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जो विनम्र होते हैं वे हर जगह सम्मान पाते हैं: देवेंद्रसागरसूरि

जो विनम्र होते हैं वे हर जगह सम्मान पाते हैं: देवेंद्रसागरसूरि

श्री सुमतिवल्लभ नोर्थटाउन श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ में पूज्य आचार्य श्री देवेंद्रसागरसूरिजी ने प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि धर्म-ग्रंथों का एक मूल मंत्र है जो नम्र होकर झुकते हैं वही ऊपर उठते हैं। विनम्रता न केवल आपके व्यक्तित्व में निखार लाती है, बल्कि कई बार सफलता का कारण भी बनती है। विनम्रता के एवज में जो सम्मान मिलता है उसका एक अलग महत्व है। मन की कोमलता और व्यवहार में विनम्रता एक बड़ी शक्ति है। कोमलता सदा जीवित रहती है, जबकि कठोरता का जल्दी ही विनाश हो जाता है। तलवार कठोर से कठोर पदार्थ को काट देती है, लेकिन कई कठोर पदार्र्थों को काटने की ताकत उसमें नहीं होती।

नदी समुद्र तक पहुंचती है तो अपने साथ पानी के अतिरिक्त बड़े-बड़े लंबे पेड़ साथ ले आती है। एक दिन समुद्र ने नदी से पूछा कि तुम पेड़ों को तो अपने प्रवाह में ले आती हो, परंतु कोमल बेलों और नाजुक पौधों को क्यों नहीं लाती हो? नदी बोली कि जब-जब पानी का बहाव बढ़ता है तब बेलें झुक जाती हैं और झुककर पानी को रास्ता दे देती हैं। इसलिए वे बच जाती हैं। वैसे ही जो जीवन में विनम्र रहते हैं उनका अस्तित्व, कभी समाप्त नहीं होता। आप सबने अक्सर देखा होगा और इस बात को महसूस भी किया होगा कि कई लोग अपने विशेष कार्य के माहिर होते हैं, लेकिन विनम्रता के अभाव में घर या कार्यालय में सदैव परेशानी का शिकार होते हैं। विनम्रता कायरता नहीं है। यह व्यक्ति को शांति, शक्ति और ऊर्जा प्रदान करती है।

मनुष्य यदि विनम्रता से जीवन जीना सीख ले तो अनेक परेशानियां देखते ही देखते समाप्त हो जाती हैं। इनके लिए किसी विशेष उपाय की आवश्यकता नहीं है, बल्कि थोड़ा सा व्यवहार में बदलाव मात्र लाने से यह संभव हो जाता है। विनम्र व्यक्ति के सामने कठोर हृदय वाले व्यक्ति को भी झुकना ही पड़ता है। छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर हम अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं। जो विनम्र होते हैं वे हर जगह सम्मान पाते हैं। परमात्मा को भी किसी की अकड़ पसंद नहीं है। वह अपने भलाई के लिए हमेशा खड़ा है, परंतु आवश्यकता है स्वयं में कुछ मूलभूत सुधार लाने की ताकि जीवन सफल हो सके।

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