नागदा जं. निप्र- स्थानकवासी जैन समाज के मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड़ एवं नितिन बुडावनवाला ने बताया कि धर्मसभा में दिव्यज्योतिजी म.सा. एवं पूज्य काव्याश्रीजी म.सा. ने कहा कि इस संसार में सभी अकेले आये है और अकेले ही जायेंगे। इस दुनिया में हमारा कोई नहीं है चाहे वह कितना ही सगा संबंधी रिश्तेदार दोस्त है, कोई भी हमारा नहीं है। केवल ईश्वर, भगवान, परमात्मा हमारे है। सारे रिश्ते नाते झूठे है। आपने बताया कि शीलवान, बलशाली, रूपवान, बुद्धिशाली एवं दयावान होते है। धर्मसभा में पूज्य साध्वी नाव्याश्रीजी ने कालव केसरी पूज्य गुरूदेव सौभाग्यमलजी म.सा. के जीवन पर स्तवन धार्मिक गीत से सभी का मन मोह लिया। मीडिया प्रभारी ने बताया कि तपस्या में 2 उपवास मोनिका जैन वर्षीतप किशोर राठोड़ के चल रहे है। जाप की प्रभावना का लाभ तरूणा सुशील कांठेड ने लिया है। संचालन श्रेणीक बम ने किया। अतिथि सत्कार राजेन्द्र कांठेड ...
तत्व चिंतक श्री विजयश्रीजी म सा ने आज प्रवचन में धर्म कार्य भावों से करने का महत्त्व बतलाया। यदि धर्म कार्य करने के बाद आप पछतावा कर लो तो उसका महत्त्व समाप्त हो जाता हैं। शालीभद्रजी ने अपने पूर्व भव में बाल्यकाल में मुनिराज को भावों से खीर बहराई, जिसके फलस्वरूप उन्हें देवलोक तथा बाद में शालीभद्र का भव मिला। आशुकवि पूज्या गुरूवर्या श्री कमलेशजी म सा ने आज औलाद, धन तथा औरत के उदाहरण से धर्म के बारे में बतलाया। पुत्र को कितना भी धन दो, वह कुछ समय तक ही याद रखेगा। पत्नी जो धर्म के मार्ग पर ले जाए वही धर्मपत्नी। यदि गुरुदेवों पर श्रद्धा रखोगे, उनके मंगल पाठ पर श्रद्धा रखोगे तो अवश्य मंगल ही होगा। आनन्द सेठ चरित्र: बसन्तपुर नगर में राजेन्द्र राजा का राज था। उसके नगर में एक धर्म परायण सेठ रहता था, जिसका नाम आनन्द सेठ था। उसकी पत्नी चम्पा भी धर्म परायण महिला थी। उनके घर मे इतना सोना था कि नहाने क...
पनवेल श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी श्री संयमलताजी म. सा.,श्री अमितप्रज्ञाजी म. सा.,श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासती संयमलता ने अंग्रेजी वर्णमाला के द्वितीय अक्षर ‘B’ से ब्रह्मचर्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा- महापुरुषों ने ब्रह्मचर्य को जीवन और अब्रह्मचर्य को मृत्यु कहा है । ब्रम्हचर्य अमृत है और अब्रह्मचर्य जहर के समान है। भोग के युग में, फैशन के युग में, कलयुग में ब्रम्हचर्य का पालन होना कठिन है। विषय वासना पर ब्रेक लगाना कठिन है। महासती ने आगे कहा आज टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, फेसबुक के कारण व्यक्ति दिन-रात भागों में आसक्त रहता है। आज के जमाने के व्यक्ति का मन दिन-रात अश्लील बातों में, विषय विकार में डूबा रहता है। विषय विकार के सेवन के कारण व्यक्ति शक्ति से दुर्बल हो...
श्रीरामपूर दि. २२ : महिलांना स्वातंत्र्य असले तरी त्याचा गैरवापर करू नये. भारतीय संस्कृती जगात अग्रभागी आहे.आपली वेशभूषा,वाणी,व्यवहार,हा संस्कृतीला धरूनच असला पाहिजे. भारतीय महिलांनी संस्कृती जपली तर भावी पिढीवर चांगले संस्कार होतील असा उपदेश जैन स्थानकमध्ये चातुर्मास निमित्त सुरु असलेल्या प्रवचनातून प्रज्ञाज्योती प्रखर व्याख्यात्या पु.श्री .विश्वदर्शनाजी म.सा यांनी दिला. महिला या शब्दाचे महत्व विषद करताना त्या म्हणाल्या कि,पूर्वी घागरा ओढणी ,घुंगट असा स्त्री चा पेहेराव होता काळा नुरुप तो बदलला आहे. आता साडी हा पेहेराव बनला आहे. पदर अंग झाकण्यासाठी असतो हे आजच्या महिला विसरत आहेत. हि चांगली बाब नाही. भारताच्या माजी राष्ट्रपती सौ. प्रतिभाताई पाटील व स्व. सुषमा स्वराज यांनी भारतात तसेच विदेशात असतानाही भारतीय संस्कृती जपली महिलांपुढे आदर्श ठेवला देशाची शान वाढवली त्यांचा आदर्श महिलांनी घ्याव...
चेन्नई ; संस्था शिरोमणि जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के अंतर्गत महासभा कार्यसमिति टीम तमिलनाडु की संगठन यात्रा के क्रम में वेलूर की यात्रा की। महासभा द्वारा तेरापंथ सभा, वेलूर अध्यक्ष श्री जयचंदलाल सुराणा की अध्यक्षता में पदाधिकारियों तथा सदस्यों की उपस्थिति में मीटिंग आयोजित हुई। सभाध्यक्ष ने महासभा टीम एवं उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का स्वागत किया। चेन्नई से समागत महासभा तमिलनाडु (उत्तर) आंचलिक प्रभारी श्री देवराजजी आच्छा ने सभी का स्वागत करते हुए महासभा द्वारा करणीय कार्यों की जानकारी प्रदान की गई। कार्यसमिति सदस्य श्री विमलजी चिप्पड एवं श्री ललितजी दूगड़़ ने सभी परिवारों द्वारा शनिवार सामायिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के संचालन हेतु सक्रिय रहने के लिए प्रेरणा दी तथा समय-समय पर वेलूर की तरफ चरित्र आत्माओं का आवागमन होता रहता है, उसके लिए मार्गवर्ती सेवा में सभी के सहयोगी बन...
नागदा जं. निप्र- मीडिया प्रभारी महेन्द्र कांठेड़ एवं नितिन बुडावनवाला ने बताया कि धर्मसभा में महासति श्री दिव्यज्योतिजी म.सा. एवं पूज्य काव्याश्रीजी म.सा. ने कहा कि आज मानव लोभ, लालच से वशीभूत होकर धन सम्पत्ति जो उसकी नहीं है, के उपर भी अपना अधिकार एवं वर्चस्व जताकर उस पर कब्जा जमाने का प्रयास निरंतर करता रहता है। जो अधर्म होकर इस लोक एवं परलोक दोनो को खराब कर केवल कर्मो का बंधन करता है साथ ही अनीति से आया धन सम्पत्ति जैसी आती है वैसी चली जाती है। आज धर्मसभा में मानव केसरी पूज्य सौभाग्यशाली म.सा. की 38वां पुण्य स्मृति दिवस पर गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया । गुरूदेव ने कहा कि महापुरूषो का उपकार कभी भूलना नहीं चाहिये। पूज्य काव्याश्रीजी म.सा. बहुत ही सुन्दर स्तवन की प्रस्तुति देकर सभी श्रावक श्राविकाओं का मन मोह लिया। महावीर भवन में पदमावती देवी के जाप के सामुहिक एकासने का आयोजन किया गया जि...
कोडमबाक्कम वड़पलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में विराजित साध्वी सुधा कंवर आज धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र के 29वें अध्ययन में धर्म और श्रद्धा का विश्लेषण! श्रद्धा का मतलब विश्वास, आस्था, अमृत, प्राणवायु है, परिवार, धन और सुख मिलना सुलभ है लेकिन श्रद्धा का मिलना दुर्लभ है, श्रद्धा हमारे शरीर की रीढ की हड्डी है! बिना रीढ की हड्डी हमें निष्प्राण बना देती है,कण-कण में श्रद्धा का संचार होना चाहिए और मजबूती होनी चाहिए,सच्ची श्रद्धा गाय के दूध के समान और मिथ्या श्रद्धा गाय के खून के समान होते हैं,श्रद्धा तो वह संजीवनी बूटी है जो भवभव को सुधार देती है,हनुमान द्वारा “श्री राम” लिख कर फेंका गया पत्थर तिर जाता है और रामद्वारा फेंका गया खाली पत्थर भी डूब जाता है! प.पू.सुयशाश्री के मुखारविंद से धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वियोग:-जहां संयोग है वहां वियोग है! द...
जैन दिवाकर भवन में चार्तुमास हेतु विराजित महासती प्रियदर्शना जी महाराज साहब एवं कल्पदर्शना जी महाराज साहब ने आज मालव केसरी प्रसिद्ध वक्ता सोभाग्यमल जी महाराज साहब को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए पैसठिया यंत्र का जाप किए। अति हर्ष उल्लास के साथ संपूर्ण श्री संघ ने गुरुदेव का 38वां स्मृति दिवस मनाया और इसी कड़ी में महासती जी ने बताया कि महापुरुषों का जीवन एक कमल के फूल के समान होता है जिसकी सौरभ सुगंध हमेशा आती रहती है।सोभाग्य गुरुदेव जिनके माता-पिता का बचपन में ही देवलोकगमन हो गया और खमेसरा परिवार खाचरोद में उनका पालन-पोषण हुआ। पुज्य किशनलाल जी महाराज साहब ने बचपन में ही उनके चेहरे को देख कर बता दिया था कि यह बालक बड़े होकर अपने कुल का और श्रमण संघ का नाम रोशन करेगा और गुरुदेव ने एक कारीगर बनकर एक ऐसी मूर्ति का निर्माण किया जो आज जगवंदनीय बन गई और उनके जीवन को निखार दिया। गुरुदेव सौभाग्य मु...
पनवेल श्री संघ में विराजित श्रमण संघीय जैन दिवाकरिया महासाध्वी श्री संयमलताजी म. सा.,श्री अमितप्रज्ञाजी म. सा.,श्री कमलप्रज्ञाजी म. सा.,श्री सौरभप्रज्ञाजी म. सा. आदि ठाणा 4 के सानिध्य में भक्तामर स्तोत्र के 21वे श्लोक का महामंगलकारी अनुष्ठान का आयोजन किया गया। धर्म सभा को संबोधित करते हुए महासती संयमलता ने अंग्रेजी वर्णमाला के द्वितीय अक्षर ‘B’ से ब्रह्मचर्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा- सबसे श्रेष्ठ तप ब्रम्हचर्य है। तृप्ति भोग में नहीं त्याग में है। जीवन ऊर्जा को भोग में नहीं, आत्म साधना में लगाए। सब दुखों से मुक्त होने के लिए ब्रह्मचर्य ही उत्कृष्ट साधन हैं। महासती ने आगे कहा -काम भोग विष सेवन समान है, भोगी पुरुष सदा रोगी ही बना रहता है, वह कभी भी योगी और सुखी नहीं हो सकता। ब्रम्हचर्य ही संपूर्ण शक्तियों का मूल मंत्र है। कामी पुरुष जीते जी ही नरक का अनुभव करने लगता है। ...
यहां चंद्रप्रभु जैन नया मंदिर ट्रस्ट में विराजित श्री उदयप्रभ सूरीश्वरजी म. सा. ने शुक्रवार को अपने प्रवचन में कहा कि महाभारत के अनेक प्रसंगों में से एक प्रसंग धर्म निष्ठा एवं न्याय निष्ठा का विशिष्ट प्रेरक है। वह इस तरह की कौरव पांडव के युद्ध के पलों में दुर्योधन नित्य मां गांधारी के पास जाकर उनके चरण स्पर्श करके उनसे युद्ध में जय पाने के लिए आशीर्वाद मांगता था। सर पर हाथ रखते हुए माता गांधारी यह वाक्य बोलते “यत्र धर्मस्नत्र जय” यानी जहां पर धर्म है वहां विजय की प्राप्ति होती है। इतना स्पष्ट न्याय पूर्ण संदेश नित्य दुर्योधन को मिलने के बावजूद वह अपनी मनोनीति से हटा नहीं न ही कदाग्रह को छोड़ पाया। अधर्म में ही जुड़ा रहा जबकि मां गांधारी को अधर्म यानी युद्ध में कोई रस नहीं था वे उदास थी। हम अपने जीवन में प्रस्तुत घटना से यह सीख ले कि अति विषम स्थिति में भी अधर्म का सहारा न ले बल...
भांडुप मुलुंड उपसंघ में परम पूज्य गुरुदेव अभिग्रह धारी रोड जी स्वामी और श्रमण संघ के निर्माणकर्ता मालव केसरी गुरुदेव श्री सौभाग्य मलजी महाराज साहेब का पुण्य स्मरण दिवस मनाया गया! पूज्य महासती जी ने आज धर्मसभा में परम पूज्य गुरुदेव रोडजी स्वामी और मालव केसरी सौभाग्यमलजी म.सा. का जीवन वृतांत फरमाया की कैसे कठोर अभिग्रह धारी थे रोड जी स्वामी और उन्होंने मेवाड़ की परंपरा के लिए अपना जो योगदान दिया ! उसको स्मरण किया उनके चरणों में भावांजलि समर्पित की साथ ही मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्य मलजी महाराज साहब के पुण्य स्मरण पर महासती जी ने गुरुदेव के जीवन को हर पहलू से समझाते हुए बताया कि जीवन में मालव केसरी श्री सौभाग्यमल जी म. सा . ने पहला तप आंयबिल का किया और जब गोचरी के लिए गए तो श्रावक में अचानक लड्डू वहरा दिया अब उन्हें लड्डू से आंयबिल करना पड़ा बूंदी के लड्डू की मिठास उनके रोम रोम में ऐसी ब...
–श्रीभैरव–पद्मावती महायज्ञ में दी जा रही सूखे मेवे, रत्न, कमल पुष्पों इत्यादि की आहुतियां –श्री पार्श्वपद्मावती तीर्थ धाम कृष्णगिरी में मंत्रों की गूंज, देवी भागवत कथा प्रसंगों से भक्त हो रहे आल्हादित कृष्णगिरी। श्री पार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थधाम कृष्णगिरी में श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा वाचन के साथ यज्ञ हवन में वैदिक मंत्रों की गूंज ने आल्हादित करने वाले भक्तिमय माहौल को सूवासित कर दिया है। शक्तिपीठाधीपति, राष्ट्रसंत, मंत्र शिरोमणि, भैरव देव के साधक एवं मां पद्मावती के उपासक परम पूज्य गुरुदेवश्रीजी डॉ वसंतविजयजी महाराज साहेब की पावन निश्रा में श्रीभैरव–पद्मावती महायज्ञ में भक्तों के कल्याण हेतु बीज मंत्रों के साथ आहुतियां दी जा रही है। इसके लिए स्थानीय गुरुभक्त श्रद्धालु जनों के साथ साथ देश-विदेश से भी कोरियर पार्सल से सूखे मेवे, घी, सरसों, सुपारी, गूगल, हल्दी सहित अनेक दुर्लभ व...