटिव कॉलोनी से तीर्थंकरों एवं गुरु भगवंतो के जयकारे लगाते हूए निकलकर विभिन्न बाजारों से होती हुई लालवानी हाउस पहुंची। जैन कॉन्फ्रेंस युवा शाखा, महिला शाखा, अलवार पेट ,मइलापूर ,टी नगर आदी श्री संघो शोभायात्रा में विशेष रूप से उपस्थित रहे। तत्पश्चात शोभा यात्रा धर्म सभा में परिवर्तित हुई । अखिलेश मुनि ने सर्वप्रथम मंगलाचरण किया, एवम शांतिनाथ प्रभु , गुरु मरुधर केसरी आदि पर स्तवन का कर शुभारंभ किया लालवानी परिवार की बहू एवं बेटियों ने स्वागत गीत गाया । अतिथी स्वागत भाषण के माध्यम से श्री आनंद मल छल्लाणी...

अवसर को पहचानने वाले का ही जीवन सफल होता हैः- साध्वी श्री मंगलप्रभाजी

जीवन में अवसर बार-बार नहीं आते है और जब आते है उसे पहचानना आवश्यक होता है, जो इंसान अवसर को पहचान लेता है और अवसर का सदुपयोग करता है तब उसका जीवन सफल हो जाता है। चातुर्मास भी हमारी आत्मा का कल्याण करने का अवसर है, इस अवसर को पहचान कर जो श्रावक-श्राविका जिनवाणी, वीतराग वाणी, तप,ध्यान,उपवास,ज्ञान, दान,शील का पालन करते है, उनकी आत्मा का कल्याण हो जाता है और उनका जीवन सफल हो जाता हैं। उक्त उद्गार श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद, के तत्वावधान में काचीगुड़ा स्थित श्री पूनमचंद गांधी जैन स्थानक भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपप्रवर्तिनी महासती श्री मंगलप्रभा जी म.सा ने व्यक्त किये। संघ के संघपति स्वरूपचंद कोठारी ने आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए महासती जीवन जीने की कला को समझाते हुए कहा कि मानव जीवन बार-बार नहीं मिलता है और एक बार ही मिलने वाले मानव ...

Skip to toolbar