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भावों की पवित्रता से अशुभ कर्मों का नाश होता है:- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

भावों की पवित्रता से अशुभ कर्मों का नाश होता है:- युवाचार्य महेंद्र ऋषि

एएमकेएम में धर्मसभा का आयोजन

एएमकेएम जैन मेमोरियल सेंटर में चातुर्मासार्थ विराजित श्रमण संघीय युवाचार्य महेंद्र ऋषिजी ने गुरुवार को प्रवचन में कहा कि कर्म पोद्गलिक है। वह अपनी चेतना के साथ जुड़े हुए होते है। कर्म को कई प्रकार की शक्तियां मिल जाती है। जो कर्म सत्ता में है और उदय में नहीं आए हैं, उनका प्रभाव उनके उदय के साथ अनुभव होता है। जो कर्म उदय में आ गया, वह मोक्ष के अंतिम पड़ाव तक चलता है। जो कर्म हमारी आत्मा के पास आ गए हैं, उनका बंध हो जाता है। कर्मबंध के साथ कई चीजें भी जुड़ जाती है। उन्होंने कहा कि पुण्य का भी अपवर्तन होता है और पाप का भी। भगवान कहते हैं भावों की पवित्रता, अच्छी सोच रखोगे तो अशुभ कर्म घट सकते हैं। अशुभ कर्म आपकी पुण्यराशि को कम कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि अशुभ में शुभ और शुभ में अशुभ कर्म का संक्रमण हो सकता है। अशुभ निमित्त को टालें तो हम पुण्य के अपवर्तन से बच सकते हैं। हम शुभ कार्यों की अनुमोदना से पाप का अपवर्तन कर सकते हैं। जप-तप, धर्म के कार्य करने से अशुभ में शुभ कर्म आ जाते हैं। उत्तर प्रकृतियां कर्म को जानती है। मोहनीय व आयुष्य कर्म को छोड़कर सभी प्रकृतियों में संक्रमण हो सकता है। जब धर्म का कार्य करेंगे तो शुभ कर्म अशुभ कर्म को दूर कर देंगे। जो कर्म हमारे साथ लगे हुए हैं, उसमें प्रोसेस कर सकते हैं। उन्होंने कहा, साधना से सिद्धि की प्राप्ति हो सकती है। हम सब पुरुषार्थ करें। आत्मा का स्वरूप ज्ञान, दर्शन है। परमात्मा के वचनों का अनुसरण कर जीवन में आगे बढ़ें।

महासती अणिमाश्री जी ने कहा कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र द्वारा आध्यात्मिक समृद्धि पाने के लिए धर्म से जुड़कर जीवन को धन्य बनाएं। इस दौरान वर्धमान स्थानकवासी जैन महासंघ तमिलनाडु के मंत्री धर्मीचंद सिंघवी ने बताया कि शुक्रवार को चन्द्रयान के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. नरेन्द्र भंडारी एएमकेएम में यूरो स्पेस साइंस की कार्यशाला में संबोधन देंगे। सभी बच्चों, युवाओं को इस कार्यक्रम में भेजने का लक्ष्य रखें। उन्होंने कहा कि इस चातुर्मास में दस विशेष वैज्ञानिक धर्म और विज्ञान कार्यशाला में आने वाले हैं। गुरुवार को तरुण जैन के संपादक विरेन्द्रकुमार जैन तथा बरखेड़ी से गुरु भक्तों का स़ंघ का युवाचार्यश्री के दर्शनार्थ आगमन हुआ। कमल छल्लाणी ने धर्मसभा का संचालन किया।

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