जय जितेंद्र, कोडमबाक्कम् वड़पलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज तारीख 23 जुलाई रविवार, परम पूज्य सुधाकवर जी मसा के मुखारविंद से:-उत्तराध्ययन सूत्र के 29वें अध्ययन में साधर्मिक भक्ति का विश्लेषण! सा धार्मिक भक्ति करने से उनकी स्तुति गुणगान करने से आत्मा दुर्गति में नहीं जाता है सागर में हमारे आंगन में आया हुआ कल्पवृक्ष है साधर्मिक की यथा शक्ति सेवा भक्ति करनी चाहिए! साधर्मिक अर्थात जिसका समान धर्म हो समान आचार विचार हो! साधर्मिक की आर्थिक स्थिति सही नहीं हो तो उसका पूर्ण सहयोग करना जैसे चिकित्सा के क्षेत्र में, शिक्षा के क्षेत्र में उसकी सहायता करना। यदि उसका मन अशांत हो तो प्रीति जनक मधुर वचन बोलकर उसे सांत्वना प्रदान करना। साधर्मिक भक्ति करने से दर्शन की विशुद्धि होती है, आंतरिक भावों में निर्मलता आती है, अंतः करण की वृत्तियां सुकोमल बनती है। प.पू.सुयशा श्रीजी के मुखारविंद से:-मनुष्य की ...
श्रमणसंघीय सलाहकार राष्ट्र संत पूज्य गुरुदेव डाँक्टर राममुनीजी मारासा निर्भय विकासमुनीजी मारासा शास्त्री आदि ठाणा का चातुर्मास् चेंबुर संघ मे नालंदा हाल स्थानक मे बहुत ही आनंद मय धर्म आराधना के साथ चल रहा है। हर रोज प्रवचन मे बहुत ही अच्छी संख्या मे उपस्थिति रहती है। आज दिनांक 24/07/22 रविवार को गुरुदेव ने प्रवचन मे धर्म और दान बारे में जानकारी दी आगे चेंबुर संघ मे श्रमण संघीय दिव्तीय आचार्य सम्राट आंनदरीषीजी मारासा की जन्मजंयती पर तिन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। जिसमे 29/07 शुक्रवार को एकासन दिवस 30/07 शनिवार को जाप दिवस ओर 31/07 रविवार को 108 भिक्षु दया का विशेष आयोजन के रूप मे मनाया जाएगा। चातुर्मास् मे वर्षीतप एकांतर अठाई तेला बेला उपवास आयंबिल एकासना की तपस्या की लडी भी निरंतर जारी है। आज चेंबुर संघ चातुर्मास् के हर रोज की सेवा देने वालो मे आज की सेवा दिनेशजी बोहरा दिनेशज...
जालना : जप, तप वह शक्ति है जो कर्म के क्षरण को नष्ट करती है और जीवन की ऊर्जा भी जप, तप में छिपी है| कहा जाता है कि चातुर्मास महापर्व के दौरान किया गया यह पुण्य कार्य व्यर्थ नहीं जाता है| डॉ. श्री. गौतम मुनिजी म. सा. उन्होंने यहां बात की| गुरु गणेशनगर के तपोधाम में चातुर्मास के अवसर पर दादा गुरुजी श्री नंदलालजी म. सा और गुरुदेव प्रतापमलजी म. सा. उनकी स्मृति में सवा लाख लोग जप का आयोजन किया गया| इसलिए तपोधाम में आज कोई प्रवचन नहीं हुआ| डॉ. श्री. गौतम मुनिजी म. सा. बहुत संक्षिप्त में मार्गदर्शन किया| इस समय बेंच पर अगमज्ञाता श्री. वैभवमुनिजी म. सा , उपदेश प्रभावक म. सा श्री. दर्शन प्रभाजी म. सा सेवाभावी श्री गुलाबकंवरजी म. सा सेवाभावी श्री हर्षिताजी म. सा मौजूद थे| दादा गुरुजी श्री. नंदलालजी म. सा. और गुरुदेव प्रतापमलजी एम. सा. इस अवसर पर उनकी स्मृति में डेढ़ लाख लोगस जाप के सम्मान में लकी ड्र...
हितोपदेश प्रचार करना बहुत आसान काम है: परम पावन डॉ. श्री गौतम मुनि जी म.सा जबकि दासियों को अच्छा इनाम मिलता था – परम पूज्य श्री वैभवमुनिजी म.सा। जालना : किसी को उपदेश देना तो बहुत आसान है पर उसका पालन करना बहुत कठिन है, इसलिए उपदेश देने की कला सबके बस की नहीं है. भगवती सूत्र भी उपदेश की जानकारी देता है। यह एक कहावत है कि व्यक्ति को अपने तरीके से इसका पालन करना चाहिए। ईसा पूर्व डॉ। श्री। गौतम मुनिजी एमएससी उन्होंने यहां बात की। वे गुरु गणेश नगर के तपोधाम में चातुर्मास के अवसर पर आयोजित प्रवचन को संबोधित कर रहे थे। इस समय मंच पर इस बार प्रवचन प्रभावित करने वाले पी. ईसा पूर्व श्री। दर्शन प्रभाजी एम. एसए सेवाभावी पी. ईसा पूर्व श्री गुलाबकंवरजी एम. सा सेवाभावी पी. ईसा पूर्व श्री हर्षिताजी एम. सा वह मौजूद था। आगे बोलते हुए, पी. ईसा पूर्व डॉ। श्री। गौतम मुनिजी एमएससी उन्होंने कहा कि ...
कृष्णगिरी। श्री पार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थ धाम कृष्णगिरी में श्रावण मास विशेष 29 दिवसीय भक्ति आराधना एवं यज्ञ महोत्सव के नौवें दिन यज्ञ कर्म को आत्मा को श्रेष्ठ कर्म करने वाला बताते हुए यागविधान, आहुति, भैरव–भैरवी मुद्रा सहित श्रीमद् देवी भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख हुआ। शक्तिपीठाधिपति, राष्ट्रसंत, सर्वधर्म दिवाकर परम पूज्य गुरुदेवश्रीजी डॉ वसंत विजय जी महाराज साहब ने शनिवार को पांच प्रकार के प्राण वायु एवं आहुति विधान की व्याख्या की। उन्होंने मन के पापों की आहुतियां देकर निवृत्त होने की सीख देते हुए कहा कि यज्ञ में विनय, विवेक के साथ श्रद्धा व उपादान भी जरूरी है। भगवान नारायण ने भी देवी मां पद्मावती का यज्ञ किया था। इस दौरान पूज्य गुरुदेव ने कहा कि किसी मंदिर, तीर्थ क्षेत्र आदि में परमात्मा की प्रतिमा अथवा गुरु के समक्ष आंखें मूंद कर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब दे...
मधुकर मुळे: चातुर्मास : परम पावन डॉ. श्री गौतममुनिजी म.सा. इनका उपदेश जालना : आत्मा को बचाने के लिए मोह, माया से दूर हो जाना चाहिए| इसके लिए मां का होना बहुत जरूरी है| मां बच्चे से जो कहती है, ठीक ही कहती है| इसलिए कहावत है कि जीवन को मोह से बचाने के लिए मां का होना बहुत जरूरी है| प.पू. डॉ. श्री. गौतम मुनिजी म.सा. उन्होंने यहां बात की| वे गुरु गणेश नगर के तपोधाम में चातुर्मास के अवसर पर आयोजित प्रवचन को संबोधित कर रहे थे| इस समय मंच पर प्रवचन प्रभावित करने वाले श्री दर्शन प्रभाजी म. सा., सेवाभावी श्री गुलाबकंवरजी म. सा. सेवाभावी श्री हर्षिताजी म. सा. वह मौजूद था| आगे बोलते हुए, डॉ. श्री| गौतम मुनिजी म. सा. उस ने कहा, तीर्थंकरों ने संघ का निर्माण क्यों किया? अस्तित्व के लिए संघ आवश्यक है| मां भी जरूरी है| ऐसे मित्र बनाओ जो दूसरे के दुख में सहायक हो| उसके लिए जिनवानी की बात सुननी चाहिए| जो ...
महावीर इन्टरनेशनल चेन्नई मेट्रो द्वारा दिनांक 22 जुलाई 2022, शुक्रवार को महावीर आई व हेल्थकेयर सेन्टर, पट्टालम में मास्टर हेल्थ चेक अप केम्प का आयोजन किया गया। शिविर में 14 जनों की कीडनी, थाइरॉइड, हार्ट, इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राम बी पी व सुगर, हेमोग्राम, लिवर आदि 52 तरह की जांच लेब टेक्नीशियन वीजयकुमार व लीलावती, परामेश्वरी टीम द्वारा कि गई । साथ ही 84 लोगो की नेत्र जांच भी की गई । 54 जनो को चश्मा बनाकर दिए जाएगें तथा 17 जनों का मोतियाबिंद आपरेशन अग्रवाल आई हास्पीटल में करवाया जाएगा। 84 लोगो की रक्तचाप व मधुमेह जांच की गई 19 लोगो को आँखों की दवाई वितरण की गई। शिविर मे सचिव दिलीप मेहता, सह सचिव अशोक नाहर, राजेंद्र खारीवाल, पूनमचंद मांडोत, सुरेन्दर कातरेला, रिटा खारीवाल, आदि का सहयोग सराहनीय रहा । यह जानकारी चेयरमैन ज्ञानचंद कोठारी ने दी ।
श्री चन्द्रप्रभु जैन नया मन्दिर ट्रस्ट, श्री जैन आराधना भवन, चेन्नई में उद्धबोधित प्रवचन के मुख्य अंश ➡️परिस्थिति का सुधार कर्म सता के हाथ मे हैं,मनस्थिति अपने हाथ मे हैं। ➡️गलत काम करने का मन भी हो तो अच्छे आदमी के पास सलाह लेना। ➡️पदार्थ अनंत है तो इच्छा उस से भी ज्यादा अनंत हैं। ➡️ईच्छा के ऊपर विराम लगाने की ताकत किसी के अंदर नही है ,पदार्थ के ऊपर विराम लगा सकते हैं।
आज विजयनगर स्थानक भवन में प्रतिभाश्रीजी म सा ने सामायिक के महत्व पर विस्तार से समझाते हुए कहा कि शुद्ध सामायिक में इतनी शक्ति है कि इससे जीवात्मा मोक्ष को प्राप्त कर सकती है।साध्वीश्री ने पुण्या श्रावक की।सामायिक का उदाहरण देकर बताया कि जब परमात्मा की आज्ञा से श्रेणिक राजा पुण्या श्रावक की सामायिक खरीदने गया तो पता चला कि सृष्टि की कोई ताकत इसकी सामायिक का मोल नहीं चुका सकती है सिर्फ उसकी दलाली के लिए ही नो स्वर्ण पर्वत का मोल बताया।सामायिक करने से व्यक्ति को समभाव की प्राप्ति होती है।सामायिक का शाब्दिक अर्थ बताते हुए कि साधना, माला,यतना व कल्याण ही सामायिक का अर्थ है।जिससे श्रावक पहली सिद्धि को प्राप्त कर सकता है। साध्वी दीक्षिता श्री जी ने आगमों में प्रतिभाश्रीजी म सा व छठे आरे का विवेचन सुनाते हुए कहा कि जँहा पांचवे आरे में हर तरफ पाखंडी व्यक्ति ज्यादा होंगे तथा आचार्य विभिन्न संप्रदायो...
जय जितेंद्र, कोडमबाक्कम् वड़पलनी श्री जैन संघ के प्रांगण में आज तारीख 23 जुलाई शनिवार , परम पूज्य सुधाकवर जी मसा के मुखारविंद से:-परमात्मा की मंगलमय वाणी महावीर भगवान की मंगलमय वाणी और सम्यक पराक्रम की धर्म चर्चा! गुरुओं की गुण गाथा करके जो अपने आपको विनय धर्म से जोड़ लेता है और, संपर्क में आने वालों को भी जोड़ देता है वह दुर्गति के द्वार को बंद कर देता है और सुगति के द्वार को खोल देता है! गुरु का दर्जा परमात्मा से भी ऊंचा होता है! क्योंकि गुरु ही हमें अज्ञान से ज्ञान की तरफ, अंधकार से प्रकाश की तरफ, आत्मा से परमात्मा की तरफ और मोक्ष के आनंदमयी वातावरण की तरफ ले जाने वाले मार्गदर्शक होते हैं! गुरु के पास पहुंच कर भी विनय नहीं, ज्ञान का प्रवास नहीं तो वह विकृत बल्ब के समान होता है जिसे कितना भी प्रयास कर लो रोशनी नहीं मिलती! गुरु ज्ञान के पावर हाउस हैं, गुरु जीवन के शिल्पी होते हैं और असंस्...
पुज्य जयतिलक जी म सा ने जैन भवन, रायपुरम में प्रवचन में बताया कि भव्य जीवों को संसार सागर में तिरने के लिए प्रभु ने जिनवाणी रूपी गंगा प्रवाहित की। दो प्रकार के धर्म बताए श्रुत धर्म और चारित्र धर्म अहिंसा धर्म का दृढ़ता पूर्वक पालना करने वाले अणगार और अहिंसा धर्म का कुछ छुट के साथ पालन करने वाले आगार। आगार धर्म का दूसरा व्रत साथ है। सत्य व्रत में भी जीव हानि की आशंका होती है! बड़ा झूठ जीवन में कभी नहीं बोले ! इसको जीव की हिंसा हो जाती है। अनर्थ हो जाता है। छोटा झूठ बोलन का भी विवेक रखो! किसी जीव को बाधा नहीं आए ऐसा सोच समझ कर बोलो। सत्य बोलना सरल है उसमें उलझने की संभावना नहीं है। असत्य बोलना कठिन है! आप उलझ सकते है! एक झूठ के पिछे हजार झूठ बोलना पड़ सकता है! उस पर विश्वास हट सकता है। जैन धर्म सत्य बोलने का परमिट देता है। छोटा झूठ बोलना भी आवश्यक नहीं है! सत्य से एकता बनी रहती है घर में, समाज ...
श्रीरामपूर दि. 23: स्त्रीला समान दर्जा मिळाला पाहिजे, आपण मुली प्रमाणे सुनेलाही वागवावे तरच संसार सुखी होईल असे प्रतिपादन प. पू. विश्वदर्शनाजी म.सा. यांनी केले. सुन व मुलगी यांच्या भेदभाव करु नये, दोघी स्त्रीयाच असतांना एकीला शबासकी तर दुसरीला टोमणे हा प्रकार टळला पाहिजे असे स्पष्ट करुन त्या म्हणाल्या की, भारतीय संस्कृतीत धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष असे चार पुरुषार्थ आहेत, धर्मानुसार आचारण करावे, धर्मानुसार संसार केला तर मोक्षाचा मार्ग सापडतो. प्रत्येक स्त्रीने लज्जा हा दागिना जपला पाहिजे, स्त्रीयांनी मर्यादा पाळली पाहिजे, पुर्वी महिला कपाळावर गंध लावत असत आता त्या ऐवजी टिकली आली आहे, टिकल्या आल्या अन् बाथरुमच्या भिंती सौभाग्यवती झाल्या. लाल रंग हा भक्तीला रंग आहे. दोन भुवया मध्ये गंध लावावे, भुवया मधील ही जागा शक्तीचा स्त्रोत आहे. सुषमा स्वराज यांचे उदाहरण स्त्रीयांना स्फुर्तीदायक ठरते. हल्ली...