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पर्युषण में हर गलती की माफी मांगी जाती हैं

पर्युषण में हर गलती की माफी मांगी जाती हैं

वीरपत्ता की पावन भूमि आमेट के जैन स्थानक मे किया पर्व पर्युषण का आगमन साध्वी विनीत रूप प्रज्ञा ने अंतगड सूत्र का मूल और अर्थ का विवेचन करते हुए कहा पर्युषण पर्व क्या हैl आत्मीयता में पारस्परिक वैमन्स्य, मतभेद, मनभेद दूर किए जाते हैं। जैन धर्म दर्शन का स्थान विशिष्ट है। यहां आत्मा की शुद्धि, विशुद्धि के लिए पर्युषण पर्व में आराधना की जाती है।

इसमें 8 दिन श्रावक-​श्राविकाएं सांसारिक और व्यापारिक कार्य को छोड़कर निवृत जीवन जीने की प्रैक्टिस करते हैंकड़वी बात का मीठा जवाब दो, गुस्से में चुप रहोजैन समाज आज से पयुर्षण पर्व मना रहा है। यह आत्मा की शुद्धि का पर्व है। यह 8 दिन तक चलेगा। इसमें धर्म आराधना, त्याग-तपस्या होती है और गलतियों की आलोचना की जाती है। इस पर्व के आखिरी दिन को संवत्सरी पर्व के रूप में मनाया जाता है। हर गलती की माफी मांगी जाती हैंl

साध्वी डॉ चन्द्र प्रभा ने कहा यह पर्व महावीर स्वामी के मूल सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म, जिओ और जीने दो की राह पर चलना सिखाता है तथा मोक्ष प्राप्ति के द्वार खोलता है। इस पर्वानुसार- ‘संपिक्खए अप्पगमप्पएणं’ अर्थात आत्मा के द्वारा आत्मा को देखो।पर्युषण पर्व जैनों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व बुरे कर्मों का नाश करके हमें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान महावीर के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर हमें निरंतर और खासकर पर्युषण के दिनों में आत्मसाधना में लीन होकर धर्म के बताए गए रास्ते पर चलना चाहिए

साध्वी चन्दनबाला ने कहा ने कल्पसूत्र का वाचन करते हुए कह जैन दर्शन में कल्पसूत्र ग्रंथ के वाचन की सुव्यवस्थित विधि है। इसका वाचन एवं श्रवण करने वाले जीवात्मा निश्चय ही भव तीसरे अथवा आठवें तक मोक्ष सुख को प्राप्त होते हैं। इस महान पवित्र ग्रंथ में तीर्थंकर जीवन दर्शन, गणधर परंपरा एवं साधु समाचारी तीन अधिकार प्रस्तुत किए गए हैं। कल्पसूत्र को प्राकृत भाषा में लिखा गया था.

पारंपरिक रूप से मान्यता है कि कल्पसूत्र की रचना महावीर स्वामी के निर्वाण के 150 साल बाद हुई थी. कल्पसूत्र को चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में लिखा गया माना जाता है.

साध्वी आनन्द प्रभा ने कहा जैन धर्म के इस त्योहार को पर्वों का राजा कहा जाता है. यह पर्व भगवान महावीर स्वामी के मूल सिद्धांत ‘अहिंसा परमो धर्म, जिओ और जीने दो’ की राह पर चलना सिखाता है और मोक्ष के द्वार खोलता है.इस पर्व के दौरान त्याग, संयम और शांति का बड़ा महत्व है, जिसमें एकासन उपवास रखकर तपस्या की जाती है। 10 धर्मों में हर धर्म का अपना सार है, जिससे जीवन सरल बनता है। नीति जैन सांस्कृतिक कार्यक्रम करवाती हैं। इसमें समस्त समाज के लोग धर्म लीन होकर भक्ति भाव से भगवान की आराधना करते हैं।

नरेंद्र बडोला ने इस धर्म सभा का संचालन करते हुए बताया इन 8 दिनों के लिए जैन स्थानक के प्रांगण में सुबह 7:00 बजे से शाम के 7:00 बजे तक महिला और पुरुषों का नवकार मंत्र का अखंड जाप रखा गया है, 8:30 से 11:00 बजे तक अंतगदसूत्र एवं कल्प सूत्रप्रवचन चलेगा कल प्रवचन का टॉपिक रहेगा घर को स्वर्ग कैसे बनाएं दो से तीन बजे कल्पसूत्र का वाचन तीन से चार धार्मिक प्रतियोगिता शाम को प्रतिक्रम इन 8 दिनों में अधिक से अधिक धर्म ध्यान का सुअवसर लेl

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