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हमारा मष्तिस्क सदा शान्त और सहज रहे : मुनि सुधाकरजी

हमारा मष्तिस्क सदा शान्त और सहज रहे : मुनि सुधाकरजी

नवरंगी तपोमहायज्ञ में भाई बहनों ने दिखा रहे उत्साह

माधावरम्, चेन्नई 28.08.2022 ; श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ माधावरम् ट्रस्ट द्वारा आचार्य महाश्रमण तेरापंथ जैन पब्लिक स्कूल में पर्युषण महापर्व के अंतर्गत *आध्यात्मिक प्रवचनमाला के पांचवे दिन अणुव्रत चेतना दिवस* पर प्रवचन करते हुए मुनि श्री सुधाकरकुमारजी ने कहा- शरीर के सभी अंगो में मष्तिस्क का महत्व बहुत अधिक है। उसे विश्व के सबसे शक्तिशाली कम्प्युटर की उपमा दी जाती है। उसकी सुरक्षा पर हर समय ध्यान देना जरूरी है। *जिसका मष्तिस्क शान्त और सहज होता है, वह शक्तिशाली होता है।* किसी भी प्रकार का भावावेश मष्तिस्क को अशान्त और उत्तेजित बना देता है। जो मष्तिस्क को शक्तिशाली बनाना चाहते है, उन्हें सब प्रकार के भावावेश से स्वयं को बचाना चाहिये। दो क्षण का भावावेश शरीर में जहरीले रसायन पैदा करता है। इससे शारीरिक और मानसिक शक्तियां नष्ट होती है। कठिन परिस्थितियों तथा बीमारियों से लड़ने की ताकत खत्म होती है। इसलिए हमें मष्तिस्क को सदा शांत और सहज रखना चाहिये। नियमित रूप से योग साधना करने तथा अध्यात्म प्रधान जीवन शैली का विकास करने से हम भावावेश पर विजय पा सकते है तथा शान्ति और सहजता से जी सकते है।

स्थानांग सूत्र में बताएं गए चार प्रकार के उपसर्गो का विवेचन करते हुए मुनिश्री ने कहा कि देव सम्बन्धी, मनुष्य सम्बन्धी और पशु सम्बन्धी उपसर्गो को सभी समझ सकते है। चौथे प्रकार के उपसर्ग का सम्बन्ध हमारे आन्तरिक जगत से है। जिसका आत्मबल और मनोबल कमजोर होते है व बिना कारण ही जो निराशा, हीनता और भय की ग्रन्थि से प्रभावित होता है, यह चौथे उपसर्ग से जुड़ा हुआ है। वर्तमान युग में *अनेक भाई बहिन सुखी और सम्पन्न होते हुए भी डिप्रेसन के शिकार होते है।* स्वस्थ मष्तिस्क के निर्माण से ही उनकी समस्या का समाधान हो सकता है। *मष्तिष्क को स्वस्थ और शक्तिशाली बनाने के लिए प्रतिदिन धार्मिक साधना के रसायन का सेवन करना जरूरी है।* मुनिश्री ने भगवान महावीर की भव परंपरा का वर्णन करते हुए विश्वभुति एवं त्रिपृष्ट वासुदेव के भव का विस्तार से वर्णन किया।

मुनि श्री नरेशकुमारजी ने सुमधुर गीतिका का संगान करते हुए कहा छोटे-छोटे व्रत का पालन करना ही अणुव्रत हैl अणुव्रत जीवन जीने की कला सिखाता हैl अणुव्रत संयम प्रधान जीवन शैली का संवाहक हैै। लमंगलाचरण Emmar अपार्टमेंट की बहनो ने किया। एकासन प्रत्याख्यान के उपलक्ष मे बाफणा परिवार ने गीतिका प्रस्तुत की।

इस अवसर पर *भाई श्री नवीन बाफणा ने 49 एवं श्री श्रेयांस सेठिया ने 51 एकासन* का प्रत्याख्यान कियाl पर्युषण पर्व के प्रायोजक *श्री पन्नालालजी भरतजी टाटिया* का सम्मान माधावरम ट्रस्ट की ओर से घीसुलाल बोहरा, माणकचंद आच्छा, रमेश परमार अशोक परमार, ज्ञानचंद आंचलिया ने किया। पर्युषण पर्व के अवसर पर कई भाई बहनों ने तपस्या का प्रत्याख्यान किया। नवरंगी तप में भी भाई-बहनों अच्छा उत्साह दिखा रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन श्री सुरेश रांका ने किया। तेरापंथ ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी घीसूलाल बोहरा ने बताया आगामी 11 सितंबर को *स्वस्थ, सुखी एवं समृद्ध जीवन में जैन वास्तु की भूमिका* पर भव्य सेमिनार का समायोजन तेरापंथ नगर माधावरम् में मुनिश्री के सान्निध्य में किया जाएगा l

सम्प्रेषक : स्वरूप चन्द दाँती

मीडिया प्रभारी : श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ माधावरम् ट्रस्ट, चेन्नई

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