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प्रमाद ही जीवन निर्माण में बाधक होता है: साध्वी आनन्द प्रभा

प्रमाद ही जीवन निर्माण में बाधक होता है: साध्वी आनन्द प्रभा

आमेट के जैन स्थानक मे जैन साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा हम सभी को क्षणभर का प्रमाद नहीं करना चाहिए। प्रमाद ही जीवन निर्माण में बाधक होता है। प्रमाद तजे बिना सम्यक मार्ग पर नहीं बढ़ सकते हैंसाधना का मार्ग कठिन एवं कड़वा होता है, लेकिन फल जरूर मीठा होता है।

साधना के साथ जीवन में सहनशीलता तथा जीवन उज्जवल बनता है। त्यागी एवं भोगी में अंतर बताते हुए कहा कि त्यागी संसार के पदार्थों में अनासक्त भाव रखता हुआ पहले ही मुक्त हो जाता है, लेकिन भोगी जीवन पर्यंत सांसारिक सुखों को भोगने में अमूल्य मानव जीवन को बर्बाद कर देता है। त्यागी सभी को सहज छोड़ देता है जबकि भोगी पूरे जीवन में सबका भोग नहीं कर सकता है। यह मन ही हमें त्याग एवं भोग मार्ग पर ले जाता है। इसलिए मन पर नियंत्रण आवश्यक है।

साध्वी विनीत प्रज्ञा ने कहा जीवन क्षण भंगुर है, चंचल विद्युत के समान, ओस की बूंदों के समान है। इसलिए जब तक वृद्धावस्था, रोग, अशक्तता व्याधि नहीं आती जब तक धर्म ध्यान कर अपने आचरण को धर्ममय बनाए।दुर्व्यसनों की आग में नहीं जले, सत्कर्म करे। यह ऋषि मुनियों का ज्ञान हमें विरासत में मिला है। उन्होंने कहा कि कोई मरना नहीं चाहता है।

जिसने सत्कर्म किए वह मृत्यु को महोत्सव मानकर स्वागत करता है, लेकिन आचरण राग-द्वेष आदि कषायों में व्यतीत व्यक्ति अपना पराभव बिगाड़ लेता है। साध्वी अनुपमा ने कहा कि मनुष्य जीवन दिन के समान है। जैसे दोपहर, शाम एवं रात्रि आती है, उसी प्रकार मनुष्य की भी बाल, युवा, प्रौढ़, वृद्धावस्था है। दूसरों को नहीं देखते हुए वह अपने आपको देखे।

उन्होंने कहा कि जिनवाणी की रणभेरी है। जिनवाणी श्रवण का अवसर मिला है। हम इस आचरण को जीवन में उतारे। उन्होंने कहा कि स्वयं की निंदा करे औरों की नहीं। सांसारिक दलदल, माया के मूर्छा भाव से बाहर जिनवाणी में अनुरक्त बने, अपने अज्ञान, अपने विभाव को मिटाएं, भक्ति समर्पण श्रद्धा एवं कर्म निर्जरा मार्ग पर आगे बढ़े, अपनी भाव दशा में आए।

मीडिया प्रभारी प्रकाश चन्द्र बडोला व मुकेश सिरोया ने बताया कि 7/8/2024 को जिनशासन चंद्रिका गुरुणि मैय्या श्री झंकार कुँवर जी महाराज का 114 वां जन्म दिवस तप त्याग स्वाध्याय द्वारा मनाया जाएगा इस कार्यक्रम का लाभ अधिक से अधिक ले!! इस अवसर गुजरात के विजापुर से शांतिलाल दक एवं बैंगलोर से श्रावक-श्राविका उपस्थित थे।

इस धर्म सभा का संचालन सुरेश दक ने किया ।

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