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क्रोध मान माया लोभ, ये सभी कषाय आत्मा को धूमिल कर देते है: प पू. सुधा कंवर जी म सा

क्रोध मान माया लोभ, ये सभी कषाय आत्मा को धूमिल कर देते है: प पू. सुधा कंवर जी म सा

कोडमबाक्कम वडपलनी श्री जैन संघ प्रांगण में आज मंगलवार तारीख 13 सितम्बर 2022, प पू. सुधा कंवर जी म सा आदि ठाणा 5 की निश्रा में प्रखर वक्ता श्री विजय प्रभा जी मसा के मुखारविंद से:-क्रोध मान माया लोभ, ये सभी कषाय आत्मा को धूमिल कर देते है और जीव को तिर्यंच गति में पहुंचा देते है! क्रोध एवं आवेश आने पर शरीर में कंपकपी शुरू हो जाती है और गलत निर्णय ले लिए जाते हैं हमें इस पर चिंतन करना चाहिए!

कषाय तीन प्रकार के होते हैं!

1) जघन्य कषाय

2)मध्यम कषाय एवं

3)उत्कृष्ट कषाय

हमें इन तीनों कषाय से बचना चाहिए!

एक व्यक्ति दुकान से घर पर आता है और अपनी ₹5000 की कमाई पत्नी के हाथ में रख देता है और वे रुपए छोटे बच्चे के हाथ लग जाते हैं और वह पेपर समझ कर उसे चूल्हे में फेंक कर जलते नोट को देखकर खुश होता है! अप्रत्याशित इस घटना से क्रोधित मां उसे मारती है और वह चूल्हे के अंगारे पर गिर जाता है और थोड़ी ही देर में उसकी मृत्यु हो जाती है! घबराई हुई मां का पल्लू भी आग की चपेट में आ जाता है और वह भी मृत्यु को प्राप्त करती है और उसके पति को जब मालूम पड़ता है कि पत्नी भी ना रही और बच्चा भी ना रहा तो वह भी आत्महत्या कर लेता है! ये सब कषाय के कारण ही होते हैं!

सुयशा श्रीजी मसा ने फ़रमाया:-हमें हमारी जिंदगी को समभाव में जीना है! राई का पहाड़ या तिल का ताड़ नहीं करना चाहिए! पीड़ा प्रलोभन और वासना से दूर रहना चाहिए! हमेशा सही रास्ता चुनना चाहिए और हमारा दृष्टिकोण भी सही होना चाहिए! तनाव कैसा भी हो, दुश्मनी कैसी भी हो, उनका खात्मा करना चाहिए! काम काज वाले व्यापारी के लिए बरसात दुविधा बन सकती है! वही बरसात एक विद्यार्थी के लिए सुविधा बन सकती है जब उस दिन उसकी परीक्षा हो, और उसने बराबर पढ़ाई नहीं की हो, तब स्कूल की छुट्टी हो जाती है! रिश्ते और दुश्मनी बनाना बहुत आसान है लेकिन उन्हें निभाना बहुत मुश्किल है!

एक छोटे पत्थर को हाथ में लेकर हाथ को थोड़ी देर के लिए पत्थर दिखाने की मुद्रा में खड़े रहना अच्छी बात है लेकिन वहीं पर उसी मुद्रा में 1 घंटे 6 घंटे या 12 घंटे खड़े रहना बहुत मुश्किल है! हाथ पैर अकड़ जाते है एक ही मुद्रा में खड़े रहने से! दुर्योधन को दूसरा दुर्योधन हरा नहीं सकता! दुर्योधन को अर्जुन ही हरा सकता है और वो भी तब,जब कृष्ण जैसे सारथी साथ में हो! हमारे जन्म और मरण की परिस्थिति हमारे हाथ में नहीं है लेकिन बीच की परिस्थितियां हमारे हाथ में है! हमें उस परिस्थिति को अच्छी तरह निभाने की कला आनी चाहिए!

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